
State of the states report 2026 : बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश। ये नाम किसी जमाने में पिछड़ेपन की पहचान थे। इन्हें 'बीमारू' की संज्ञा मिली थी। लेकिन रूबिक्स डेटा साइंसेज की ताजा रिपोर्ट अब अलग ही कहानी बता रही है। वित्त वर्ष 2014-15 से 2024-25 के बीच बिहार और मध्य प्रदेश की जीडीपी लगभग तीन गुना हो गई। उत्तर प्रदेश 22 फीसदी हिस्सेदारी के साथ देश का सबसे बड़ा घरेलू पर्यटन केंद्र बन चुका है जिसे अयोध्या राम मंदिर और महाकुंभ ने नई ऊंचाई दी है। दूसरी तरफ, तेलंगाना और कर्नाटक ने प्रति व्यक्ति आय में महाराष्ट्र और हरियाणा को भी पीछे छोड़ दिया है। स्पष्ट है कि भारत का आर्थिक भूगोल बदल रहा है। सवाल है कि क्या यह बदलाव टिकाऊ है?
दक्षिण का नेतृत्व केवल कुल जीडीपी तक सीमित नहीं है। बड़े राज्यों में तेलंगाना (3.88 लाख रुपये), कर्नाटक (3.81 लाख रुपये) और तमिलनाडु (3.62 लाख रुपये) ने वित्त वर्ष 2024-25 में प्रति व्यक्ति शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद (एनएसडीपी) के मामले में सबसे ऊंचा स्तर दर्ज किया। ये महाराष्ट्र (3.09 लाख रुपये) और हरियाणा (3.53 लाख रुपये) जैसे राज्यों से आगे रहे।
ये तीनों राज्य प्रति व्यक्ति एनएसडीपी की दशक के दौरान औसत वृद्धि दर के मामले में भी शीर्ष 10 में शामिल रहे। यह दर स्थिर कीमतों पर सालाना 6 फीसदी से अधिक रही। यह इस बात का प्रमाण है कि इन राज्यों की आर्थिक वृद्धि केवल जीडीपी के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वास्तविक रूप से निवासियों की समृद्धि में बदल रही है।
भारत में 2024 के दौरान 2.09 करोड़ विदेशी पर्यटकों का आगमन हुआ। वहीं लगभग घरेलू पर्यटकों की 2.9 अरब यात्राएं दर्ज की गईं। दोनों ही श्रेणियों में उत्तर का दबदबा रहा। इसे विरासत और धार्मिक स्थलों ने बढ़ावा दिया। उत्तर प्रदेश 22 फीसदी हिस्सेदारी के साथ घरेलू पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा, जिसे अयोध्या राम मंदिर के उद्घाटन से बढ़ावा मिला।
पिछल वर्ष 2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले के बाद इसके और मजबूत होने की उम्मीद है, जिसमें 66 करोड़ से अधिक लोगों ने भाग लिया। विदेशी पर्यटकों के मामले में महाराष्ट्र 18 फीसदी हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि पश्चिम बंगाल का हिस्सा 2014 के 6 फीसदी से बढ़कर 2024 में 15 फीसदी हो गया। भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। इसके बावजूद, शीर्ष 10 राज्यों में घरेलू पर्यटन का लगभग 87 फीसदी और विदेशी पर्यटन का लगभग 89 फीसदी केंद्रित है। यह कम विकसित क्षेत्रों में पर्यटन की बड़ी संभावनाओं की ओर इशारा करता है।
रिपोर्ट का एक प्रमुख पहलू बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे बीमारू राज्यों का परिवर्तन है। वित्त वर्ष 2014-15 से 2024-25 के बीच बिहार और मध्य प्रदेश की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) लगभग तीन गुना हो गई, जबकि राजस्थान और उत्तर प्रदेश में यह लगभग 2.8 गुना बढ़ी।
प्रति व्यक्ति एनएसडीपी भी इन चारों राज्यों में लगभग 2.5 गुना बढ़ी है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश पूंजीगत व्यय और घरेलू पर्यटन में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा है, जबकि राजस्थान और मध्य प्रदेश निर्यात और क्रेडिट मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। ये राज्य अब केवल बड़ी आबादी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने आप में महत्वपूर्ण आर्थिक योगदानकर्ता बनते जा रहे हैं।
रिपोर्ट का केंद्रीय निष्कर्ष यह है कि भारत का आर्थिक नक्शा बदल रहा है, लेकिन यह बदलाव असमान है। महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना अब भी उत्पादन, निवेश, निर्यात और क्रेडिट के प्रमुख आधार बने हुए हैं। वहीं उत्तर प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और असम जैसे राज्य वास्तविक गति के साथ अपनी आर्थिक उपस्थिति का विस्तार कर रहे हैं। हालांकि, प्रमुख संकेतकों में आर्थिक नेतृत्व अब भी कुछ ही राज्यों में अत्यधिक केंद्रित है, जिससे एक अंतर्निहित जोखिम पैदा होता है।
जब वृद्धि सीमित क्षेत्रों में केंद्रित होती है, तो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था स्थानीय झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती है। भारत की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती केवल अग्रणी राज्यों की निरंतर ताकत पर ही निर्भर नहीं करेगी, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगी कि उभरते क्षेत्र मौजूदा गति को कितने प्रभावी तरीके से टिकाऊ और आत्मनिर्भर विकास में बदलते हैं। भारत के विकास का अगला चरण केवल वृद्धि की गति से तय नहीं होगा, बल्कि आर्थिक और औद्योगिक आधार के भौगोलिक विस्तार से भी वह प्रभावित होगा।
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