
ITR Filing: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। दिसंबर 2025 में कई टैक्सपेयर्स को विभाग की ओर से ईमेल और SMS अलर्ट मिले हैं। इन अलर्ट में बताया गया है कि उनके द्वारा क्लेम की गई टैक्स छूट और फॉर्म 16 के रिकॉर्ड में अंतर है। विभाग अब आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके आपकी छोटी से छोटी गलती को पकड़ रहा है।
EQX बिजनेस कंसल्टेंसी के डायरेक्टर नेमिन शाह के मुताबिक, ज्यादातर अलर्ट उन लोगों को मिले हैं जिन्होंने फॉर्म 16 में तो कम निवेश दिखाया था, लेकिन ITR भरते समय ज्यादा टैक्स छूट का दावा कर दिया। जब आप रिटर्न में ज्यादा कटौती दिखाते हैं, तो अक्सर बड़ा रिफंड बनता है। शाह का कहना है कि बहुत बड़ा रिफंड मांगने पर सिस्टम का ध्यान उस पर जल्दी जाता है और वह रिटर्न को जांच के लिए मार्क कर देता है।
SBHS एंड एसोसिएट्स के पार्टनर हिमंक सिंगला ने बताया कि अब कोई अधिकारी खुद बैठकर फाइलें चेक नहीं करता है। सारा काम एल्गोरिथम और ऑटोमेटिक सिस्टम के जरिए हो रहा है। विभाग का सॉफ्टवेयर फॉर्म 16, फॉर्म 26AS, AIS (Annual Information Statement) और TIS जैसी जगहों से आपका डेटा उठाता है और उसे आपस में मिलाता है। अगर इन रिकॉर्ड्स में जरा भी अंतर मिलता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देता है।
टैक्स विभाग खास तौर पर उन दावों को चेक कर रहा है जहां ज्यादा रिफंड मांगा गया है। इसमें HRA (मकान किराया भत्ता), धारा 80C, 80D, 80E, 80G के तहत मिलने वाली छूट, होम लोन का ब्याज और LTA जैसे दावे शामिल हैं। विभाग बैंकों, बीमा कंपनियों और आपके एम्प्लॉयर के डेटा को क्रॉस-चेक कर रहा है ताकि पता चल सके कि दावे सही हैं या नहीं।
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि आपको अपने सभी निवेश और खर्चों की जानकारी अपने एम्प्लॉयर (कंपनी) को समय पर दे देनी चाहिए। इससे आपके निवेश फॉर्म 16 में पहले से ही दर्ज रहेंगे। सिंगला के अनुसार, अगर कंपनी आपसे सबूत नहीं मांगती, तो भी आपको अपने पास सारे दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। ITR फॉर्म में अब इंश्योरेंस पॉलिसी नंबर, लोन देने वाले की जानकारी और मकान मालिक का विवरण जैसी बारीक जानकारियां देनी होती हैं। इनमें कोई भी अंतर आने पर बेवजह के सवाल-जवाब या जुर्माना झेलना पड़ सकता है।
राहत की बात यह है कि ये अलर्ट कोई जांच के नोटिस नहीं हैं। इन्हें टैक्स चोरी का मामला नहीं समझना चाहिए। इनकम टैक्स कानून के तहत आप रिटर्न भरते समय उन छूटों का दावा कर सकते हैं, जो आपने कंपनी को नहीं बताई थीं। बशर्ते आपके दावे पूरी तरह सही और पारदर्शी हों। कानून यह नहीं कहता कि हर छूट केवल कंपनी के जरिए ही क्लेम की जाए।
साल 2026 के लिए टैक्सपेयर्स को चाहिए कि वे अपने निवेश के सबूत समय पर जमा करें। अगर आपके रिकॉर्ड्स और कंपनी के रिकॉर्ड्स एक जैसे होंगे, तो आप सिस्टम की रडार पर आने से बच जाएंगे। सही समय पर सही जानकारी देना ही इनकम टैक्स विभाग के अलर्ट से बचने का सबसे आसान तरीका है।
AIS (Annual Information Statement) और TIS (Taxpayer Information Summary) चेक करना बहुत आसान है। आप इसे घर बैठे इनकम टैक्स विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल से देख सकते हैं। यहां इसके स्टेप्स दिए गए हैं:
लॉग-इन करें: सबसे पहले इनकम टैक्स विभाग की आधिकारिक वेबसाइट incometax.gov.in पर जाएं। अपनी यूजर आईडी (PAN नंबर) और पासवर्ड डालकर लॉग-इन करें।
सर्विसेज टैब पर जाएं: लॉग-इन करने के बाद ऊपर दिए गए मेनू में 'Services' टैब पर क्लिक करें।
