
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हाल ही में फाइनल हुई फ्री ट्रेड डील भारत के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकती है। करीब 20 साल चली लंबी बातचीत के बाद यह समझौता न सिर्फ बड़े कारोबारियों के लिए बल्कि आम लोगों के लिए भी फायदे का सौदा है। EU सिर्फ 27 देशों का एक ट्रेड ब्लॉक नहीं है, बल्कि यह टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, फार्मा, फैशन और ग्रीन एनर्जी में दुनिया का बड़ा केंद्र माना जाता है। इस डील के जरिए भारत को यूरोप में अपने उत्पादों के लिए बेहतर पहुंच मिलेगी। वहीं, यूरोप को भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार में निवेश और सेल का मौका मिलेगा।
बता दें कि EU में कुल 27 देश शामिल हैं। इनमें ऑस्ट्रिया (वियना), बेल्जियम (ब्रुसेल्स), बुल्गारिया (सोफिया), क्रोएशिया (जाग्रेब), साइप्रस (निकोसिया), चेक गणराज्य (प्राग), डेनमार्क (कोपेनहेगन), एस्टोनिया (टालिन), फिनलैंड (हेलसिंकी), फ्रांस (पेरिस), जर्मनी (बर्लिन), ग्रीस (एथेंस), हंगरी (बुडापेस्ट), आयरलैंड (डबलिन), इटली (रोम), लातविया (रीगा), लिथुआनिया (विलनियस), लक्ज़मबर्ग (लक्ज़मबर्ग सिटी), माल्टा (वैलेटा), नीदरलैंड्स (एम्स्टर्डम), पोलैंड (वारसॉ), पुर्तगाल (लिस्बन), रोमानिया (बुखारेस्ट), स्लोवाकिया (ब्रातिस्लावा), स्लोवेनिया (लुब्लियाना), स्पेन (मैड्रिड) और स्वीडन (स्टॉकहोम) शामिल हैं।
हर देश की अपनी खास पहचान है। जर्मनी की कारें और मशीनरी विश्व प्रसिद्ध हैं। बता दें कि BMW, Mercedes और Volkswagen यहां से आती हैं। फ्रांस फैशन, कॉस्मेटिक्स और एयरक्राफ्ट (Airbus) के लिए जाना जाता है। इटली अपने लेदर प्रोडक्ट्स और लग्जरी कारों के लिए मशहूर है। स्पेन और ग्रीस फूड प्रोसेसिंग, ऑलिव ऑयल और टूरिज्म में आगे हैं। नीदरलैंड्स लॉजिस्टिक्स और पोर्ट्स के लिए जाना जाता है, जबकि स्वीडन और फिनलैंड ग्रीन एनर्जी और टेक्नोलॉजी में बेहतर हैं।
भारत के लिए यह डील एक बड़ी अवसर की खिड़की खोलती है। फार्मा, टेक्सटाइल, आईटी, ऑटो पार्ट्स, स्टील और एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट यूरोप में बढ़ सकता है। वहीं, आम लोगों को यूरोपियन ब्रांड्स और प्रोडक्ट्स सस्ते दामों में मिलने की संभावना है। बता दें कि BMW, Mercedes जैसी लग्जरी कारों पर टैक्स कम होने से भारत में यह मॉडल्स अधिक सुलभ हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, यह डील सिर्फ ट्रेड पार्टनरशिप तक सीमित नहीं है। यह भारत और EU के बीच निवेश, टेक्नोलॉजी और कारोबारी सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकती है। EU के 27 देशों की विविधता और विशेषज्ञता भारत के लिए बड़े आर्थिक और व्यावसायिक अवसर लेकर आएगी। आने वाले सालों में इस समझौते से भारत के ऑटो, फार्मा, टेक्सटाइल और हाई-टेक सेक्टर को नई दिशा और मजबूती मिलेगी, जिससे ग्रोथ और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
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