India Manufacturing PMI: फरवरी महीने में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया। HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी PMI बढ़कर 56.9 पर पहुंच गया, जो चार महीनों का हाई लेवल है। जनवरी में यह 55.4 था। 50 से ऊपर का स्तर गतिविधियों में विस्तार को दर्शाता है। यह सर्वे HSBC के लिए S&P Global द्वारा तैयार किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार घरेलू मांग में मजबूती के चलते नए ऑर्डर और उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। हालांकि एक्सपोर्ट ग्रोथ लगभग डेढ़ साल में सबसे धीमी दर पर आ गई।
बता दें कि 50 से ऊपर का स्कोर बताता है कि सेक्टर में सुधार हो रहा है और कामकाज बढ़ रहा है। घरेलू बाजार में भारतीय सामानों की मांग में आए बड़े सुधार की वजह से कंपनियों को भारी मात्रा में नए ऑर्डर मिले हैं, जिससे प्रोडक्शन की रफ्तार पिछले चार महीनों में सबसे तेज रही है। नवंबर के लिए मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स’ इंडेक्स (PMI) 56.6 रहा, जो अक्टूबर के 59.2 से नीचे है।
भारत की इकोनॉमी रहेगी मजबूत
कुल मिलाकर नतीजे बताते हैं कि अक्टूबर-दिसंबर में 7.8% की ग्रोथ के बाद, मैन्युफैक्चरिंग में 13.3% की बढ़ोतरी से इस तिमाही में भारत की इकॉनमी के मज़बूत बने रहने की उम्मीद है। मार्च में खत्म होने वाले पूरे फाइनेंशियल ईयर में साउथ एशिया की इकॉनमी के 7.6% बढ़ने की उम्मीद है।
PMI को घरेलू मांग ने दी मजबूती
HSBC के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्राजुल भंडारी (Pranjul Bhandari) ने कहा कि फैक्ट्रियों में काम करने के तरीके में सुधार और नई टेक्नोलॉजी में निवेश करने से भी प्रोडक्शन को काफी मजबूती मिली है। यही वजह है कि अक्टूबर के बाद से अब तक का यह सबसे शानदार प्रदर्शन रहा है। कंपनियों का कहना है कि मार्केट में ग्राहकों की बढ़ती जरूरतों और बेहतरीन मार्केटिंग की वजह से उनके पास नए काम की कमी नहीं है।
निर्यात में सुस्ती, वैश्विक असर
हालांकि घरेलू बाजार मजबूत रहा, लेकिन नए निर्यात ऑर्डर की वृद्धि दर 17 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गई। यह संकेत देता है कि वैश्विक मांग अभी भी दबाव में है। अमेरिका की टैरिफ नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। हाल ही में भारत पर अमेरिकी शुल्क 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी किया गया था, फिर भी निर्यात वृद्धि में तेजी नहीं दिखी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बाहरी मांग में कमजोरी के कारण रोजगार सृजन की गति सीमित रह सकती है।
महंगाई का दबाव कम, लेकिन सामान हो सकते हैं महंगे
राहत की बात यह है कि कंपनियों के लिए कच्चा माल खरीदने की लागत (Input Cost) में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। हालांकि, बाजार में सामान की जबरदस्त मांग होने के कारण मैन्युफैक्चरर्स ने अपने सामानों की कीमतें थोड़ी बढ़ाई हैं। अच्छी बात यह है कि आने वाले साल को लेकर भारतीय कंपनियों का भरोसा बहुत मजबूत है। उन्हें उम्मीद है कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था 7.6% की रफ्तार से बढ़ती रहेगी।
जानिए PMI कैसे होता है तैयार
HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI को S&P Global तैयार करता है। यह सर्वे करीब 400 मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के परचेजिंग मैनेजर्स से लिए गए जवाबों पर आधारित होता है। कंपनियों का चयन सेक्टर और कर्मचारियों की संख्या के आधार पर किया जाता है, ताकि GDP में उनके योगदान को सही तरह से दिखाया जा सके।