HDFC Bank Governance Crisis: देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank में मार्च 2026 में हुए नेतृत्व संकट पर पहली बार विस्तृत टिप्पणी सामने आई है। बैंक के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) और मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) शशिधर जगदीशन ने कहा कि पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती का अचानक इस्तीफा बैंक के लिए एक "चुनौतीपूर्ण घटना" थी। इससे कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर कई सवाल खड़े हो गए थे। यह टिप्पणी बैंक की FY26 वार्षिक रिपोर्ट में शेयरधारकों को लिखे गए संदेश में की गई है।
जगदीशन ने बताया कि उनके जाने के बाद, HDFC बैंक ने RBI की मंज़ूरी से केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन नियुक्त करने के लिए तेजी से कदम उठाए। उन्होंने बताया कि इस्तीफे के अगले ही दिन बोर्ड के सदस्यों ने एनालिस्ट और मीडिया को जानकारी दी और साफ किया कि चक्रवर्ती ने बातचीत के दौरान कभी भी ऐसे तौर-तरीकों को लेकर कोई मुद्दा नहीं उठाया जो उनके निजी मूल्यों या नैतिकता के खिलाफ हों।
क्या था पूरा मामला?
मार्च 2026 में HDFC Bank के तत्कालीन चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफा पत्र में उन्होंने कहा था कि बैंक में कुछ ऐसी "घटनाएं और प्रथाएं" थीं जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थीं। हालांकि उन्होंने किसी विशेष मामले का उल्लेख नहीं किया था।
उनके इस्तीफे के बाद बैंकिंग और निवेशक समुदाय में हलचल मच गई थी और बैंक की गवर्नेंस व्यवस्था पर सवाल उठने लगे थे। कुछ दिनों बाद, उन्होंने नेशनल टेलीविजन पर इशारा किया कि मुख्य विवाद क्रेडिट सुइस के परपेचुअल बॉन्ड (perpetual Bond) की कथित "गलत बिक्री" (mis-selling) से जुड़ा था।
स्वतंत्र कानूनी जांच क्यों कराई गई?
मामले की गंभीरता को देखते हुए HDFC Bank के बोर्ड ने स्वतंत्र कानूनी समीक्षा कराने का फैसला किया। बैंक ने अमेरिका की कानूनी फर्म विल्सन सोनसिनी गुडरिच एंड रोसाटी (Wilson Sonsini Goodrich & Rosati) और भारत की फर्म वाडिया गांधी एंड कंपनी (Wadia Ghandy & Co.) को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इसके अलावा केवल स्वतंत्र निदेशकों वाली एक विशेष समिति भी बनाई गई, जिसने पूरी प्रक्रिया की निगरानी की। जगदीशन् ने आगे कहा कि बोर्ड ने कानूनी समीक्षा की निगरानी करने और उससे जुड़ी जानकारी का बैंक और लॉ फर्मों के बीच सही और समय पर आदान-प्रदान सुनिश्चित करने के लिए सिर्फ़ स्वतंत्र निदेशकों वाली एक विशेष समिति भी बनाई।
जांच में क्या मिला?
- CEO के अनुसार जांच के दौरान:
- बोर्ड की बैठकों के रिकॉर्ड की समीक्षा की गई।
- आंतरिक दस्तावेजों और संचार का विश्लेषण किया गया।
- सभी स्वतंत्र निदेशकों से बातचीत की गई।
- वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ की गई।
- इस्तीफे से पहले के दो वर्षों की गतिविधियों की जांच की गई।
26 जून 2026 को बैंक ने स्टॉक एक्सचेंजों को बताया कि स्वतंत्र कानूनी जांच में चक्रवर्ती के बयान के समर्थन में कोई ठोस आधार नहीं मिला।
नए चेयरमैन की नियुक्ति
विवाद के बाद बैंक ने 29 जून 2026 को पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त और पूर्व वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार को अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त किया। जगदीशन ने कहा कि राजीव कुमार ने देश के बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और बैंक बोर्ड उनके साथ काम करने को लेकर उत्साहित है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह मामला
HDFC Bank भारत के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक है। इसके शेयर घरेलू बाजार के साथ-साथ न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में ADR के रूप में भी लिस्टेड हैं। ऐसे में बैंक की कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़ा कोई भी विवाद निवेशकों और नियामकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।