FDI: भारत में अधिक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने के लिए सरकार कुछ क्षेत्रों में प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर विचार कर रही है। इस प्रक्रिया से जुड़े दो लोगों ने बताया कि केंद्र प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investments - FDI) में लालफीताशाही को कम करके विदेशी निवेशकों आकर्षित करने की तैयारी चल रही है। इस हफ्ते के आखिरी में, सरकारी अधिकारी उद्योग जगत के अधिकारियों से मिलकर FDI के नियमों को आसान बनाने पर चर्चा कर सकते हैं।
मौजूदा समय में विदेशी निवेशकों को कई तरह के फॉर्म भरना होता है। इसके साथ ही कई पोर्टलों को उपयोग करने की जरूरत रहती है। फिर फॉर्म भरकर मंजूरी लेने में लंबा समय लग जाता है। इनमें शेयर जारी करने के लिए फॉर्म FC-TRS, FLA, रिजर्व बैंक की सालाना देनदारी, विदेशी कर्मचारियों को दिए शेयरों का विकल्प जैसी तमाम चीजें निवेशकों को अलग से फाइलिंग करना होता है। कुछ मामलों में निवेशकों को नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (National Single Window System - NSWS) के जरिए सरकारी मंजूरी के लिए भी अप्लाई करना पड़ता है।
FDI के नियमों में बदलाव के आसार
नाम न छापने की शर्त पर एक शख्स ने बताया कि केंद्र सरकार कई नियमों में ढील दे सकती है। इसके साथ ही FDI के अनुकूल बनाने के लिए प्रक्रियाओं को आसान किया जा सकता है। इसके लिए कॉमर्स मिनिस्ट्री के तहत आने वाला डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (Department for Promotion of Industry and Internal Trade - DPIIT) कोशिश में जुटा हुआ है। बता दें कि DPIIT ही FDI से जुड़े कामकाज संभालता है।
समय-सीमा होगी तय
नाम न छापने की शर्त पर लाइव मिंट से बातचीत करते हुए दो लोगों ने बताया कि कोई समय-सीमा नहीं होने की वजह से कई बार छोटे निवेशक फॉर्म भरने से चूक जाते हैं। ऐसे में जिन नियमों में सुधार किया जाना, उसमें सरकार समय-सीमा पर खास तौर से फोकस कर सकती है। उन्होंने आगे बताया कि कारोबार करने में आसानी लाने के लिए होने वाले सुधारों के तहत, सरकार इस कोशिश में जुटी है कि निवेशकों को कम से कम मंजूरी लेना पड़े।
FDI में आई सुस्ती
FDI सरकार के लिए बेहद अहम है। इसकी वजह ये है कि इससे आर्थिक विकास को गति देने में मदद मिलती है। इसके साथ ही रोजगार को बढ़ावा मिलता है। हालांकि हाल ही में भारत में FDI की रफ्तार में सुस्ती आई है। अप्रैल-जून 2025 में भारत में FDI 15% बढ़कर 18.62 अरब डॉलर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष (वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही) की इसी अवधि में 47.8 फीसदी की वृद्धि से कम है।
अप्रैल जून 2025 में अमेरिका सबसे बड़ा निवेशक बनकर उभरा है, जबकि सिंगापुर और मॉरीशस भी प्रमुख स्रोत हैं। अब अमेरिका से तनाव पूर्ण रिश्ते होने की वजह से भारत अन्य देशों की ओर रूख कर रहा है। इसमें भारत का पलड़ा चीन की ओर ज्यादा भारी हो रहा है। फिलहाल सरकार FDI के नियमों को आसान बनाने में जुटी हुई है। इसके लिए सरकार निवेशकों से सुझाव भी मांग सकती है।