India-US trade deal: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बड़ा और अहम मोड़ आता दिख रहा है। दोनों देशों के बीच जिस अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति बनी है, उससे भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे और ज्यादा खुलने वाले हैं। खास बात यह है कि इस समझौते से भारत के अरबों डॉलर के निर्यात पर सीधा फायदा मिलने जा रहा है।
44 अरब डॉलर के निर्यात पर जीरो शुल्क
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कहा है कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के तहत अमेरिका को होने वाले करीब 44 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर शून्य जवाबी शुल्क लगेगा। इस समझौते पर मार्च के मध्य तक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
शुल्क घटेंगे, व्यापार बढ़ेगा
भारत और अमेरिका इस बात पर सहमत हुए हैं कि एक अंतरिम ट्रेड डील के जरिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम किया जाएगा। इसके तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर शुल्क को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। वहीं भारत भी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और खाद्य व कृषि उत्पादों की एक बड़ी सूची पर आयात शुल्क खत्म या कम करेगा।
किन अमेरिकी उत्पादों को मिलेगी राहत
इस समझौते के तहत सूखे अनाज, पशु आहार में इस्तेमाल होने वाला लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट जैसे कई उत्पाद शामिल हैं। भारत ने इन पर शुल्क घटाने या हटाने का फैसला किया है, ताकि द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिले।
कुछ वस्तुओं पर शुल्क जस का तस
लगभग 30 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर 18 प्रतिशत शुल्क बना रहेगा, जिसमें श्रम-प्रधान सेक्टर के उत्पाद शामिल हैं। वहीं 12 अरब डॉलर की वस्तुओं, जैसे इस्पात, तांबा और कुछ वाहन पुर्जों पर शुल्क में कोई बदलाव नहीं होगा। इन पर अमेरिका सभी देशों से समान रूप से ऊंचा शुल्क लेता है, इसलिए भारत की प्रतिस्पर्धा पर इसका अलग से असर नहीं पड़ेगा।
कपड़ा और चमड़ा सेक्टर को तगड़ा फायदा
गोयल के मुताबिक शुल्क में कटौती से कपड़ा, परिधान, चमड़ा और जूते-चप्पल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के निर्यात को तुरंत बढ़ावा मिलेगा। यह अंतरिम समझौता आगे चलकर प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की पहली किस्त बनेगा।
2030 का बड़ा लक्ष्य: 500 अरब डॉलर का व्यापार
सरकार का मानना है कि यह समझौता 2030 तक भारत-अमेरिका के बीच 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा। गोयल ने इसे “निष्पक्ष, संतुलित और न्यायसंगत” करार दिया है।
किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
इस डील से MSME, किसान, मछुआरे, महिलाएं और युवा उद्यमियों के लिए नए मौके खुलेंगे। जेनेरिक दवाएं, विमान के पुर्जे, वाहन घटक जैसे कई भारतीय उत्पाद अमेरिका में शून्य शुल्क पर जा सकेंगे। पीयूष गोयल ने कहा कि इससे किसानों और मछुआरों को अमेरिकी बाजार में अपनी उपज की बेहतर कीमत पाने में मदद मिलेगी और भविष्य में कपड़ा और परिधान, रत्न और आभूषण, मशीनरी के पुर्जे, खिलौने, चमड़ा और जूते-चप्पल, घरेलू सजावट, स्मार्टफोन और कृषि के कई क्षेत्रों में भारी वृद्धि होगी।
कृषि और डेयरी पर कोई समझौता नहीं
उन्होंने आगे कहा कि भारत ने संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा है और उन क्षेत्रों में कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। इनमें कृषि उत्पाद, मांस, पोल्ट्री, सभी डेयरी उत्पाद, जीएम खाद्य उत्पाद, सोया मील, मक्का, अनाज, मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, चौलाई, फल जैसे केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी और खट्टे फल शामिल हैं। अन्य उत्पादों में हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, कुछ पशु आहार, मूंगफली, शहद, माल्ट और इसके अर्क, गैर-अल्कोहल पेय, आटा, स्टार्च, आवश्यक तेल, ईंधन के लिए एथनॉल और तंबाकू शामिल हैं।
निर्यात के लिए खुलेंगे नए रास्ते
यह समझौता भारत के निर्यातकों के लिए अमेरिका में बड़े मौके लेकर आ सकता है। सरकार को उम्मीद है कि इससे रोजगार, आय और वैश्विक बाजार में भारत की पकड़ तीनों मजबूत होंगी।