Commercial Pilot: भारत में एविएशन सेक्टर का तेजी से विकास हो रहा है। पायलट बनने के लिए युवाओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। सरकार ने संसद में बताया कि भारत में साल 2026 के पहले छह महीनों में 1,331 कमर्शियल पायलट लाइसेंस जारी किए हैं। इनमें से हर 10 में से चार से ज़्यादा नए लाइसेंस वाले पायलटों ने विदेश में ट्रेनिंग ली थी। राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में एविएशन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने यह जानकारी साझा की है। यह आंकड़े बताते हैं कि भारतीय विमानन क्षेत्र में पायलटों की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि घरेलू एयरलाइंस लगातार अपने बेड़े और नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं।
राज्यसभा में एक लिखित जवाब में, सिविल एविएशन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने 30 जून तक भारतीय फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइज़ेशन (FTOs) में ट्रेनिंग लेने वाले 791 कैडेट्स और विदेशी FTOs में ट्रेनिंग लेने वाले 540 कैडेट्स को लाइसेंस जारी किए। इसका मतलब है कि नए लाइसेंस वाले कमर्शियल पायलटों में से लगभग 41 प्रतिशत ने विदेश में ट्रेनिंग ली थी।
पायलटों की बढ़ती मांग
ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब भारतीय एयरलाइंस अपने बेड़े और नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं, जिससे पायलटों की मांग बढ़ रही है। DGCA ने 2025 में 1,652, 2024 में 1,347, 2023 में 1,622 और 2022 में 1,165 कमर्शियल पायलट लाइसेंस जारी किए। इससे पता चलता है कि पायलट सर्टिफिकेशन में लगातार बढ़ोतरी हुई है।
मोहोल ने कहा कि भारत में अभी DGCA से मंज़ूर 41 फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइज़ेशन हैं, जो 63 बेस पर 400 से ज्यादा ट्रेनिंग एयरक्राफ़्ट के बेड़े के साथ काम कर रहे हैं।
विदेशी ट्रेनिंग का बढ़ा चलन
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, महानिदेशक नागरिक उड्डयन (DGCA) द्वारा जारी किए गए कुल लाइसेंसों में से 791 कैडेटों ने भारत के फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन्स (FTOs) से ट्रेनिंग ली है। वहीं, 540 कैडेटों ने विदेशों में जाकर अपनी पायलट ट्रेनिंग पूरी की है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस अवधि में लाइसेंस पाने वाले हर 10 में से 4 से अधिक पायलटों ने विदेशों से ट्रेनिंग ली है।
भारत का मौजूदा ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
केंद्रीय मंत्री ने देश में पायलट ट्रेनिंग की मौजूदा क्षमता की जानकारी भी दी। फिलहाल भारत में 41 DGCA -अनुमोदित फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थान हैं, जो देश के 63 बेस पर काम कर रहे हैं। इन सभी संस्थानों के पास मिलाकर 400 से अधिक ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट मौजूद हैं।
सुरक्षा और ट्रेनिंग की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सरकार ने सख्त नियम तय किए हैं। DGCA के नियमों के तहत, फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइज़ेशन को एयरक्राफ्ट-इंस्ट्रक्टर-स्टूडेंट का अनुपात 1:1:10 बनाए रखना होता है, जिससे वे किसी भी समय लगभग 3,500 स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग दे सकते हैं।
देश में पायलटों की संख्या है कम
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पायलटों की कमी है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन, इंडिगो के पास हर नैरो-बॉडी प्लेन के लिए औसतन 7.6 पायलट ही हैं। दिसंबर में इंडिगो को हजारों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, क्योंकि वह पायलटों के काम के घंटों को सीमित करने वाले नए नियमों के हिसाब से सही योजना नहीं बना पाई थी, जिससे पायलटों की कमी हो गई।