India GDP: चौथी तिमाही में 7.8% की रफ्तार से दौड़ी भारत की जीडीपी, जानिए किन सेक्टर्स ने मचाया गदर

India economy: भारत की GDP जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में 7.8% बढ़ी, जो अनुमान से बेहतर रही। पूरे FY26 में अर्थव्यवस्था 7.7% बढ़ी। सेवा क्षेत्र, वित्तीय सेवाएं और निर्माण गतिविधियां विकास के प्रमुख इंजन बने, जबकि कृषि क्षेत्र की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड5 Jun 2026, 06:23 PM IST
वैश्विक संकट के बीच भारत की मजबूत छलांग, FY26 में 7.7% बढ़ी अर्थव्यवस्था
वैश्विक संकट के बीच भारत की मजबूत छलांग, FY26 में 7.7% बढ़ी अर्थव्यवस्था

India economy: दुनियाभर में आर्थिक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर मजबूती का परिचय दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि देश की विकास रफ्तार उम्मीद से बेहतर रही।

मार्च तिमाही में 7.8% रही GDP ग्रोथ

सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि यह पिछले तिमाही की 8 प्रतिशत वृद्धि दर से थोड़ी कम है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों के अनुमान से बेहतर रही।

ब्लूमबर्ग द्वारा ट्रैक किए गए विश्लेषकों ने इस तिमाही में 7.3 प्रतिशत GDP वृद्धि का अनुमान लगाया था। ऐसे में वास्तविक आंकड़ा अनुमान से ऊपर रहा, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।

पूरे वित्त वर्ष में भी शानदार प्रदर्शन

सिर्फ चौथी तिमाही ही नहीं, बल्कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन किया। पूरे साल के दौरान GDP में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो बाजार की 7.5 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद से अधिक रही।

यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां बनी हुई थीं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियों ने मजबूती बनाए रखी।

GVA के आंकड़ों ने भी बढ़ाया भरोसा

GDP के साथ-साथ सकल मूल्य वर्धन (GVA) के आंकड़े भी उत्साहजनक रहे। GVA को अर्थव्यवस्था की वास्तविक गतिविधियों का बेहतर पैमाना माना जाता है क्योंकि इसमें अप्रत्यक्ष करों और सब्सिडी का प्रभाव शामिल नहीं होता।

जनवरी-मार्च तिमाही में GVA 7.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि विशेषज्ञों का अनुमान 7.3 प्रतिशत था। इससे संकेत मिलता है कि विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन और आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।

सर्विस सेक्टर ने दिखाई सबसे ज्यादा रफ्तार

मार्च तिमाही में सबसे बड़ी ताकत सर्विस और फाइनेंशियल सेक्टर से आई। व्यापार, होटल, परिवहन और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों ने शानदार प्रदर्शन किया। यह सेक्टर सालाना आधार पर 12.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो सभी प्रमुख क्षेत्रों में सबसे ज्यादा रही। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन, यात्रा और उपभोक्ता खर्च में बढ़ोतरी ने इस क्षेत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वित्त और रियल एस्टेट सेक्टर भी रहे आगे

सेवा क्षेत्र के बाद वित्तीय सेवाएं और रियल एस्टेट सेक्टर भी तेजी से बढ़े। मार्च तिमाही में इस क्षेत्र की वृद्धि दर 10.4 प्रतिशत रही।

इस प्रदर्शन के पीछे मजबूत कर्ज मांग, कंपनियों की अच्छी कमाई और शहरी क्षेत्रों में स्थिर उपभोग को प्रमुख कारण माना जा रहा है। ऊंची ब्याज दरों के बावजूद इन क्षेत्रों में गतिविधियां मजबूत बनी रहीं।

मैन्युफैक्चरिंग और निर्माण क्षेत्र ने संभाला मोर्चा

औद्योगिक क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। यह संकेत है कि वैश्विक सप्लाई चेन में आई चुनौतियों और बढ़ती लागत के असर को उद्योग काफी हद तक संभालने में सफल रहा है। वहीं निर्माण (Construction) क्षेत्र भी अर्थव्यवस्था का प्रमुख इंजन बना रहा। सरकारी पूंजीगत खर्च और मजबूत हाउसिंग मार्केट के दम पर इस सेक्टर में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

कृषि क्षेत्र की रफ्तार रही धीमी

जहां अधिकांश क्षेत्रों ने अच्छा प्रदर्शन किया, वहीं कृषि क्षेत्र अपेक्षाकृत कमजोर रहा। जनवरी-मार्च तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर केवल 3.6 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों के अनुसार अनियमित मौसम और मानसून को लेकर बनी अनिश्चितताओं का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि गतिविधियों पर पड़ा है। यही वजह है कि कृषि क्षेत्र अन्य सेक्टरों की तुलना में पीछे रहा।

मार्च तिमाही में सार्वजनिक प्रशासन और रक्षा क्षेत्र की वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत रही। वहीं खनन क्षेत्र 5.4 प्रतिशत बढ़ा। बिजली और गैस क्षेत्र में 4.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

RBI के लिए राहत भरी खबर

GDP के उम्मीद से बेहतर आंकड़े नीति निर्माताओं के लिए राहत लेकर आए हैं। यह आंकड़े ऐसे समय आए हैं जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी रेपो दर 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। मजबूत आर्थिक वृद्धि यह संकेत देती है कि देश की विकास दर अभी भी मजबूत आधार पर खड़ी है। इससे RBI को आयातित महंगाई जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए मौद्रिक नीति पर ध्यान केंद्रित रखने की अतिरिक्त गुंजाइश मिल सकती है।

चुनौतियों के बीच मजबूत बनी भारतीय अर्थव्यवस्था

ताजा GDP आंकड़े यह दिखाते हैं कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। सेवा क्षेत्र, वित्तीय गतिविधियों और निर्माण क्षेत्र की मजबूत रफ्तार ने विकास को सहारा दिया है। हालांकि कृषि क्षेत्र की धीमी वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा है और यह आने वाले महीनों के लिए सकारात्मक संकेत देता है।

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