
भारत में नेशनल हाईवे से होने वाली टोल वसूली आने वाले सालों में नया रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रही है। सरकारी अनुमानों के मुताबिक FY27 में टोल कलेक्शन पहली बार 1,00,000 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है। इसकी बड़ी वजह हाई-स्पीड कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे का तेजी से विस्तार और टोल वसूली के सिस्टम में बड़ा तकनीकी बदलाव है। बता दें कि FY25 में टोल से जहां 61,408 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी, वहीं FY26 में इसके करीब 25 पर्सेंट बढ़कर 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। मजबूत आर्थिक ग्रोथ और ट्रैफिक में लगातार बढ़ोतरी इस तेजी को और रफ्तार दे रही है।
सरकार का मानना है कि सिर्फ गाड़ियों की संख्या बढ़ने से ही नहीं, बल्कि नई टेक्नोलॉजी से भी टोल कलेक्शन में बड़ा उछाल आएगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) साल 2026 के अंत तक देशभर में सैटेलाइट बेस्ड मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोल सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। इससे टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत खत्म होगी और लीकेज भी कम होगा। अधिकारियों के मुताबिक, इस सिस्टम से हर साल कम से कम 6,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है।
टोल कलेक्शन में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हो रही है जब केंद्र सरकार एक बार फिर Build-Operate-Transfer (BOT) मॉडल पर जोर दे रही है। सरकार चाहती है कि टोल से मिलने वाली स्थिर आमदनी के जरिए NHAI की बजट पर निर्भरता कम की जाए और उसी पैसे को नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में लगाया जाए। आने वाले साल में 10,000 से 12,000 किलोमीटर नई हाईवे और एक्सप्रेसवे के चालू होने से 200 से 300 नए टोल प्लाजा बनने की उम्मीद है। फिलहाल देश में 1,087 टोल प्लाजा ऑपरेशनल हैं जिनमें से 387 प्राइवेट और 700 सरकारी हैं।
कुछ एक्सपर्ट FY27 में ही 1,00,000 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा छूने को लेकर थोड़ा सतर्क नजर आ रहे हैं। रेटिंग एजेंसी ICRA का मानना है कि FY26 में टोल कलेक्शन करीब 70,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। बावजूद इसके, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि टोल वसूली में लगातार बढ़ोतरी मजबूत लॉजिस्टिक्स, बढ़ती माल ढुलाई और स्थिर आर्थिक रफ्तार का संकेत है। कुल मिलाकर, हाईवे नेटवर्क के विस्तार और टेक्नोलॉजी के दम पर भारत का टोल सिस्टम अब ज्यादा मजबूत और आत्मनिर्भर होता दिख रहा है।
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