18 साल चली बातचीत अब पूरी, भारत-यूरोपीय संघ के बीच कब से होगी फ्री ट्रेड डील?

भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता (India-EU Trade Deal) को लेकरवर्ष 2007 में शुरू हुई बातचीत की प्रक्रिया अब पूरी हो गई है। ईयू के दो प्रमुख अधिकारियों उर्सुला वोन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा अभी नई दिल्ली में हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उनके साथ मीटिंग होगी।

Naveen Kumar Pandey( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड27 Jan 2026, 09:40 AM IST
गणतंत्र दिवस परेड के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोपीय संघ के शीर्ष अधिकारियों के साथ।
गणतंत्र दिवस परेड के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोपीय संघ के शीर्ष अधिकारियों के साथ। (PTI)

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए आधिकारिक स्तर की बातचीत पूरी कर ली है। इस समझौते से दोतरफा व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक संबंध मजबूत होंगे। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, 'आधिकारिक स्तर की बातचीत समाप्त होने वाली है और दोनों पक्ष 27 जनवरी, मंगलवार को मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ता के सफल समापन की घोषणा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।'

भारत-ईयू एफटीए की प्रक्रिया जल्दी पूरी करने पर जोर

उन्होंने कहा कि भारतीय नजरिये से यह व्यापार समझौता संतुलित और भविष्योन्मुखी है, जो यूरोपीय संघ के साथ भारत के बेहतर आर्थिक एकीकरण में मदद करेगा। अग्रवाल ने विश्वास जताया कि इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी। कॉमर्स सेक्रेटरी ने कहा, 'वार्ता सफलतापूर्वक पूरी हो गई है और सौदे को अंतिम रूप दे दिया गया है।' उन्होंने बताया कि इस समय समझौते के मसौदे की कानूनी जांच चल रही है। सरकार की कोशिश इन प्रक्रियाओं को जल्द पूरा कर समझौते पर हस्ताक्षर करने की है।

अगले वर्ष से शुरू में ही लागू हो जाएगा समझौता

उम्मीद है कि इस समझौते पर इसी साल हस्ताक्षर किए जाएंगे और यह अगले साल की शुरुआत में प्रभावी हो सकता है। समझौते के कार्यान्वयन में समय लगेगा, क्योंकि इसके लिए यूरोपीय संसद की मंजूरी अनिवार्य है, जबकि भारत में केवल केंद्रीय मंत्रिमंडल की सहमति की आवश्यकता होती है। इस समझौते को 18 साल की लंबी बातचीत के बाद अंतिम रूप दिया गया है। भारत-ईयू के बीच एफटीए को लेकर बातचीत वर्ष 2007 में शुरू हुई थी।

आज पीएम मोदी की ईयू अधिकारियों के साथ मीटिंग

बातचीत पूरी होने की औपचारिक घोषणा मंगलवार को नई दिल्ली में होने वाले भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 27 जनवरी को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ शिखर वार्ता करेंगे। इस समझौते का उद्देश्य अमेरिकी शुल्क के कारण वैश्विक व्यापार में जारी व्यवधानों के बीच दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देना है।

भारत-ईयू डील अब तक का सबसे बड़ा समझौता: पीयूष गोयल

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को अब तक का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौता 'मदर ऑफ ऑल डील्स' करार दिया है। इस समझौते के तहत दोनों पक्ष आपसी व्यापार वाली 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर आयात शुल्क को कम या समाप्त करेंगे। कपड़ा और फुटवियर जैसे श्रम प्रधान क्षेत्रों के उत्पादों पर शुल्क पहले ही दिन से समाप्त हो सकता है, जबकि कुछ अन्य वस्तुओं पर इसे पांच से दस वर्षों में चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।

एफटीए से भारत की घटेगी चीन पर निर्भरता

यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका की ओर से लगाए गए हाई टैरिफ ने वैश्विक व्यापार प्रवाह को प्रभावित किया है। भारत वर्तमान में अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ का सामना कर रहा है। माना जा रहा है कि यह एफटीए भारतीय निर्यातकों को अपने बाजार विविधीकरण और चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।

FTA से भारत और ईयू के हिस्से क्या-क्या आएगा, जान लीजिए

भारत इस समझौते के जरिए अपने कपड़ा, चमड़ा और हथकरघा जैसे क्षेत्रों के लिए शून्य-शुल्क बाजार पहुंच की तलाश में है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ अपने ऑटोमोबाइल निर्यात, वाइन और हाई-टेक विनिर्माण क्षेत्रों के लिए भारतीय बाजार में अधिक पहुंच चाहता है। संवेदनशील कृषि और डेरी क्षेत्रों को फिलहाल इस समझौते से बाहर रखा गया है ताकि छोटे और सीमांत किसानों के हितों की रक्षा की जा सके।

भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है ईयू

यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.53 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 60.68 अरब अमेरिकी डॉलर था। इसके अलावा, यूरोपीय संघ भारत में एक बड़ा निवेशक भी है, जिसका अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 117.4 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है।

आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता घरेलू उद्योगों के लिए खतरा बनने के बजाय लागत कम करने और व्यापार विस्तार में सहायक होगा। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार हैं, क्योंकि दोनों मूल्य श्रृंखला के अलग-अलग स्तरों पर काम करते हैं।

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