Explained: India-EU FTA पर आज नहीं होंगे साइन, आखिर 'मदर ऑफ ऑल डील्स' क्यों कहा गया? जानिए डिटेल

India-EU FTA: भारत और EU ने 27 जनवरी को अपने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को फाइनल कर दिया, जो दोनों इकोनॉमी के बीच सबसे बड़ा समझौता है। इस समझौते का मकसद ग्लोबल चुनौतियों के बीच संबंधों को मज़बूत करना है और यह अगले साल से लागू हो सकता है।

Jitendra Singh( विद इनपुट्स फ्रॉम लाइवमिंट.कॉम)
अपडेटेड27 Jan 2026, 06:12 PM IST
India-EU FTA: यह बातचीत साल 2007 में शुरू हुई थी और 18 साल बाद खत्म हुई।
India-EU FTA: यह बातचीत साल 2007 में शुरू हुई थी और 18 साल बाद खत्म हुई। (Livemint)

India-EU FTA: भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच 18 साल की लंबी बातचीत के बाद मंगलवार को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हो गया है। भारत और यूरोपियन यूनियन के नेताओं ने मंगलवार को 16वें भारत-EU समिट के दौरान इसका ऐलान किया। इस प्रस्तावित FTA को "सभी डील्स की जननी" यानी 'मदर ऑफ ऑल डील्स' भी कहा जा रहा है। यह दोनों पक्षों के बीच अब तक का सबसे बड़ा ट्रेड समझौता है। इस डील के बाद भारत में यूरोपीय कारें जैसे कि BMW, मर्सिडीज पर लगने वाले टैक्स को 110% से घटाकर 10% कर दिया जाएगा।

EU के ऑफिशियल बयान के अनुसार, उम्मीद है कि यह डील बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव और ग्लोबल आर्थिक चुनौतियों के बीच दुनिया की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को मज़बूत करेगी। यह डील ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रेडिंग पार्टनर्स पर टैरिफ लगाए हैं। ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल दोनों देशों के ट्रेड डील के बीच भारत पर 50% टैरिफ लगाया था।

ट्रेड डील पर अभी तक नहीं हुए हस्ताक्षर

खास बात यह है कि इस डील पर अभी तक आधिकारिक तौर पर साइन नहीं हुए हैं। मंगलवार, 27 जनवरी को भारत और EU ने अपने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की बातचीत पूरी होने और फाइनल होने की घोषणा की है। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, उम्मीद है कि इस एग्रीमेंट पर इस साल के आखिर में साइन हो जाएंगे। कहा जा रहा है कि अभी समझौता लीगल स्क्रबिंग के दौर में है। इस समीक्षा के बाद इसे फिर से अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार अंतिम रूप दिया जाएगा। फिर दोनों पक्षों की आंतरिक मंजूरी के बाद ही आगे की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी।

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हस्ताक्षर और लागू होने की प्रक्रिया

FTA के टेक्स्ट का अंतिम रूप देने के बाद दोनों पक्ष आगे हस्ताक्षर करेंगे। उसके बाद यह समझौता EU संसद और भारत की संसद/केबिनेट से मंजूरी के लिए जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रक्रिया कुछ महीनों तक चल सकती है और समझौता 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में लागू हो सकता है।

भारत-ईयू FTA कब लागू होगा?

यह प्रस्तावित समझौता अगले साल की शुरुआत में लागू हो सकता है। FTA बातचीत 2007 में शुरू हुई थी और 18 साल बाद पूरी हुई है।

आज क्या हुआ?

भारत और EU ने फ्री ट्रेड डील पर बातचीत सफलतापूर्वक समाप्त कर दी है। इस समझौते को दोनों पक्ष “मदर ऑफ ऑल डील्स” भी कह रहे हैं क्योंकि यह भारत के लिए सबसे बड़ा व्यापार समझौता माना जा रहा है।

पीएम मोदी ने दिया बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन की हैदराबाद हाउस में मुलाकात की। इस दौरान डील का ऐलान किया गया। संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ हुए नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को भारत के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे अहम व्यापार समझौता बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-EU ट्रेड डील को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि “आज का दिन हमेशा के लिए याद रखा जाएगा और हमारे साझा इतिहास में अमिट रूप से दर्ज हो जाएगा।

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मदर ऑफ ऑल डील क्यों कहा जा रहा?

दुनिया अमेरिका और चीन के विकल्प ढूंढ रही है। ऐसे में यह डील भारत को चीन की जगह बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बना सकती है और यूरोप के साथ व्यापार तेजी से बढ़ा सकती है। पिछले साल भारत-EU का व्यापार 12.5 लाख करोड़ रुपए रहा था। FTA के बाद दोनों देशों को एक-दूसरे के बाजारों में ज्यादा पहुंच मिलेगी और व्यापार के दोगुना होने की उम्मीद है। इस वजह से इसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है।

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