LPG: पश्चिम एशिया में जंग की वजह से कमर्शियल सिलेंडर उभोक्ताओं को तगड़ी मार पड़ रही थी। उन्हें गैस सिलेंडर पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहे थे। सरकार ने सप्लाई में कटौती कर दी थी। हालांकि अब केंद्र सरकार की ओर से इंडस्ट्री को बड़ी राहत का ऐलान किया गया है। केंद्र सरकार ने धीरे-धीरे उद्योगों को ईंधन की सप्लाई फिर से शुरू कर दी है। इसके तहत, मुख्य उद्योगों के लिए लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और नेचुरल गैस के कोटे में इजाफा किया गया है। सरकार ने हर सेक्टर के लिए आवंटन 70 फीसदी तक बढ़ा दिया है। हालांकि रोजाना सप्लाई पर एक लिमिट भी तय कर दी गई है।
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय के सचिव ने राज्यों के मुख्य सचिवों को एक पत्र लिखा है। इसमें बताया गया है कि सरकार ने दवा, खाद्य, पॉलीमर, कृषि और स्टील जैसे जरूरी सेक्टरों के लिए LPG का कोटा बढ़ाकर, मार्च 2026 से पहले के उनके औसत इस्तेमाल का 70 फीसदी कर दिया है।
वहीं हर सेक्टर को रोजाना 0.2 टीएमटी गैस की लिमिट लगाई गई है। इतना ही नहीं मंत्रालय ने उर्वरक उद्योग (fertilizer industry) के लिए प्राकृतिक गैस का आवंटन भी बढ़ाकर, उनके पिछले छह महीनों की औसत खपत का 95 फीसदी कर दिया है।
किन्हें मिलेगी प्राथमिकता?
सरकार के मुताबिक, जिन फैक्ट्रियों में एलपीजी की जगह प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल नहीं हो सकता, उन्हें पहले एलपीजी दी जाएगी। साथ ही, इंडस्ट्रीज को तेल वितरक कंपनियों (OMC) यानी तेल कंपनियों के साथ रजिस्ट्रेशन करना होगा और पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्शन के लिए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के पास आवेदन करना होगा। हालांकि, जहां एलपीजी मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस का जरूरी हिस्सा है और उसकी जगह गैस नहीं आ सकती, वहां पीएनजी आवेदन की शर्त माफ कर दी गई है।
घरेलू गैस सिलेंडर को सरकार ने दी थी प्राथमिकता
मार्च में, सरकार ने घरेलू खाना पकाने के लिए LPG की सप्लाई को प्राथमिकता दी थी। अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर हमला करने से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ बंद कर दिया गया था। इससे करीब 90 फीसदी आयात रुक गया था। अब अमेरिका की ओर से सीजफायर का ऐलान कर दिया गया है। सरकार ने कमर्शियल और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल करने वालों के लिए सप्लाई धीरे-धीरे बहाल कर दी है। भारत की सालाना LPG खपत लगभग 33 मिलियन टन है, जिसमें से 60-65 फीसदी आयात किया जाता है।