
India-Israel Partnership: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इजरायल यात्रा कई मायनों में खास रही। इस दौरे में भारत और इजरायल ने अपने रिश्तों को विशेष रणनीतिक भागीदारी के स्तर तक ले जाने का ऐलान किया। रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा, एआई और खास तौर पर UPI जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर बड़े करार हुए। साफ है कि अब ये रिश्ता सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि भविष्य की साझेदारी बन चुका है।
इस यात्रा की सबसे बड़ी और आम लोगों से जुड़ी खबर रही इजरायल में UPI की एंट्री। भारत के एनपीसीआई इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म और इजरायल के संगठन मसाव के बीच एमओयू हुआ है। इसका मतलब साफ है कि अब भारतीय UPI के जरिए इजराइल में भी आसानी से लेन-देन कर सकेंगे।
पूर्वी एशिया, यूरोप और पश्चिम एशिया के कई देशों में पहले से उपलब्ध UPI अब इजरायल में भी डिजिटल लेन-देन को आसान बनाएगा। इससे व्यापार, पर्यटन और लोगों के बीच सीधे भुगतान में बड़ी सहूलियत मिलेगी।
यात्रा के अंत में जारी साझा घोषणा पत्र के मुताबिक, दोनों देशों ने 17 सहमति पत्रों और समझौतों पर हस्ताक्षर किए और 10 अहम घोषणाएं कीं।
दोनों नेताओं ने आतंकवाद को किसी भी रूप में अस्वीकार्य बताते हुए मिलकर मुकाबला करने का संकल्प दोहराया। साथ ही भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप कॉरिडोर और I2U2 पहल के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई।
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए, ताकि व्यापार और निवेश की पूरी संभावनाओं का फायदा उठाया जा सके।
पिछले साल 4 नवंबर को रक्षा क्षेत्र में हुए करार का स्वागत किया गया और भविष्य के सहयोग के लिए वृहद योजना पेश की गई। खनिज अन्वेषण में अत्याधुनिक भूगर्भ और एआई आधारित तकनीक, डाटा आदान-प्रदान, निवेश और सतत संसाधन विकास के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के नेतृत्व में सहयोग बढ़ाने की भी घोषणा की गई। एथिकल एआई और नागरिक क्षेत्रों में उसके इस्तेमाल पर भी सहमति बनी।
कृषि क्षेत्र में प्रीसीजन फार्मिंग, उपग्रह आधारित सिंचाई, आधुनिक मशीनरी और फसल कटाई के बाद के समाधान को बढ़ावा देने के लिए भारत-इजरायल कृषि नवाचार केंद्र (IINCA) स्थापित करने पर सहमति बनी।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और इजरायल के माशाव के बीच एमओयू हुआ है। इसके तहत खेती में नई तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा।
दोनों देशों ने मानव संसाधन के आदान-प्रदान पर सहमति जताई। रेस्त्रां, विनिर्माण, रिटेल, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, खाद्य प्रसंस्करण, आतिथ्य, रिसाइकिलिंग, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, प्लास्टिक और रबर जैसे क्षेत्रों में कामगारों की आवाजाही के लिए समझौते हुए। अगले पांच साल में 50,000 भारतीय कामगारों के लिए इजरायल में कोटा देने की घोषणा की गई है।
बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय और यरुशलम के हिब्रू विश्वविद्यालय के बीच फैकल्टी और छात्रों के आदान-प्रदान के लिए एमओयू हुआ। शिक्षा में एआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और क्षमता विस्तार पर भी सहमति बनी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में इस साल संयुक्त कार्य समूह की पहली बैठक होगी। डिजिटल टेक्नोलॉजी और एआई के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर सहयोग बढ़ेगा। भारत में संयुक्त साइबर उत्कृष्टता केंद्र बनाने के लिए भी आशय पत्र पर हस्ताक्षर हुए हैं।
दोनों देशों ने सिर्फ समझौतों पर हस्ताक्षर ही नहीं किए, बल्कि भविष्य की लंबी साझेदारी के लिए कई बड़े ढांचे बनाने का ऐलान भी किया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर मंत्री स्तर की संयुक्त समिति बनाने की घोषणा हुई है। इसके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की अगुवाई में महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग की नई पहल शुरू की जाएगी।
दोनों पक्षों ने वित्तीय वार्ता को आगे बढ़ाने, “टेक-गेटवे” पहल शुरू करने, कृषि अनुसंधान में 20 संयुक्त फेलोशिप देने और संयुक्त अनुसंधान में योगदान बढ़ाने का फैसला किया है। साथ ही भारत-इजरायल अकादमिक सहयोग फोरम और भारत-इजरायल संसदीय मैत्री समूह बनाने की भी घोषणा की गई है, ताकि सरकार से लेकर शिक्षा और संसद स्तर तक तालमेल और गहरा हो सके।
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