कैसे दुनिया के लिए जरूरी बनेगा भारत, आर्थिक सर्वेक्षण ने बता दी ये 5 रणनीति, आप कहेंगे- कमाल है

Make in India: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भारत को रणनीतिक अनिवार्यता हासिल करने के लिए एक स्पष्ट और बहुआयामी रणनीति पेश की है। इसका मूल मंत्र यह है कि भारत को केवल 'आत्मनिर्भर' नहीं बनना है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए 'अपरिहार्य' बनना है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड30 Jan 2026, 07:15 AM IST
विश्व के लिए कैसे अपरिहार्य बने भारत, आर्थिक सर्वेक्षण में खींचा गया खाका (सांकेतिक तस्वीर)
विश्व के लिए कैसे अपरिहार्य बने भारत, आर्थिक सर्वेक्षण में खींचा गया खाका (सांकेतिक तस्वीर)

Atmnirbhar Bharat: भारत के सपने बड़े हैं। बड़े सपनों के लिए गहरी रणनीति बनानी पड़ती है। उन रणनीतियों पर कठोर अनुशासन के साथ पर्याप्त गति से आगे बढ़ना होता है। भारत अब आत्मनिर्भरता के लक्ष्य से आगे दुनिया के लिए अनिवार्य बनने का सपना देखा है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में यह सपना साझा किया गया है। इसमें बताया गया है कि किन पांच लक्ष्यों की तरफ कदम बढ़ाकर यह सपना साकार होगा। आइए जानते हैं।

1. रणनीतिक स्वदेशीकरण का त्रि-स्तरीय ढांचा

आर्थिक सर्वेक्षण ने स्वदेशीकरण के लिए एक अनुशासित दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव दिया है, जिसे तीन स्तरों में बांटा गया है।

टियर 1 (अत्यधिक आवश्यक): इसमें रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण चीजें शामिल हैं। यहां लागत की परवाह किए बिना घरेलू क्षमता बनाना जरूरी है ताकि संकट के समय आपूर्ति न रुके।

टियर 2 (आर्थिक रूप से व्यवहार्य): ऐसे क्षेत्र जहां भारत विनिर्माण में सक्षम है लेकिन कुछ बाधाओं का सामना कर रहा है। यहां सरकार 'अस्थायी सुरक्षा' देगी, लेकिन शर्त यह होगी कि उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना होगा और निर्यात करना होगा।

टियर 3 (कम आवश्यक): ऐसी चीजें जिनका आयात रुकने से देश को बड़ा खतरा नहीं है या जिसे घर में बनाने से लागत बहुत बढ़ जाएगी। यहां 'स्वदेशी' की जिद छोड़कर विविध स्रोतों से आयात करना बेहतर रणनीति है।

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2. कंपनियों को समयबद्ध सुरक्षा

रणनीति यह है कि 'स्वदेशी' का मतलब 'बंद अर्थव्यवस्था' नहीं होना चाहिए। भारत को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं (GVCs) का हिस्सा बनना होगा। कच्चे माल या इंटरमीडिएट गुड्स (मध्यवर्ती वस्तुओं) के आयात पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए, क्योंकि इनका उपयोग करके ही भारत उच्च गुणवत्ता वाली वस्तुओं का निर्यात कर सकता है।

आर्थिक सर्वेक्षण में तर्क यह दिया गया है कि 'संरक्षणवाद को अनुशासित होना चाहिए'। अगर उद्योगों को सुरक्षा दी जा रही है, तो उन्हें एक निश्चित समय सीमा के साथ यह सुनिश्चित करना होगा कि वे भविष्य में बिना सरकारी मदद के खड़े हो सकें। यानी उद्योगों को संरक्षण 'सनसेट क्लॉज' के साथ मिलना चाहिए।

3. क्वॉलिटी से जीतेंगे दुनिया का दिल

सर्वेक्षण मानता है कि केवल जीडीपी बढ़ाना काफी नहीं है। 'एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग' पर जोर देना होगा क्योंकि यह देश के संस्थानों को अनुशासित करता है। जब भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा करती हैं, तो उन्हें अपनी गुणवत्ता और दक्षता बढ़ानी ही पड़ती है, जिससे पूरे देश की उत्पादकता बढ़ती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए जाने से पहले मीडिया को अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया था। पीएम ने ईयू के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के हवाले से देश के मैन्युफैक्चरर्स से अपील की।

उन्होंने कहा, ‘भारत-यूरोपियन यूनियन के बीच मदर ऑफ ऑफ डील से देश के मैन्युफैक्चरर्स के लिए बहुत बड़ा बाजार खुल गया, अब तो बहुत सस्ते में मेरा माल पहुंच जाएगा। ऐसी सोच नहीं रखें बल्कि क्वॉलिटी पर ध्यान दें। बाजार अगर खुला है तो क्वॉलिटी के दम पर ईयू के 27 देशों से सिर्फ पैसे नहीं कमाएंगे बल्कि वहां के खरीदारों का दिल भी जीत लेंगे। इसका उन खरीदारों के मन-मस्तिष्क पर दशकों तक गहरा असर रहेगा।’

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4. 'शासक राज' से 'नागरिक राज' की यात्रा

यह रणनीति का प्रशासनिक पहलू है। सरकार की भूमिका को केवल 'रेगुलेटर' से बदलकर 'उद्यमी राज्य' में बदलना होगा। इसका अर्थ है कि सरकार जोखिम लेने, निर्णय लेने और निजी क्षेत्र के साथ साझीदार की तरह काम करने में सक्षम हो। इसका उद्देश्य राज्य की क्षमता को बढ़ाना है ताकि नीतियां केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू हों।

5. बदलनी होगी कंपनियों की सोच

सर्वेक्षण ने निजी क्षेत्र को भी स्पष्ट संदेश दिया है कि उन्हें सरकार से 'संरक्षण' मांगने की आदत छोड़नी होगी। भारतीय कंपनियों को जोखिम लेने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उतरने के लिए तैयार रहना चाहिए, न कि केवल टैरिफ दीवारों के पीछे सुरक्षित रहने की उम्मीद करनी चाहिए ।

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…ताकि दुनिया के लिए अपरिहार्य हो जाए भारत

कुल मिलाकर, भारत की रणनीति यह है कि वह उन चीजों का उत्पादन करे जिसकी दुनिया को सख्त जरूरत है। दवाएं, चिप्स, रक्षा उपकरण आदि लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। इसके साथ ही, भारत को अपनी आपूर्ति शृंखला को इतना मजबूत बनाना होगा कि कोई भी भू-राजनीतिक झटका उसे तोड़ न सके। आर्थिक सर्वेक्षण कहता है कि भारत अपनी कंपनियों को वैश्विक स्तर पर इतना प्रतिस्पर्धी बनाए कि दुनिया भारत पर निर्भर हो जाए।

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