
Tejas Mk1A engine agreement: भारतीय रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने अमेरिकी इंजन निर्माता कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के साथ एक बड़ा करार किया है। इस समझौते के तहत GE कंपनी HAL को 113 F404-GE-IN20 इंजन उपलब्ध कराएगी, जो भारतीय वायु सेना के तेजस Mk1A लड़ाकू विमानों के दूसरे चरण के निर्माण में लगाए जाएंगे। यह समझौता न केवल इंजनों की सप्लाई बल्कि सपोर्ट पैकेज को भी शामिल करता है।
HAL ने इस करार की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए कहा कि यह समझौता भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को नई दिशा देगा। HAL के अनुसार, इंजन डिलीवरी का शेड्यूल 2027 से 2032 के बीच तय किया गया है। इस डिलीवरी टाइमलाइन से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि तेजस Mk1A के दूसरे चरण की डिलीवरी समय पर पूरी हो सके।
तेजस Mk1A कार्यक्रम की शुरुआत फरवरी 2021 में हुई थी, जब HAL ने भारतीय वायु सेना के लिए 83 तेजस Mk1A जेट्स की सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट किया था। यह अनुबंध करीब 36,400 करोड़ रुपये का था और डिलीवरी फरवरी 2028 तक पूरी होनी थी। लेकिन GE एयरोस्पेस से F404 इंजन की आपूर्ति में देरी होने के कारण HAL फरवरी 2024 की तय डेडलाइन पूरी नहीं कर सका।
रिपोर्टों के मुताबिक, HAL ने अब तक लगभग 10 Mk1A विमान असेंबल किए हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश में रिजर्व इंजन लगाए गए हैं। भारतीय वायु सेना को अभी तक एक भी Mk1A विमान नहीं मिला है। यह स्थिति तब है जब वायु सेना की स्क्वाड्रन क्षमता बीते छह दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है।
हालांकि, 30 सितंबर को GE द्वारा चौथा इंजन सौंपे जाने के बाद HAL को उम्मीद है कि सप्लाई सामान्य स्थिति में लौट आएगी। नवंबर में पांचवें इंजन की डिलीवरी की भी उम्मीद है। HAL ने पहले यह भरोसा जताया था कि 2025-26 के अंत तक 12 Mk1A विमान वायु सेना को सौंप दिए जाएंगे। लेकिन यह तभी संभव होगा जब चल रहे हथियार-फायरिंग परीक्षण पूरी तरह सफल हो जाएं।
सितंबर में HAL को भारतीय वायु सेना की ओर से तेजस Mk1A के दूसरे चरण के लिए एक नया ऑर्डर मिला। इस फॉलो-ऑन ऑर्डर में 97 विमानों का निर्माण शामिल है, जिनमें 68 सिंगल-सीट फाइटर और 29 ट्विन-सीट ट्रेनर जेट शामिल हैं। इस कॉन्ट्रैक्ट की कुल लागत 62,370 करोड़ रुपये से अधिक है।
इस दूसरे चरण की डिलीवरी 2027-28 में शुरू होकर छह वर्षों के भीतर पूरी होने की उम्मीद है। यह ऑर्डर भारत के रक्षा उद्योग के लिए न केवल उत्पादन में निरंतरता लाएगा, बल्कि स्वदेशी क्षमता को मजबूत करने का भी काम करेगा। नए इंजन समझौते को इस दूसरे चरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहले चरण में इंजन सप्लाई में हुई देरी से जो बाधाएं आईं, उन्हें ध्यान में रखते हुए अब HAL ने समय रहते इंजन उपलब्ध कराने की दिशा में यह रणनीतिक कदम उठाया है।
इस समझौते से भारत के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियानों को भी मजबूती मिलेगी। GE के इंजनों के साथ HAL को अब एक स्थिर सप्लाई चेन का भरोसा मिलेगा, जिससे उत्पादन में देरी की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इसके अलावा, HAL और GE के बीच यह साझेदारी भविष्य में और भी गहरी हो सकती है। दोनों कंपनियां पहले से ही F414 इंजन के सह-निर्माण को लेकर भी चर्चा कर रही हैं, जो तेजस Mk2 जैसे उन्नत संस्करणों और अन्य लड़ाकू विमानों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि GE इंजनों की समय पर डिलीवरी से न केवल तेजस Mk1A प्रॉजेक्ट को रफ्तार मिलेगी, बल्कि भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता में भी महत्वपूर्ण सुधार होगा। इससे पुराने हो चुके मिग-21 जैसे विमानों के प्रतिस्थापन की दिशा में भी तेज प्रगति होगी।
तेजस कार्यक्रम भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता का प्रतीक माना जाता है। हालांकि इंजन जैसी कुछ महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए भारत को अभी भी विदेशी साझेदारों पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन HAL और GE का यह समझौता इस दिशा में संतुलित प्रगति का उदाहरण है। 2027 से शुरू होने वाली डिलीवरी के बाद HAL को उम्मीद है कि तेजस Mk1A विमानों की उत्पादन दर हर साल बढ़ेगी। इसका सीधा असर भारतीय वायु सेना की युद्धक क्षमता और तैयारियों पर पड़ेगा।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारत रक्षा उपकरणों के आयात को कम करने और घरेलू निर्माण को बढ़ाने की नीति पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सौदा आने वाले वर्षों में न केवल भारत की सामरिक शक्ति को बढ़ाएगा, बल्कि देश की रक्षा औद्योगिक नीति को भी वैश्विक स्तर पर मजबूती देगा।
कुल मिलाकर, HAL और GE के बीच हुआ यह नया इंजन समझौता भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह न केवल तेजस Mk1A के उत्पादन को गति देगा, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग में विदेशी सहयोग के एक नए युग की भी शुरुआत करेगा। आने वाले वर्षों में अगर GE से तय समयसीमा के भीतर इंजन की आपूर्ति सुनिश्चित हो जाती है, तो भारतीय वायु सेना को अपनी स्क्वाड्रन क्षमता फिर सशक्त करने में बड़ी मदद मिलेगी।
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