India Economy: भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बार फिर मजबूत तस्वीर सामने आई है। 16वें वित्त आयोग के चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में कम से कम 7% की दर से बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि देश की इकोनॉमी मजबूत बनी हुई है और अब तक के आर्थिक संकेतक भी ग्रोथ की रफ्तार बेहतर रहने की ओर इशारा कर रहे हैं।
पनगढ़िया की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपनी GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% रखा है। पनगढ़िया का अनुमान इससे करीब 0.4 प्रतिशत अंक ज्यादा है। यानी वित्त आयोग के चेयरमैन का मानना है कि भारत की वास्तविक आर्थिक ग्रोथ आरबीआई के मौजूदा अनुमान से बेहतर रह सकती है।
'भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है'
मनीकंट्रोल के साथ बातचीत में पनगढ़िया ने कहा कि उनका नजरिया लगातार यही रहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है। उनके मुताबिक भारत की ग्रोथ करीब 7% या उससे थोड़ी बेहतर बनी हुई है। उनके बयान का सबसे अहम हिस्सा यही है कि उन्हें फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था में ऐसी बड़ी कमजोरी दिखाई नहीं दे रही है, जो ग्रोथ को 7% से नीचे ले जाए। इससे यह संकेत मिलता है कि घरेलू मांग, निवेश और आर्थिक गतिविधियां आने वाले समय में विकास की रफ्तार को सहारा दे सकती हैं।
RBI के अनुमान से क्यों अलग है पनगढ़िया की राय?
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वास्तविक GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% रखा है। इसके मुकाबले पनगढ़िया 7% या उससे ज्यादा की ग्रोथ की बात कर रहे हैं। दोनों अनुमानों में अंतर का मतलब यह नहीं है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर कोई बड़ा मतभेद है। पनगढ़िया का कहना है कि आरबीआई का अनुमान अभी सतर्क है। यानी उनका मानना है कि केंद्रीय बैंक ने वैश्विक अनिश्चितता और दूसरे जोखिमों को ध्यान में रखते हुए ग्रोथ का अनुमान थोड़ा संभलकर रखा है।
भारत के लिए 7% GDP ग्रोथ क्यों अहम है?
अगर भारत की अर्थव्यवस्था लगातार 7% या उससे ज्यादा की वास्तविक दर से बढ़ती है तो इसका असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है। तेज आर्थिक ग्रोथ से निवेश बढ़ने, कंपनियों के कारोबार में विस्तार, रोजगार के अवसर बढ़ने और सरकार के राजस्व में सुधार की संभावना रहती है।
इसके अलावा मजबूत घरेलू मांग मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और कंजम्पशन सेक्टर के लिए भी सकारात्मक माहौल बना सकती है। भारत पहले ही दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में 7% से ज्यादा की ग्रोथ देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद कर सकती है।