भारत-EU डील: यूरोपीय कारों पर 100% घटा टैरिफ, अब BMW-Mercedes जैसी कारें होंगी सस्ती

करीब 20 साल की लंबी बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आखिरकार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) फाइनल हो गया है। इस डील को खासतौर पर ऑटो इंडस्ट्री के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है।

Ashutosh Kumar
पब्लिश्ड27 Jan 2026, 05:53 PM IST
यूरोपीय कारों पर घटा टैरिफ
यूरोपीय कारों पर घटा टैरिफ

करीब 18 साल की लंबी बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आखिरकार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) फाइनल हो गया है। इस डील को खासतौर पर ऑटो इंडस्ट्री के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। दरअसल, अब यूरोप से आने वाली कारों पर लगने वाला भारी-भरकम 110 पर्सेंट इम्पोर्ट टैरिफ अब घटकर सिर्फ 10 पर्सेंट रह जाएगा। हालांकि, यह राहत पूरी तरह खुली नहीं है, बल्कि कुछ शर्तों के साथ दी गई है। फिर भी, इससे भारतीय कार बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे विदेशी कारों को लेकर ग्राहकों की दिलचस्पी और बढ़ेगी।

कोटा हासिल करने की लगेगी होड़

FTA के तहत भारत हर साल 2.5 लाख यूरोपीय कारों को ही कम टैक्स दर पर आयात करने की अनुमति देगा। यानी फायदा मिलेगा, लेकिन सीमित संख्या में। इसका मतलब यह है कि सभी यूरोपीय कारें एक साथ सस्ती नहीं हो जाएंगी, बल्कि तय कोटे के भीतर आने वाले मॉडल्स पर ही कम ड्यूटी लगेगी। इससे जहां लग्जरी और प्रीमियम कारों की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं, कंपनियों के बीच इस कोटे को हासिल करने की होड़ भी तेज हो सकती है। इस बीच सरकार का मकसद खुला बाजार के साथ घरेलू इंडस्ट्री का संतुलन भी साधना है।

इलेक्ट्रिक कारों पर कोई छूट नहीं

इस डील की एक अहम बात यह भी है कि इलेक्ट्रिक कारों (EVs) को कोई टैक्स छूट नहीं दी गई है। यानी यूरोप से आने वाली इलेक्ट्रिक कारें फिलहाल पहले जितनी ही महंगी रहेंगी। माना जा रहा है कि यह फैसला देश की घरेलू EV इंडस्ट्री को संरक्षण देने के लिए लिया गया है, ताकि लोकल मैन्युफैक्चरिंग को झटका न लगे। दूसरी तरफ, फॉक्सवैगन, रेनो, स्टेलॉन्टिस, मर्सिडीज-बेंज और BMW जैसी यूरोपीय कंपनियों को इस समझौते से बड़ा फायदा हो सकता है। ये कंपनियां भारत में पहले से मौजूद हैं, लेकिन ज्यादा टैक्स की वजह से इम्पोर्टेड मॉडल्स सीमित संख्या में ही ला पाती थीं।

गेमचेंजर हो सकती है डील

अगर बड़े परिप्रेक्ष्य में देखें, तो यह FTA सिर्फ कारों तक सीमित नहीं है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-EU का कुल व्यापार 136 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 76 अरब डॉलर और आयात 60 अरब डॉलर था। EU पहले ही भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। ऐसे समय में, जब अमेरिका टैरिफ बढ़ा रहा है और चीन पर एक्सपोर्ट कंट्रोल सख्त हो रहे हैं, भारत और EU दोनों नए मौके तलाश रहे हैं। ऑटो सेक्टर में यह डील भारत के बढ़ते बाजार को और मजबूत कर सकती है।

(फोटो क्रेडिट- ChatGPT)

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