
India-EU Trade Deal: भारत में अब यूरोप से इम्पोर्ट होने वाली कारें सस्ती हो जाएंगी। भारत सरकार ने यूरोप से आने वाली कारों पर लगने वाले इम्पोर्ट ड्यूटी को 110% से घटाकर 10% कर दिया है। हालांकि, सरकार ने इसके लिए 2.5 लाख गाड़ियों की सालाना लिमिट तय की गई है। ये फैसला भारत और यूरोपियन यूनियन के हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का हिस्सा है। इस एग्रीमेंट का ऐलान आज (27 जनवरी 2026) भारत-EU समिट में किया गया है। करीब 20 साल चली लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने इस समझौते को अंतिम रूप दिया है।
मौजूदा समय में नई दिल्ली में 40,000 डॉलर से कम कीमत वाली इम्पोर्टेड पैसेंजर गाड़ियों पर 70% ड्यूटी लगाती है। वहीं अगर कार की कीमत 40,000 डॉलर से ज्यादा है तो 110% ड्यूटी पहुंच जाती है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक इस समझौते को 2027 में लागू किए जाने की संभावना है। हालांकि, FTA डील के तहत इलेक्ट्रिक गाड़ियों को कोई राहत नहीं दी गई है।
भारत और यूरोपीय यूनियन की और से जारी प्रेस स्टेटमेंट के अनुसार, कारों पर टैरिफ धीरे-धीरे 110% से घटाकर 10% तक लाया जाएगा। जिससे यूरोपीय कंपनियां जैसे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और BMW हाई-एंड या स्पेशल मॉडल्स भारतीय बाजार में सस्ते हो जाएंगे। कम टैरिफ की वजह से फॉक्सवैगन, रेनॉल्ट और स्टेलेंटिस जैसे यूरोपियन ऑटोमेकर्स के साथ-साथ मर्सिडीज-बेंज और BMW जैसी लग्जरी कंपनियों को भी फायदा होगा, जो भारत में लोकल लेवल पर कारें बनाती हैं, लेकिन ऊंचे टैरिफ की वजह से एक हद से ज़्यादा ग्रोथ करने में उन्हें मुश्किल हो रही थी। बता दें कि भारत में मर्सिडीज बेंज और BMW की ज्यादातर पॉपुलर कारें पहले से ही लोकल असेंबली के जरिए बनती हैं। यानी पार्ट्स इम्पोर्ट करके यहां जोड़कर बनाई जाती हैं।
बिक्री के मामले में भारत इस समय अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार मार्केट है। हालांकि EU मैन्युफैक्चरर्स का भारत के 44 लाख यूनिट सालाना कार बिक्री वाले बाजार में शेयर 4% से कम है। इसके बावजूद भारत ने अपने ऑटो सेक्टर को काफी सुरक्षित (प्रोटेक्टेड) रखा हुआ था। हाई टैक्स की वजह से विदेशी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में अपनी महंगी कारें बेचना मुश्किल होता था। अब इस डील के बाद मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियों के लिए भारत में अपना दायरा बढ़ाना आसान हो जाएगा।
इस डील के तहत EU के एल्कोहल पर टैरिफ घटकर 40% होगा। EU के बीयर पर टैरिफ घटकर 50% होगा। EU के ऑलिव ऑयल पर टैरिफ पूरी तरह खत्म होगा। EU के खाद्य तेल पर भी टैरिफ पूरी तरह खत्म होगा। EU के फ्रूट जूस और प्रोसेस्ड फूड पर टैरिफ हटाया जाएगा। EU से भारत को 50 Cr यूरो का सपोर्ट मिलेगा। EU ग्रीन हाउस गैस एमिशन घटाने में मदद करेगा। भारत-EU में सिक्योरिटी और डिफेंस को लेकर भी करार हुआ है। इस डील के जरिए EU के 96.6% प्रोडक्ट्स पर टैरिफ घटे हैं या फिर खत्म हुए हैं।
जानकारों का कहना है कि भारत का कार बाजार साल 2030 तक बढ़कर 60 लाख यूनिट सालाना तक पहुंच सकता है। इसी संभावना को देखते हुए कई यूरोपीय कंपनियां भारत में नए निवेश की तैयारी कर रही हैं। रेनो भारत में नई रणनीति के साथ वापसी कर रही है, जबकि वोक्सवैगन समूह अपनी स्कोडा ब्रांड के जरिए निवेश के अगले चरण को अंतिम रूप दे रही है।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) या मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच एक समझौता होता है। इसके तहत, देश एक-दूसरे पर लगने वाले आयात शुल्क (Import Duty) को या कम कर देते हैं या हटा देते हैं। टैक्स कम करने के अलावा कोटा, लाइसेंसिंग भी कम की जाती है ताकि व्यापार संबंधी बाधाओं को कम किया जा सके। FTA से नए-नए बाजारों में कंपनियों की पहुंच बढ़ती है। कारोबार सस्ता होता है, व्यापार बढ़ता है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
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