GST बदलाव से FMCG को बड़ा झटका! वॉल्यूम ग्रोथ 5.4% पर सिमटी

GST Rates Change Impact: जुलाई-सितंबर तिमाही में GST दरों में लगातार बदलाव की वजह से कंपनियों ने कई प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा दिए। लिहाजा, कंज्यूमर पहले के मुकाबले कम सामान खरीदे।

Shivam Shukla( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड18 Nov 2025, 03:10 PM IST
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GST Rates Change Impact 2025: गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) रेट्स में बार-बार हुए बदलावों ने FMCG सेक्टर को बड़ा झटका दिया है। जुलाई-सितंबर 2025 तिमाही में वॉल्यूम के हिसाब से बिक्री में केवल 5.4 फीसदी बढ़ोतरी हुई, जबकि कीमतों में इससे ज्यादा उछाल दर्ज किया गया है। इस दौरान कीमतें 12,9 प्रतिशत बढ़ गई हैं। डेटा एनालिस्ट कंपनी नीलसनआईक्यू की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण बाजार में भी सालाना आधार पर गिरावट आई और यह 8.4 प्रतिशत से घटकर 7.7 प्रतिशत हो गया। हालांकि यह लगातार सातवीं तिमाही में शहरी इलाकों की बिक्री की गति से ज्यादा रहा।

GST बदलाव के बाद प्रोडक्ट्स हुए महंगे

रिपोर्ट के मुताबिक, GST दरों में लगातार बदलाव की वजह से कंपनियों ने कई प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा दिए। लिहाजा, कंज्यूमर पहले के मुकाबले कम सामान खरीदे। वहीं, वॉल्यूम के लिहाज से कुल बढ़ोतरी मात्र 5.4 प्रतिशत रही, जबकि मूल्य वृद्धि 7.1 फीसदी तक पहुंच गई। कुल वैल्यू ग्रोथ 12.9 फीसदी दिखाई दे रही है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा महंगाई की वजह से आया है। इसकी मुख्य वजह खपत में बढ़ोतरी नहीं है।

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ग्रामीण इलाकों ने संभाला मोर्चा

सबसे राहत वाली खबर ग्रामीण बाजार से आई। सालाना आधार पर ग्रामीण FMCG ग्रोथ 8.4 फीसदी से थोड़ी लुढ़क कर 7.7 फीसदी पर आई, लेकिन यह लगातार सातवीं तिमाही है जब गांवों ने शहरों को पीछे छोड़ दिया है। ग्रामीण क्षेत्र अब भी कुल FMCG डिमांड का करीब 38 फीसदी हिस्सा रखते हैं और सस्ते दाम व छोटे पैक की वजह से यहां की खपत मजबूत बनी हुई है।

दूसरी तरफ शहरी बाजार में छोटे शहरों में हल्की रिकवरी के संकेत जरूर मिले, मगर बड़े महानगरों में क्रमिक मंदी साफ दिख रही है। शहरी क्षेत्र कुल मांग का दो-तिहाई से ज्यादा हिस्सा रखते हैं, इसलिए उनकी सुस्ती पूरे सेक्टर पर भारी पड़ रही है।

लोगों ने छोटे पैकेट्स ज्यादा खरीदे

यूनिट के हिसाब से बिक्री वॉल्यूम ग्रोथ से कहीं ज्यादा रही। इसका सीधा मतलब है कि लोग अब बड़े पैक की बजाय छोटे-छोटे सैशे और मिनी पैक ज्यादा खरीद रहे हैं। जेब पर दबाव बढ़ने की वजह से उपभोक्ता एक बार में कम खर्च करना पसंद कर रहे हैं, जिससे कंपनियों को यूनिट बेचने में तो फायदा हो रहा है, लेकिन कुल मात्रा नहीं बढ़ पा रही।

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ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने किया बेहतर प्रदर्शन

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने इस मुश्किल तिमाही में भी शानदार प्रदर्शन किया। आठ बड़े महानगरों में ई-कॉमर्स की हिस्सेदारी पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले पूरे एक प्रतिशत अंक बढ़ गई। नीलसनआईक्यू का कहना है कि तेज डिलीवरी, भारी डिस्काउंट और कैशबैक ऑफर्स की वजह से शहरों में लोग किराना से ज्यादा मोबाइल ऐप से सामान मंगवा रहे हैं।

भारत में नीलसनआईक्यू के कस्टमर सक्सेस हेड (FMCG) शारंग पंत ने कहा, ‘भारतीय FMCG सेक्टर अपनी मजबूती लगातार साबित कर रहा है। ग्रामीण बाजार सातवीं तिमाही से लगातार लीड कर रहा है। छोटे शहरों में रिकवरी की रफ्तार बढ़ रही है। हालांकि कुल मांग का आधार अभी भी गांव ही हैं। ई-कॉमर्स खासकर मेट्रो शहरों में ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बना हुआ है।’

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