
Indian Economy Surpasses Expectations: ट्रंप टैरिफ पर गहमागहमी के बीच भारत की जीडीपी वृद्धि का आंकड़ा अनुमानों से आगे निकल गया। प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री स्वामिनाथन एस. अंकलेसरैया अय्यर ने अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए लिखे अपने साप्ताहिक लेख में कहा है कि ऐसा इसलिए हो पाया क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था में कई साकारात्मक पहलू हैं और इसकी समस्याएं गहरी नहीं हैं। अंकलेसरैया ने अपने लेख में क्या कहा है, आइए सारांश रूप में जानते हैं...
भारत की आर्थिक वृद्धि ने उन सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया है जिनमें मंदी की आशंका जताई गई थी। दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं (Global Economies) अमेरिकी टैरिफ और अन्य चुनौतियों से जूझ रही हैं, लेकिन भारत इन सब के बीच अपनी रफ्तार बनाए हुए है।
यहां तक कि कई जाने-माने अर्थशास्त्रियों (Well known economists) ने भी भारत की आर्थिक समस्याओं को संरचनात्मक (structural problem) बताया था। हालांकि, ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूत लचीलापन (India's economic resilience) है।
पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (Ex-chief economic advisor) अरविंद सुब्रमण्यम जैसे कुछ प्रमुख अर्थशास्त्री भारत की ग्रोथ को लेकर निराशावादी थे। उन्होंने जनवरी 2025 में कहा था कि टैक्स में कटौती से भी अर्थव्यवस्था ठीक नहीं होगी। उस समय जीडीपी ग्रोथ कई तिमाहियों से लगातार गिर रही थी, जो सितंबर-दिसंबर 2023 के 9.5% से घटकर 5.6% तक आ गई थी।
सुब्रमण्यम का मानना था कि यह मंदी सिर्फ अस्थायी नहीं, बल्कि एक गहरी और संरचनात्मक समस्या है। लेकिन उनके इस बयान के बाद की तीन तिमाहियों में ग्रोथ 6.4%, 7.4% और 7.8% तक पहुंच गई, जिससे भारत 'मिरेकल इकोनॉमी' (Miracle Economy) की लिस्ट में वापस आ गया, जिसकी परिभाषा 7% से अधिक की ग्रोथ है।
जनवरी में सुब्रमण्यम ने जीडीपी डेटा (GDP Data) की सटीकता पर भी सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था, 'हमारी ग्रोथ 7-8% है, जबकि खपत (Consumption), निवेश (Investment) और निर्यात (Exports) कमजोर हैं। जब जीडीपी के सभी घटक कमजोर हों, तो जीडीपी इतनी ऊंची कैसे हो सकती है?' हालांकि, नए आंकड़े इन आशंकाओं को दूर करते हैं।
खपत और निवेश (Consumption and Investment): आखिरी वित्तीय वर्ष (last fiscal year) में निजी उपभोग व्यय (PFCE) में 7.2% का सुधार हुआ। वहीं, निवेश का सबसे अच्छा पैमाना माने जाने वाले सकल स्थिर पूंजी निर्माण (Gross Fixed Capital Formation) में 7.12% की बढ़ोतरी हुई, जबकि पिछली तिमाही में यह 9.4% थी। ये आंकड़े किसी संरचनात्मक मंदी की तरफ इशारा नहीं करते।
एक्सपोर्ट्स (Exports): 2024-25 में सामानों के निर्यात की ग्रोथ शून्य रही, जिसे निराशावादियों ने एक बुरा संकेत बताया था। हालांकि, सेवा निर्यात (Service exports) में 13% की शानदार ग्रोथ हुई, जिससे कुल निर्यात (Overall exports) लगभग 5% तक बढ़ गया। दुनिया भर में सेवाओं का महत्व बढ़ रहा है और भारत इस बदलाव में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 9.2% तक पहुंच गई थी। कई विश्लेषकों ने कहा था कि यह आंकड़ा कम जीडीपी डिफ्लेटर (GDP Deflator) के कारण बढ़ा हुआ था। अगले साल डिफ्लेटर के सामान्य होने से ग्रोथ कम हो सकती थी। ऐसा हुआ भी और 2024-25 में ग्रोथ घटकर 6.5% रह गई। लेकिन अगर इन दोनों वर्षों का औसत निकाला जाए, तो यह 7.85% बैठता है, जो बहुत ही प्रभावशाली है।
हाल की दो तिमाहियों का औसत भी 7.6% है, जो भारत के लिए अच्छे संकेत हैं। यह आर्थिक सर्वे (Economic Survey) के 6.5% के पूर्वानुमान से कहीं ज्यादा है। वर्तमान मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन भी अर्थव्यवस्था को लेकर सतर्क लेकिन दृढ़ता से सकारात्मक (Cautiously positive) हैं।
कई विश्लेषकों का कहना है कि पूंजी निर्माण (Capital Formation) की मौजूदा दर, जो जीडीपी का 30% है, 2000 के दशक के उछाल वाले समय के 35% से कम है। लेकिन उस समय की ग्रोथ बेतरतीब क्रेडिट बूम (credit boom) पर आधारित थी, जिससे बैंक लोन पर बड़े डिफॉल्ट हुए और बैंकिंग सिस्टम पर दबाव बढ़ा।
आज की स्थिति कहीं ज्यादा स्थिर और टिकाऊ है। क्रेडिट ग्रोथ (Credit growth) भी तर्कसंगत रही है। अर्थव्यवस्था में ज्यादा गर्मी नहीं है। इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, लेकिन एक सही और स्थिर रफ्तार से। इसमें ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जहां मांग अचानक बहुत बढ़ जाए और महंगाई बेकाबू हो जाए। इसके अलावा, हमारा करेंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) भी लगभग शून्य है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
नवंबर 2024 में चुने गए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने भारत जैसे ट्रेड पार्टनर्स पर 50% तक के ऊंचे टैरिफ (High tariffs) लगाने की धमकी दी है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगर यह टैरिफ एक साल तक रहता है, तो भारत की जीडीपी ग्रोथ 0.5% तक कम हो सकती है। लेकिन शुरुआती तिमाही की तेज रफ्तार को देखते हुए भारत के पास अभी भी सालाना ग्रोथ का 6.5% के टार्गेट को पार करने का अच्छा मौका है।
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