क्या मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारत में आएगा कुकिंग गैस का संकट? जानिए देश में कितना है स्टॉक

फारस की खाड़ी में युद्ध की वजह से गैस से भरे कई जहाज स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास फंस गए हैं। इससे भारत की ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में भारतीय परिवारों को कुकिंग गैस की भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।

Jitendra Singh
अपडेटेड5 Mar 2026, 06:59 PM IST
भारत अपनी 90% गैस मिडिल ईस्ट से इंपोर्ट करता है।
भारत अपनी 90% गैस मिडिल ईस्ट से इंपोर्ट करता है।

पश्चिम एशिया में तनाव दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमला किया गया। इसके बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। इस युद्ध में भारत तो शामिल नहीं है। लेकिन भारत को तगड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इसबीच भारत के करोड़ों घरों की रसोई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि मिडिल ईस्ट में ईरान-इजराइल की बढ़ती जंग ने ऊर्जा सुरक्षा को हिलाकर रख दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर फारस की खाड़ी में जारी टेंशन जल्द खत्म नहीं हुई, तो आने वाले हफ्तों में भारतीय परिवारों को रसोई गैस की बड़ी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।

इससे भारत में महंगाई और ज्यादा बढ़ सकती है। ब्लूमबर्ग में छपी खबर के मुताबिक, फारस की खाड़ी में युद्ध की वजह से गैस से भरे कई जहाज स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास फंस गए हैं। इससे भारत की ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है। इधर जानकारों का कहना है कि अगर मार्च में आने वाले LPG जहाज जल्द ही भारत के लिए रवाना नहीं होते, तो देश में रसोई गैस की गंभीर कमी हो सकती है। इसका सीधा असर करोड़ों परिवारों पर पड़ सकता है।

आखिर कुकिंग गैस की क्यों आएगी समस्या

डेटा इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के अनुसार भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG खरीदार है। भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी से अधिक हिस्सा मिडिल ईस्ट के देशों से खरीदता है। अभी जंग की वजह से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होने वाली सप्लाई भी रुक गई है। ऐसे में कुकिंग गैस से लदे जहाज युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे भारत तक समय पर डिलीवरी पहुंचना मुश्किल हो गया है।

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भारत ने हाल के वर्षों में अमेरिका से भी LPG खरीदने के लिए लंबी अवधि का समझौता किया है, लेकिन वहां से आने वाली मात्रा अभी काफी कम है। इसके अलावा अमेरिका से आने वाली गैस की ढुलाई का खर्च भी ज्यादा पड़ता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर अभी अमेरिका से LPG खरीदी भी जाए, तो वह अप्रैल से पहले भारत नहीं पहुंच पाएगी।

भारत के पास हैं ये विकल्प

केप्लर के एनालिस्ट सुमित रितोलिया ने कहा कि भारत के पास LPG के लिए दूसरे सप्लायर ढूंढने के विकल्प सीमित हैं। कुछ अतिरिक्त गैस अमेरिका, रूस या अर्जेंटीना से मिल सकती है, लेकिन मात्रा कम होगी और यह वैश्विक कीमतों और जहाजों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।

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भारत के पास है सिर्फ एक महीने की स्टॉक

एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि भारत का LPG स्टॉक सिर्फ एक महीने (30 दिन) का बचा है। अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। पश्चिम एशिया में हमलों के बाद भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक कर ऊर्जा सप्लाई के आपात योजना पर चर्चा की है। भारत अपनी करीब दो-तिहाई LNG और लगभग आधा कच्चा तेल इसी क्षेत्र से इंपोर्ट करता है।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

अगर सप्लाई चेन में रुकावट नहीं हटी तो ना केवल गैस की किल्लत होगी बल्कि इसकी कीमतों में भी उछाल आ सकता है। इससे घरेलू बजट बिगड़ेगा और महंगाई दर ऊपर चढ़ेगी। सिर्फ एलपीजी ही नहीं बल्कि सीएनजी और पीएनजी की सप्लाई पर भी इसका असर दिखना शुरू हो जाएगा। भारत के तेल मंत्रालय ने कहा कि रिजर्व के मामले में बहुत परेशान होने की जरूरत नहीं है और उम्मीद है कि इस संकट को कम करने के लिए कुछ ना कुछ उपाय जरूर किए जाएंगे।

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जानिए होर्मुज स्ट्रेट क्या है

होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित एक संकरा सा रास्ता है। यही एकमात्र समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी या अरब सागर से जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात है। होर्मुज स्ट्रेट को फारस की खाड़ी का प्रवेश द्वार भी कहते हैं क्योंकि इसी संकरे रास्ते से सऊदी अरब, कुवैत, कतर, इराक जैसे दुनिया के प्रमुख उत्पादक देश अपना तेल बाहर भेजते हैं। हर दिन करीब 15 मिलियन बैरल कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है, जो दुनिया की सप्लाई का करीब पांचवां हिस्सा है।

सरकार ने दिया बयान

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच भारत में एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति को लेकर भारत सरकार ने राहत वाला बयान दिया है। सरकार ने साफ किया है कि देश में गैस की कमी नहीं होगी। आपूर्ति लगातार बनी रहेगी और आम लोगों और उद्योगों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। गुरुवार को सरकार के सूत्रों ने बताया कि ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भारत की स्थिति बेहद मजबूत है। वर्तमान में भंडार की स्थिति संतोषजनक है। भंडार की भरपाई प्रतिदिन की जा रही है। एलपीजी या एलएनजी की कोई कमी नहीं है। विश्व में कच्चे तेल की भी कोई कमी नहीं है। भारत अन्य आपूर्तिकर्ताओं के साथ भी संपर्क में है।

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