India EV Market 2025 Report: भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) अब सिर्फ भविष्य की बात नहीं रहे, बल्कि 2025 में यह हकीकत बनकर सामने आए। साल भर में ईवी की बिक्री ने नया रिकॉर्ड बनाया और यह साफ हो गया कि भारतीय ग्राहक अब धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक ऑप्शंस को अपना रहे हैं। सरकारी नीतियों, त्योहारी खरीदारी और बढ़ती जागरूकता ने इस बदलाव को रफ्तार दी।
2025 में कितनी हुई बिक्री
इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायन्स (IESA) की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में भारत में कुल 23 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिके। यह देश में हुए सभी नए वाहन रजिस्ट्रेशन का करीब 8 फीसदी हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार साल की शुरुआत में ग्रोथ स्थिर रही, लेकिन आखिरी तिमाही में त्योहारी मांग ने बिक्री को तेज कर दिया।
टू-व्हीलर का दबदबा बरकरार
पूरे ऑटो सेक्टर की बात करें तो 2025 में भारत में कुल 2.82 करोड़ वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ। इसमें दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही, करीब 2 करोड़ यूनिट्स। पैसेंजर फोर-व्हीलर की बिक्री 44 लाख यूनिट के पार रही, जबकि ट्रैक्टर और कृषि वाहनों की संख्या 10.6 लाख से ज्यादा रही।
ईवी सेगमेंट में किसकी सबसे ज्यादा बिक्री?
ईवी सेगमेंट में सबसे बड़ा योगदान इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का रहा। साल भर में 12.8 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया बिके, जो कुल ईवी बिक्री का 57 फीसदी है। इसके बाद इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर रहे, जिनकी बिक्री 8 लाख यूनिट तक पहुंची और इनका शेयर 35 फीसदी रहा। इलेक्ट्रिक कारों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम रही, लेकिन फिर भी 1.75 लाख यूनिट की बिक्री दर्ज की गई।
लॉजिस्टिक्स में भी दिखी बिजली की एंट्री
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर सेगमेंट में खासतौर पर छोटे और हल्के गुड्स कैरियर्स में अच्छी तेजी दिखी। इससे संकेत मिलता है कि डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर में भी इलेक्ट्रिफिकेशन की शुरुआत हो चुकी है।
कौन सा राज्य सबसे बड़ा ईवी मार्केट?
राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश 2025 में सबसे बड़ा ईवी बाजार बनकर उभरा, जहां 4 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन बिके। इसके बाद महाराष्ट्र में 2.66 लाख और कर्नाटक में 2 लाख यूनिट की बिक्री हुई। ये तीनों राज्य मिलकर देश की 40 फीसदी से ज्यादा ईवी बिक्री के लिए जिम्मेदार रहे।
कम बिक्री, लेकिन ज्यादा हिस्सा
दिल्ली, केरल और गोवा जैसे राज्यों में कुल वाहन बिक्री भले कम रही हो, लेकिन यहां EV-to-ICE अनुपात काफी ऊंचा रहा। दिल्ली में यह 14 फीसदी, केरल में 12 फीसदी और गोवा में 11 फीसदी दर्ज किया गया। वहीं त्रिपुरा और असम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों ने भी ईवी अपनाने में चौंकाने वाला प्रदर्शन किया।
सरकार का बड़ा दांव, 10,900 ई-बस टेंडर
नीति स्तर पर 2025 का सबसे बड़ा कदम इलेक्ट्रिक बसों को लेकर रहा। कन्वर्जेन्स एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) ने 10,900 इलेक्ट्रिक बसों का टेंडर पूरा किया, जो ₹10,900 करोड़ की PM E-DRIVE scheme योजना का हिस्सा है। इसका मकसद शहरों में ग्रीन पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है।
IESA की रिपोर्ट इशारा करती है कि अभी ईवी की पकड़ हल्के वाहनों में ज्यादा है, लेकिन सरकार का फोकस अब भारी कमर्शियल व्हीकल्स और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बढ़ रहा है। इससे साफ है कि 2025 सिर्फ एक पड़ाव है, असली रफ्तार आने वाले सालों में देखने को मिलेगी।