GST Collection: 17.4 लाख करोड़ का GST कलेक्शन, अब ई-वे बिल और ई-सील से टैक्स सिस्टम कितना बदलेगा?

GST Collection: आर्थिक सर्वे के मुताबिक अप्रैल-दिसंबर 2025 में जीएसटी कलेक्शन 17.4 लाख करोड़ रुपये रहा। टैक्स बेस और ई-वे बिल दोनों में बढ़ोतरी हुई है। अब फोकस ई-वे बिल, ई-सील और डिजिटल ट्रैकिंग को मजबूत कर टैक्स सिस्टम को ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाने पर है।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम वार्ता)
पब्लिश्ड29 Jan 2026, 08:31 PM IST
जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी, जानें आंकड़ें (सांकेतिक तस्वीर)
जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी, जानें आंकड़ें (सांकेतिक तस्वीर)

GST Collection: आर्थिक सर्वे 2024-25 में जीएसटी को लेकर बड़ी तस्वीर सामने आई है। संसद में पेश सर्वे के मुताबिक, अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच देश में कुल 17.4 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन हुआ। यह न सिर्फ सरकारी कमाई में मजबूती दिखाता है, बल्कि यह भी साफ करता है कि टैक्स सिस्टम धीरे-धीरे ज्यादा डिजिटल और ट्रैक करने लायक बन रहा है। अब सरकार का फोकस जीएसटी से जुड़े ई-वे बिल और ई-सील जैसे सिस्टम को और मजबूत करने पर है।

जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी, टैक्स बेस भी हुआ बड़ा

सर्वे के अनुसार, जीएसटी वसूली में सालाना आधार पर 6.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। टैक्स देने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। साल 2017 में जहां जीएसटी के तहत करीब 60 लाख करदाता पंजीकृत थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 1.5 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।

इतना ही नहीं, अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान ई-वे बिल की संख्या में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

ई-वे बिल और ई-सील पर क्यों बढ़ रहा है जोर?

आर्थिक सर्वे में बार-बार होने वाली जांच और रास्ते में लगने वाली देरी को कम करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सील (ई-सील), वाहन ट्रैकिंग और ई-वे बिल के डिजिटल इंटीग्रेशन पर जोर दिया गया है।

इससे सामान की आवाजाही की एंड-टू-एंड निगरानी संभव होगी और व्यापारियों का समय और खर्च दोनों बचेंगे। इंटीग्रेटेड ई-सील और इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम से टैक्स चोरी रोकने और कर संग्रह को आसान बनाने में मदद मिलेगी।

क्या होता है ई-वे बिल और क्यों है जरूरी?

ई-वे बिल एक ऑनलाइन दस्तावेज होता है, जिसे तब बनाना जरूरी होता है जब कोई कारोबारी तय सीमा से ज्यादा मूल्य का सामान एक जगह से दूसरी जगह भेजता है। इसमें भेजने वाले, पाने वाले, माल की प्रकृति, मात्रा और रास्ते की पूरी जानकारी दर्ज होती है।

सरकार के लिए यह एक तरह की डिजिटल निगरानी व्यवस्था है, जिससे यह पता चलता है कि देश में सामान कहां से कहां जा रहा है और उस पर सही टैक्स चुकाया गया है या नहीं।

जीएसटी सुधारों का अगला कदम क्या होगा?

सर्वे में कहा गया है कि जीएसटी सुधारों के दूसरे चरण में जीएसटी दरों को और तर्कसंगत बनाया जाएगा। इससे टैक्स का बोझ घटेगा और मांग बढ़ने की उम्मीद है।

इसके साथ ही राज्यों में होने वाली रैंडम मोबाइल चेकिंग से ईमानदार व्यापारियों को होने वाली परेशानी कम करने के लिए रिस्क-बेस्ड अलर्ट सिस्टम अपनाने पर जोर दिया गया है। सर्वे का मानना है कि कम टैक्स रेट से खपत बढ़ेगी, जिससे राजस्व पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक असर की भरपाई हो जाएगी।

कर वसूली से आगे बढ़कर आसान व्यापार

आर्थिक सर्वे का मानना है कि जीएसटी सुधारों का अगला फोकस बदलते बिजनेस और सप्लाई चेन की जरूरतों के मुताबिक होना चाहिए। ई-वे बिल सिस्टम को सिर्फ नियंत्रण के औजार के बजाय, आसान और तेज लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने वाले टूल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

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