ट्रैक्टर उद्योग में तेज रफ्तार, क्या भारत-अमेरिका डील से मिलेगा नया बूस्ट?

एस्कॉर्ट्स कुबोटा का मानना है कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता ट्रैक्टर निर्यात के लिए नया मौका दे सकता है। कंपनी 2030 की योजना में भारत को ग्रोथ इंजन बनाने पर फोकस कर रही है। घरेलू बाजार में भी ट्रैक्टर उद्योग तेज रफ्तार से बढ़ रहा है।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड15 Feb 2026, 01:46 PM IST
ट्रैक्टर उद्योग में तेज रफ्तार, क्या भारत-अमेरिका डील से मिलेगा नया बूस्ट?
ट्रैक्टर उद्योग में तेज रफ्तार, क्या भारत-अमेरिका डील से मिलेगा नया बूस्ट?

भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर अब उद्योग जगत में हलचल तेज हो गई है। खेती और निर्माण उपकरण बनाने वाली कंपनी एस्कॉर्ट्स कुबोटा का मानना है कि यह समझौता अमेरिका को ट्रैक्टर निर्यात के लिए एक नया दरवाजा खोल सकता है। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने साफ कहा है कि मौजूदा हालात में अमेरिका का बाजार दोबारा खंगालने का यह सही समय हो सकता है।

अभी नहीं हो रहा निर्यात, लेकिन सोचने का सही वक्त

एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक और भारत में मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) भरत मदान ने कहा, ''अभी हम अमेरिका को निर्यात नहीं कर रहे हैं। हमें लगता है कि अब शुल्क लगने से, शायद हमें उस बाजार को फिर से खोलने पर विचार करने का अच्छा मौका मिलेगा।'' वे भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के असर पर एक सवाल का जवाब दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि अभी मूल कंपनी जापान से अमेरिका को निर्यात कर रही है, जहां करीब 15 प्रतिशत शुल्क लगता है। वहीं भारत पर यह शुल्क लगभग 18 प्रतिशत है। उनके मुताबिक दोनों में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है, ऐसे में अगर भारत में ट्रैक्टर बनाकर निर्यात किया जाए तो यह एक बेहतर विकल्प बन सकता है।

2030 की रणनीति: भारत बनेगा ग्रोथ इंजन

कंपनी की जापानी मूल की कंपनी कुबोटा कॉरपोरेशन ने अपनी 2030 की मध्यम अवधि की कारोबारी योजना में भारत को अहम भूमिका दी है। लक्ष्य यह है कि भारत को शोध एवं विकास, खरीद और उत्पादन का एक वैश्विक केंद्र बनाया जाए।

इसके साथ ही समूह की लागत प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी फोकस रहेगा। साफ है कि कंपनी भारत को भविष्य की वृद्धि का आधार मानकर आगे बढ़ रही है।

यूरोप के बाजार पर क्या असर?

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भरत मदान ने कहा कि ट्रैक्टर पर पहले से ही शुल्क शून्य है, इसलिए कंपनी को इस क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत से यूरोप को ट्रैक्टर का निर्यात पहले से ही काफी ज्यादा है।

घरेलू बाजार में रिकॉर्ड रफ्तार

घरेलू बाजार की बात करें तो ट्रैक्टर उद्योग में तेजी देखी जा रही है। जीएसटी दरों में कटौती के बाद मांग में बढ़ोतरी आई है। तीसरी तिमाही में ट्रैक्टर उद्योग ने 23 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है।

मदान के मुताबिक मार्च तिमाही में उद्योग 30-35 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है और यह रफ्तार जुलाई-अगस्त तक बनी रहने की संभावना है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता ट्रैक्टर उद्योग के लिए एक संभावित अवसर के रूप में देखा जा रहा है। अगर रणनीति सही रही और उत्पादन भारत से बढ़ा, तो निर्यात के नए रास्ते खुल सकते हैं। आने वाले महीनों में कंपनी और बाजार की दिशा काफी कुछ साफ कर देगी।

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