
India-GCC Trade deal: यूरोप और अमेरिका से ट्रेड डील्स के बाद अब भारत खाड़ी देशों से भी व्यापारिक रिश्ते मजबूत करने में जुट गया है। भारत और पश्चिमी एशिया के छह देशों के समूह गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल (GCC) ने मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA पर बातचीत शुरू करने के लिए नियम और शर्तों (Terms of Reference) पर गुरुवार को हस्ताक्षर कर दिए हैं। इससे लंबे समय से अटकी बातचीत को फिर से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब तीन दिन पहले ही भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील का ऐलान हुआ था, जिसमें वॉशिंगटन ने भारत पर लगने वाला टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया। वहीं, पिछले हफ्ते भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से अटकी FTA बातचीत भी पूरी हो गई। ऐसे में खाड़ी देशों के साथ FTA पर बातचीत की शुरुआत को भारत की लगातार मजबूत होती ट्रेड रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
इन नियम-शर्तों में प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते का दायरा, बातचीत का ढांचा और तौर-तरीके तय किए गए हैं। इससे अब यह साफ हो गया है कि किन सेक्टर्स को शामिल किया जाएगा और बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ेगी। इस समझौते को दोनों पक्षों के लिए अहम माना जा रहा है।
इस मौके पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हस्ताक्षर समारोह की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने में सहायक होगा। गोयल ने यह भी याद दिलाया कि करीब एक करोड़ भारतीय GCC क्षेत्र में रहकर काम कर रहे हैं, जिनके लिए यह समझौता अप्रत्यक्ष रूप से फायदेमंद हो सकता है।
GCC, खाड़ी क्षेत्र के छह देशों सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन का समूह है। ये सभी देश भारत के लिए ऊर्जा और व्यापार दोनों के लिहाज से बेहद अहम माने जाते हैं।
भारत ने मई 2022 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ पहले ही मुक्त व्यापार समझौता लागू कर दिया था। इसके अलावा भारत और ओमान ने 18 दिसंबर 2025 को मस्कट में व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर किए थे। GCC के साथ प्रस्तावित FTA को इन्हीं प्रयासों की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत और GCC के बीच FTA को लेकर पहले 2006 और 2008 में दो दौर की बातचीत हो चुकी थी। हालांकि, GCC की ओर से सभी देशों और आर्थिक समूहों के साथ वार्ता स्थगित करने के फैसले के चलते तीसरा दौर नहीं हो पाया था। अब एक तरह से यह बातचीत फिर से शुरू हो रही है।
भारत मुख्य रूप से सऊदी अरब और कतर जैसे GCC देशों से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस आयात करता है। वहीं भारत इन देशों को मोती, कीमती और अर्ध-कीमती पत्थर, धातु, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, लोहा-इस्पात और रसायनों का निर्यात करता है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का GCC देशों को निर्यात सालाना आधार पर करीब 1 प्रतिशत बढ़कर लगभग 57 अरब डॉलर रहा। वहीं आयात 15.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ 121.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। द्विपक्षीय व्यापार 2023-24 के 161.82 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 178.7 अरब डॉलर हो गया।
संयुक्त अरब अमीरात वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। सऊदी अरब पांचवें, कतर 22वें, ओमान 28वें, कुवैत 29वें और बहरीन 65वें स्थान पर रहा।
हाल ही में भारत ने यूरोप के साथ भी व्यापर समझौते की घोषणा की। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया है। पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। यह 25% वैश्विक व्यापार वाले दोनों पक्षों की मजबूत साझेदारी का संकेत है। इससे रक्षा सहयोग बढ़ेगा। निवेश बहुत ज्यादा आएगा। इनोवेशन और साइंस में सहयोग बढ़ेगा। वित्तीय बाजारों में और एकीकरण होगा। इससे एक-तिहाई दुनिया की आबादी के लिए साझा समृद्धि और बेहतर भविष्य बनेगा। खास बात यह है कि यह समझौता भारत के 99% से ज्यादा निर्यात को अभूतपूर्व बाजार पहुंच देता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया और बातचीत के बाद ट्रेड डील की घोषणा कर दी थी। वाणिज्य मंत्री ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को कपड़ा, चमड़ा, रत्न-आभूषण और हस्तशिल्प जैसे रोजगारपरक क्षेत्रों के लिए 'ढेर सारे अवसर' खोलने वाला है। पीयूष गोयल ने इसे भारतीय निर्यातकों के लिए फायदेमंद बताया है।
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