भारत में 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप, बन गया दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रिटेल फ्यूल मार्केट

भारत का पेट्रोल पंप नेटवर्क 1,00,000 के आंकड़े को पार कर गया है। यह आंकड़ा 2015 में पेट्रोल पंपों की संख्या से दोगुना है। इस आंकड़े के साथ अब भारत पेट्रोल पंपों के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क बन गया है। पहले नंबर पर अमेरिका और दूसरे पर चीन है।

Jitendra Singh
अपडेटेड25 Dec 2025, 04:29 PM IST
प्राइवेट कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी 10 फीसदी से कम है।
प्राइवेट कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी 10 फीसदी से कम है।

भारत में पेट्रोल पंप का बिजनेस चीते की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। कहा जा रहा है कि इस बिजनेस में बंपर कमाई होती है। भारत में पेट्रोल पंप का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ रहा है। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पेट्रोल पंपों का नेटवर्क 100,000 आउटलेट्स से ज़्यादा हो गया है। पिछले एक दशक के मुकाबले इसकी यह संख्या दोगुनी है। सरकारी तेल कंपनियों ने बढ़ती गाड़ियों की मांग को पूरा करने और ग्रामीण इलाकों तक फ्यूल की पहुंच बढ़ाने के लिए विस्तार को तेज किया है। आज से 10 साल पहले यह संख्या 50 से 60 हजार हुआ करती थी। लेकिन आज 1 लाख के पार जा चुकी है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) से मिले डेटा के अनुसार, नवंबर के आखिर में देश में 1,00,266 पेट्रोल पंप थे। इस आंकड़े के साथ अब भारत पेट्रोल पंपों के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क बन गया है। पहले नंबर पर अमेरिका और दूसरे पर चीन है। 2024 की एक रिपोर्ट में अमेरिका में रिटेल गैस स्टेशनों की संख्या 1,96,643 बताई गई थी। तब से कुछ आउटलेट्स बंद हो गए होंगे। चीन के मामले में पिछले साल की एक रिपोर्ट में गैस स्टेशनों की संख्या 1,15,228 बताई गई थी।

पेट्रोल-डीजल खपत में 50% बढ़ोतरी

ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण आउटलेट अब कुल पंपों का 29 फीसदी हैं, जो एक दशक पहले 22 फीसदी थे। पेट्रोल पंपों का स्वरूप भी बदला है। पहले सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित था। अब करीब एक-तिहाई आउटलेट्स पर सीएनजी और ईवी चार्जिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। पिछले दशक में पेट्रोल की खपत 110 फीसदी और डीजल की 32 फीसदी बढ़ी है, जिससे कुल पेट्रोल-डीजल वॉल्यूम में लगभग 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। डीजल की औसत बिक्री पेट्रोल से दोगुनी है। पेट्रोल पंप नेटवर्क में आई तेजी का कारण तेल कंपनियां है।

सरकारी तेल कंपनियों ने गाड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए और ग्रामीण इलाकों में फ्यूल की पहुंच बढ़ाने के लिए तेजी से आउटलेट खोले हैं। अभी तक ज्यादातर पेट्रोल पंप सिर्फ शहरी इलाकों में दिखते थे। लेकिन अब ग्रामीण इलाकों में भी यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालांकि प्राइवेट कंपनियों की बाजार में हिस्सेदारी 10 फीसदी से कम है, लेकिन इतनी तेजी से हुई ग्रोथ की आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

जानिए पेट्रोल पंप से कितनी होती है कमाई

भारत में पेट्रोल पंप में फ्यूल पर एक फिक्स्ड कमीशन ( 1.5- 4/लीटर) मिलता है, लेकिन नेट प्रॉफिट लोकेशन (petrol pump Earning) पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है। इसके साथ ही बड़े ऑपरेशनल खर्चों (स्टाफ, बिजली, जमीन) को मैनेज करने और सुविधा स्टोर/सर्विस के साथ डाइवर्सिफाई करने पर भी निर्भर करता है, जिससे खर्चों के बाद हर महीने 1- 6 लाख या उससे ज्यादा का प्रॉफिट हो सकता है।

भारत में पेट्रोल पंप खोलने के लिए कौन एलिजिबल है?

1. आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसके पास वैलिड पहचान पत्र होना चाहिए।

2. अगर आवेदक NRI या नॉन-रेजिडेंट इंडियन है, तो उसे पेट्रोल पंप के लिए अप्लाई करने से पहले कम से कम 180 दिन भारत में रहना होगा।

3. आवेदक की उम्र 21 से 55 साल के बीच होनी चाहिए।

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