AIS विकल्प चुनें: ड्रॉप-डाउन मेनू में आपको 'Annual Information Statement (AIS)' का विकल्प दिखेगा, उस पर क्लिक करें।
प्रोसीड करें: एक नया पेज खुलेगा, वहां 'Proceed' बटन पर क्लिक करें। यह आपको एक नए पोर्टल (Compliance Portal) पर ले जाएगा।
डैशबोर्ड देखें: नए पोर्टल पर आपको दो विकल्प दिखाई देंगे- TIS और AIS
TIS: इसमें आपकी आय का सारांश होता है।
AIS: इसमें आपके पूरे साल के वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जानकारी होती है।
डाउनलोड करें: आप इन दोनों फाइलों को PDF या JSON फॉर्मेट में डाउनलोड भी कर सकते हैं ताकि आप अपने रिकॉर्ड से इनका मिलान कर सकें।
डेटा का मिलान: AIS में आपके बैंक ब्याज, शेयर बाजार के लेनदेन, म्यूचुअल फंड और डिविडेंड की जानकारी होती है। इसे अपने बैंक पासबुक से जरूर मिलाएं।
गलती सुधारें: अगर AIS में कोई ऐसी जानकारी है जो आपकी नहीं है या गलत है, तो आप वहीं ऑनलाइन 'Feedback' बटन पर क्लिक करके उसे सुधारने की रिक्वेस्ट डाल सकते हैं।
ITR से पहले चेक करें: रिटर्न भरने से पहले AIS देखना अब अनिवार्य जैसा हो गया है, क्योंकि विभाग के पास यह डेटा पहले से मौजूद होता है।
अगर आपके AIS में कोई ट्रांजैक्शन गलत दिख रहा है, तो उसे सुधारना बहुत जरूरी है। अगर आप इसे नजरअंदाज करते हैं, तो इनकम टैक्स विभाग इसे आपकी सही इनकम मान लेगा और बाद में टैक्स डिमांड का नोटिस आ सकता है। गलती सुधारने के लिए आप 'Online Feedback' का इस्तेमाल इस तरह कर सकते हैं:
संबंधित ट्रांजैक्शन चुनें: AIS पोर्टल पर जाएं और उस विशेष जानकारी (जैसे बैंक ब्याज या शेयर बिक्री) पर क्लिक करें जो आपको गलत लग रही है।
'Optional' बटन पर क्लिक करें: हर ट्रांजैक्शन के आगे एक फीडबैक का कॉलम होता है। वहां क्लिक करने पर आपको 'Feedback' देने का विकल्प मिलेगा।
सही विकल्प चुनें: जब आप फीडबैक पर क्लिक करेंगे, तो आपके सामने कुछ विकल्प आएंगे:
Information is correct: अगर जानकारी सही है।
Information is not fully correct: अगर रकम या तारीख में कोई गलती है।
Information relates to other PAN/Year: अगर यह किसी और के पैन कार्ड या दूसरे साल की जानकारी है।
Information is duplicate: अगर एक ही एंट्री दो बार दिख रही है।
Information is denied: अगर वह ट्रांजैक्शन आपने किया ही नहीं है।
सबमिट करें: अपना विकल्प चुनने के बाद 'Submit' पर क्लिक कर दें।
जैसे ही आप फीडबैक सबमिट करते हैं, विभाग के पास आपकी शिकायत दर्ज हो जाती है। इसके बाद सिस्टम दो काम करता है:
TIS अपडेट: आपके फीडबैक के आधार पर आपकी 'Taxpayer Information Summary' (TIS) में वह वैल्यू बदल जाती है।
सोर्स से वेरिफिकेशन: आयकर विभाग उस बैंक या संस्था (जैसे म्यूचुअल फंड हाउस) से संपर्क करता है जिसने वह जानकारी दी थी। अगर वे अपनी गलती मान लेते हैं, तो वह रिकॉर्ड हमेशा के लिए सही कर दिया जाता है।
सबूत रखें: अगर आपने किसी ट्रांजैक्शन को 'Deny' किया है, तो उससे जुड़े दस्तावेज (जैसे बैंक स्टेटमेंट या सेल डीड) संभाल कर रखें, ताकि भविष्य में पूछने पर आप दिखा सकें।
समय पर सुधार: ITR फाइल करने से कम से कम 10-15 दिन पहले यह काम कर लें, ताकि पोर्टल पर आपकी सही इनकम (Updated TIS) दिखने लगे।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। अगर इस जानकारी के आधार पर आप सही निर्णय लेने में सक्षम महसूस नहीं करते हैं या फिर किसी भी तरह की उलझन शेष है तो इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।
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