GDP Growth Data: भारत के हालिया आर्थिक आंकड़ों ने एक मिली-जुली तस्वीर पेश की है। एक तरफ सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की ग्रोथ दर ने सारे अनुमानों को पार कर दिया है, तो दूसरी ओर सरकार पर राजकोषीय दबाव तेजी से बढ़ रहा है। ग्रोथ रेट में उछाल और राजकोषीय घाटे में वृद्धि, दोनों ही भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति को दर्शाते हैं। आर्थिक विशेषज्ञों को अब यह देखना है कि क्या यह शानदार ग्रोथ 'एनिमल स्पिरिट्स' की वापसी का संकेत है। एनिमल स्पिरिट्स तेज निवेश और खर्च को लेकर उत्साह को प्रदर्शित करता है।
जीडीपी ग्रोथ रेट ने सबको चौंकाया
हाल ही में जारी हुए कई आर्थिक आंकड़ों में से सबसे चौंकाने वाला रहा जुलाई-सितंबर तिमाही (Q2FY26) का जीडीपी ग्रोथ आंकड़ा। यह 8.2% रहा, जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे ज्यादा है। ज्यादातर जानकारों ने इसके 7% के आसपास रहने का अनुमान लगाया था। पिछले साल इसी तिमाही में ग्रोथ सिर्फ 5.6% थी, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 7.8% थी। यह दिखाता है कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज हुई है।
राजकोषीय घाटा बढ़ा, चिंता गहरायी
एक तरफ जीडीपी ग्रोथ ने खुशी दी है, वहीं राजकोषीय मोर्चे पर चिंताएं बढ़ गई हैं। अक्टूबर तक राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) पूरे साल के लक्ष्य का 52.6% हो गया है जबकि एक साल पहले यह 46.5% था। इसका मुख्य कारण ज्यादा खर्च और बजट अनुमान से कम राजस्व जुटा पाना है।
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का दम
जीडीपी में इस बड़ी बढ़ोतरी को कई क्षेत्रों से सपोर्ट मिला। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 9.1% की मजबूत ग्रोथ देखी गई, जिसे ज्यादा कंजम्पशन और अमेरिका को एक्सपोर्ट बढ़ाने के 'फ्रंट-लोडिंग' से बल मिला। फ्रंट लोडिंग का संदर्भ पहले ही माल भेजने से है। अमेरिका के टैरिफ बढ़ने के बावजूद, कुल एक्सपोर्ट में 5.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कम महंगाई, इनकम टैक्स और जीएसटी में कटौती ने भी कंजम्पशन को बढ़ावा दिया। सभी उद्योगों की ग्रोथ बढ़कर 7.7% रही, जो पिछले साल 6.3% थी।
अन्य क्षेत्र और नॉमिनल GDP की स्थिति
सर्विस सेक्टर के अंदर फाइनेंशियल सर्विसेज और रियल एस्टेट ने ग्रोथ को खास सपोर्ट दिया। वहीं, एग्रीकल्चर सेक्टर लगातार पांचवीं तिमाही में 3.5% से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज करने में कामयाब रहा। कम महंगाई के कारण सांख्यिकीय रूप से अनुकूल 'डिफ्लेटर' और पिछले साल के निचले बेस इफेक्ट ने भी रियल जीडीपी ग्रोथ को बढ़ाने में मदद की। हालांकि, महंगाई को एडजस्ट किए बिना मापी जाने वाली नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ कम महंगाई के कारण 8.7% पर धीमी रही। इसके चालू वित्त वर्ष के अंत तक 8% से नीचे रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2025 में यह 9.8% थी। सरकार ने बजट में 10.5% नॉमिनल GDP ग्रोथ का अनुमान लगाया था, इसलिए यह चिंता का विषय है।
घाटे को काबू करने की चुनौती
नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ का बजट अनुमान से कम रहना राजस्व जुटाने की कोशिशों पर दबाव डालेगा। डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स में कटौती से भी राजस्व पहले से ही प्रभावित है। अक्टूबर तक टैक्स रेवेन्यू ग्रोथ 45% रही, जो एक साल पहले 51% थी। इसके साथ ही, खर्च भी तेजी से बढ़ा है, जिससे राजकोषीय घाटा ऊपर गया है। सरकार को इस साल जीडीपी के 4.4% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने के लिए या तो खर्च में कटौती करनी होगी या फिर अतिरिक्त राजस्व जुटाने के नए तरीके तलाशने होंगे।
विशेषज्ञों की राय और ग्रोथ का अनुमान
अर्थव्यवस्था में अलग-अलग सेक्टरों में दिख रही यह मजबूती शुरुआती संकेत देती है कि 'एनिमल स्पिरिट्स' लौट रहे हैं। खपत स्थिर बनी हुई है और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट फिर से बढ़ रहा है। हालांकि, एक्सपर्ट्स इसे एक ट्रेंड मानने से पहले थोड़ा और इंतजार करना चाहेंगे। कई अर्थशास्त्रियों ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.3-6.8% से बढ़ाकर 7% से ज्यादा कर दिया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से भी उम्मीद है कि वह अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में जल्द ही अपने ग्रोथ अनुमान को ऊपर की ओर रिवाइज कर सकता है।