भारत में बैंकों के विलय ने देश की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन विलयों का उद्देश्य ऐसे बैंक बनाना है जो ज्यादा मजबूत, स्थिर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हों। पिछले कई वर्षों में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के कई बैंकों का आपस में विलय हुआ है, ताकि उनकी कार्यक्षमता, ग्राहक पहुंच और पूंजी की स्थिति बेहतर हो सके।
यह विषय बैंकिंग, SSC और अन्य सरकारी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन परीक्षाओं में हाल के बैंक विलयों से जुड़े सवाल अक्सर पूछे जाते हैं। नीचे भारत में हुए महत्वपूर्ण बैंक विलयों की सूची वर्ष के अनुसार दी गई है, जिसमें विलय करने वाले बैंक, जिस बैंक का विलय हुआ है।
हाल के बैंक विलय
ये विलय 2019 में सरकार द्वारा घोषित मेगा बैंक कॉनसॉलिडेशन योजना का हिस्सा थे, जिसका उद्देश्य सरकारी बैंकों को मजबूत बनाना था। इन विलयों के बाद भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई। 2017 में SBI के विलय ने इसे दुनिया के सबसे बड़े बैंकों में से एक बना दिया, चाहे वो परिसंपत्तियों के मामले हों या ग्राहकों की संख्या के।