भारत बनाएगा क्रिटिकल मिनरल्स का राष्ट्रीय भंडार, एक्सपोर्ट बैन लगाकर भी कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा चीन

India rare earth reserve: चीन के रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर एक्सपोर्ट बैन के जवाब में भारत 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल स्टॉकपाइल' बना रहा है। इसका मकसद ग्रीन टेक्नोलॉजी के लिए सप्लाई सुनिश्चित करना और प्राइवेट सेक्टर की मदद से दो महीने का रिजर्व तैयार करना है।

Naveen Kumar Pandey
पब्लिश्ड15 Oct 2025, 09:55 PM IST
दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का भंडार तैयार करेगा भारत (AI Image)
दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का भंडार तैयार करेगा भारत (AI Image)(Gemini)

National Critical Mineral Stockpile: केंद्र सरकार देश में रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल स्टॉकपाइल' (NCMS) नाम का एक खास प्रोग्राम शुरू करने की तैयारी में है। यह फैसला चीन की ओर से रेयर अर्थ मैग्नेट के एक्सपोर्ट पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद आया है, जिससे पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इस प्रोग्राम का मकसद भारत को भविष्य के लिए तैयार करना है।

NCMS की क्यों पड़ी जरूरत?

चीन ने हाल ही में रेयर अर्थ मैग्नेट के एक्सपोर्ट पर कुछ पाबंदियां लगा दी थीं। ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक गाड़ियों, विंड टर्बाइन और दूसरी ग्रीन टेक्नोलॉजी के लिए बहुत जरूरी होते हैं। चीन के इस कदम से ग्लोबल सप्लाई चेन पर असर पड़ा है। इसी को देखते हुए भारत सरकार ने यह प्रोग्राम बनाने का फैसला किया है ताकि देश में इन जरूरी खनिजों की कोई कमी न हो।

यह भी पढ़ें | चीन ने अचानक रोकी ईवी के पुर्जे वाले चुंबकों की सप्लाई, सरकार ने की यह प्लानिंग

रेयर अर्थ मिनरल्स पर क्या है सरकार का पूरा प्लान?

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस प्रोग्राम के तहत दो महीने का रेयर अर्थ एलिमेंट्स का स्टॉक बनाया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि इस काम में प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों की भी भागीदारी हो। शुरुआत में फोकस सिर्फ रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर होगा, लेकिन बाद में दूसरे जरूरी खनिजों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

घरेलू उत्पादन पर भी है जोर

यह प्रोग्राम सरकार की उस कोशिश का हिस्सा है, जिसके तहत देश में रेयर अर्थ मैग्नेट का उत्पादन बढ़ाया जाना है। इससे पहले एक अंतर-मंत्रालयी पैनल ने देश में रेयर अर्थ मैग्नेट के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 7,300 करोड़ रुपये की इंसेंटिव स्कीम को मंजूरी दी थी। इस स्कीम का लक्ष्य अगले पांच साल में 6,000 टन मैग्नेट का उत्पादन करना है। इसके अलावा, नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के तहत सप्लाई में किसी भी रुकावट से बचने के लिए 500 करोड़ रुपये का फंड भी रखा गया है।

यह भी पढ़ें | चीन ने दो महीने से रोकी फर्टिलाइजर की सप्लाई, जानिए भारत पर क्या होगा इसका असर

भारत के सामने चुनौतियां और मौके

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्टॉक बनाना बहुत जरूरी है, लेकिन भारत के सामने एक बड़ी चुनौती भी है। हमारे पास घरेलू भंडारों से रेयर अर्थ निकालने की टेक्नोलॉजी अभी सीमित है। इस वजह से फिलहाल ज्यादातर सप्लाई इम्पोर्ट के जरिए पूरी होती है। हालांकि, भारत के पास अवसर भी बड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक, देश में 72.3 लाख टन रेयर अर्थ ऑक्साइड का भंडार है, जो 1.31 करोड़ टन मोनाजाइट में मौजूद है। यह भंडार आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में फैला है।

यह भी पढ़ें | मेक इन इंडिया को बूस्ट, देश में ही लगेगी पानी के बड़े जहाज बनाने की इंडस्ट्री

मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी तेज

सरकार देश में खनन को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रही है। खान मंत्रालय अब तक पांच चरणों में 55 क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी कर चुका है। इनमें से 34 ब्लॉक्स को सफलतापूर्वक आवंटित भी कर दिया गया है। पिछले महीने ही सरकार ने अतिरिक्त ब्लॉक्स के लिए नीलामी के छठे चरण की शुरुआत की है।

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़Businessभारत बनाएगा क्रिटिकल मिनरल्स का राष्ट्रीय भंडार, एक्सपोर्ट बैन लगाकर भी कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा चीन
More
बिजनेस न्यूज़Businessभारत बनाएगा क्रिटिकल मिनरल्स का राष्ट्रीय भंडार, एक्सपोर्ट बैन लगाकर भी कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा चीन