जनवरी में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में मामूलू सुधार देखने को मिला है। यह सुधार नए ऑर्डर्स में तेजी के चलते हुआ। हालांकि, बिजनेस कॉन्फिडेंस पिछले साढ़े तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। मंथली सर्वे में यह जानकारी सामने आई है। सीजनली एडजस्टेड HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) दिसंबर में दो साल के निचले स्तर 55 से बढ़कर जनवरी में 55.4 पर पहुंच गया।
नए ऑर्डर, उत्पादन और रोजगार में बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं, लेकिन इसके बावजूद कारोबारियों का भरोसा कमजोर बना हुआ है। ताजा PMI सर्वे में यह जानकारी सामने आई है। पीएमआई के अनुसार, 50 से ऊपर का आंकड़ा सेक्टर में विस्तार को दिखाता है, जबकि 50 से नीचे का स्तर गिरावट का संकेत माना जाता है।
रोजगार में हुआ इजाफा
सर्वे में शामिल कंपनियों ने बताया कि मांग में मजबूती, नए कारोबार में इजाफा और टेक्नोलॉजी में निवेश से उत्पादन को सहारा मिला। कुल बिक्री को सबसे ज्यादा मजबूती घरेलू बाजार से मिली है। HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजल भंडारी ने कहा कि जनवरी में भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में सुधार देखने को मिला। नए ऑर्डर्स, उत्पादन और रोजगार में बढ़ोतरी हुई।
इनपुट लागत में मामूली बढ़ोतरी हुई, जबकि फैक्ट्री-गेट कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी रही। इससे कंपनियों के मुनाफे पर थोड़ा दबाव पड़ा। सर्वे में शामिल कंपनियों ने बताया कि मांग में मजबूती, नए कारोबार में बढ़ोतरी और टेक्नोलॉजी में निवेश ने उत्पादन को सहारा दिया।
कारोबारी भरोसा साढ़े तीन साल के सबसे निचले स्तर पर
इस बीच, कारोबारी भरोसा जनवरी में साढ़े तीन साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया। सिर्फ 15 फीसदी कंपनियों ने अगले एक साल में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जताई है, जबकि 83 फीसदी कंपनियों का मानना है कि उत्पादन में कोई खास बदलाव नहीं होगा। भंडारी ने कहा कि नए ऑर्डर्स में तेजी के बावजूद, बिजनेस कॉन्फिडेंस कमजोर बना हुआ है और भविष्य के उत्पादन को लेकर उम्मीदें जुलाई 2022 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं।
जानिए PMI कैसे होता है तैयार
HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI को S&P Global तैयार करता है। यह सर्वे करीब 400 मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के परचेजिंग मैनेजर्स से लिए गए जवाबों पर आधारित होता है। कंपनियों का चयन सेक्टर और कर्मचारियों की संख्या के आधार पर किया जाता है, ताकि GDP में उनके योगदान को सही तरह से दिखाया जा सके।