भारत ने चार साल बाद गेहूं का एक्सपोर्ट फिर से किया शुरू, चीनी को भी मिली हरी झंडी

केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार को स्थिर रखने और किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए 25 लाख टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही अतिरिक्त 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं प्रोडक्ट्स के निर्यात की भी अनुमति दी गई है।

Jitendra Singh
अपडेटेड13 Feb 2026, 07:26 PM IST
गेहूं निर्यात का कदम स्टॉक और कीमत की स्थिति की समीक्षा के बाद उठाया गया है।
गेहूं निर्यात का कदम स्टॉक और कीमत की स्थिति की समीक्षा के बाद उठाया गया है।

घरेलू बाजार में बंपर पैदावार और गोदामों में भरे सरप्लस स्टॉक को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 4 साल बाद गेहूं निर्यात का रास्ता खोल दिया है। हालांकि इसके लिए लिमिट लगा दी गई है। 25 लाख टन का कोटा तय किया गया है। इसके साथ ही अब गेहूं उत्पादों का भी निर्यात हो सकेगा। सरकार ने 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी है। सरकार ने यह फैसला घरेलू स्टॉक के ठीक-ठाक होने और प्रोडक्शन के अच्छे आउटलुक का हवाला देते हुए किया है।

मिनिस्ट्री ऑफ़ कंज्यूमर अफेयर्स, फ़ूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन के अनुसार, 2025-26 में प्राइवेट कंपनियों के पास गेहूं का स्टॉक लगभग 75 लाख टन होने का अनुमान है, जो एक साल पहले की तुलना में लगभग 32 लाख टन ज्यादा है। इस फैसले का सीधा मकसद घरेलू कीमतों में स्थिरता लाना और रबी सीजन की नई फसल आने से पहले किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाना है।

गेहूं की पैदावार में इजाफा

इसके अलावा, 1 अप्रैल 2026 तक फ़ूड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया के सेंट्रल पूल में गेहूं की उपलब्धता लगभग 182 लाख टन होने का अनुमान है, जिससे पता चलता है कि एक्सपोर्ट के बाद भी बफर स्टॉक बना रहेगा। सरकार का कहना है 2025-26 के दौरान निजी कंपनियों के पास गेहूं का स्टॉक लगभग 75 लाख होगा, जो पिछले साल इसी समय की तुलना में लगभग 32 लाख टन से ज्यादा है। साल-दर-साल यह बड़ी बढ़ोतरी देश में सप्लाई की अच्छी स्थिति दिखाती है।

यह भी पढ़ें | महंगाई की आंच का दिख सकता है असर, RBI ब्याज दरों को कर सकता है स्थिर

रबी 2026 सीजन में गेहूं की बुवाई बढ़कर करीब 334.17 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो पिछले साल 328.04 लाख हेक्टेयर थी। सरकार ने इसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और खरीद सिस्टम पर किसानों के मजबूत भरोसे का संकेत बताया है और एक और बेहतर फसल की संभावना जताई है।

मई 2022 से गेहूं निर्यात पर रोक

भारत ने 13 मई 2022 को गेहूं के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया ताकि बढ़ती घरेलू कीमतों को कंट्रोल किया जा सके। गेहूं की कम पैदावार की वजह से सरकार इसे सुरक्षित रखना चाहती है। फिलहाल निर्यात का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन लड़ाई के बाद ग्लोबल कीमतें बढ़ रही थीं, जिससे यह चिंता बढ़ गई थी कि प्राइवेट शिपमेंट से घरेलू सप्लाई कम हो सकती है और फ़ूड इन्फ्लेशन बढ़ सकता है।

यह भी पढ़ें | भारत का खजाना हुआ कम, विदेशी मुद्रा भंडार और स्वर्ण भंडार में गिरावट

चीनी निर्यात को भी सरकार ने दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने गेहूं के साथ ही चीनी निर्यात को भी आसान बनाने के लिए मौजूदा चीनी सत्र 2025–26 के दौरान इच्छुक चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात करने की इजाजत देने का फैसला किया है। इससे पहले सरकार ने 14 नवंबर 2025 के ऑर्डर के जरिए मौजूदा चीनी सत्र 2025–26 के दौरान 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। चीनी मिलों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक सिर्फ लगभग 1.97 लाख टन चीनी निर्यात की गई है। इसके अलावा आज तक चीनी मिलों ने लगभग 2.72 चीनी निर्यात के लिए सौदे किए हैं।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़बिजनेसभारत ने चार साल बाद गेहूं का एक्सपोर्ट फिर से किया शुरू, चीनी को भी मिली हरी झंडी
More
बिजनेस न्यूज़बिजनेसभारत ने चार साल बाद गेहूं का एक्सपोर्ट फिर से किया शुरू, चीनी को भी मिली हरी झंडी