भारत-EU डील से ऑटो सेक्टर में हलचल! इन शेयरों पर रहेगी नजर; जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के संभावित फ्री ट्रेड डील की खबर ने ऑटो सेक्टर में हलचल मचा दी है। इसे देखते हुए मंगलवार, 27 जनवरी को ट्रेडिंग सेशन में टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसे भारतीय ऑटो शेयरों पर नजर रहेगी।

Ashutosh Kumar
पब्लिश्ड27 Jan 2026, 03:45 PM IST
ऑटो शेयर
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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के संभावित फ्री ट्रेड डील की खबर ने ऑटो सेक्टर में हलचल मचा दी है। इसे देखते हुए मंगलवार, 27 जनवरी को ट्रेडिंग सेशन में टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसे भारतीय ऑटो शेयरों पर नजर रहेगी। खबर है कि भारत, यूरोप से आयात होने वाली कारों पर लगने वाले टैरिफ को 110 पर्सेंट से घटाकर 40 पर्सेंट करने की तैयारी में है। इसका मतलब अब यूरोपीय लक्जरी ब्रांड जैसे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू भारतीय बाजार में किफायती दामों में अपनी गाड़ियां बेच सकेंगे। वहीं, स्थानीय कंपनियों को लक्जरी सेगमेंट में इस नए मुकाबले का सामना करना पड़ सकता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट सीमा श्रीवास्तव के अनुसार, “भारत का EU कारों पर आयात शुल्क कम करने का फैसला ऑटो सेक्टर में हलचल पैदा करेगा। यूरोपीय लक्जरी ब्रांड्स जैसे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू किफायती कीमतों में अपनी कारें बेचकर लाभ उठा सकते हैं। स्थानीय डीलरशिप और सर्विस प्रोवाइडर्स को भी फायदा मिलेगा। हालांकि, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी घरेलू कंपनियों को लक्जरी सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।”

यूरोपीय कंपनियों को मिलेगा फायदा

आयात शुल्क कम होने से यूरोपीय कंपनियों को ज्यादा विकल्प और किफायती दामों में गाड़ियां लाने का मौका मिलेगा। मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियों को भारत में पहले से प्रोडक्शन है, लेकिन ऊंचे टैरिफ की वजह से उनका विस्तार धीमा रहा। अब ड्यूटी में कटौती होने से ये ब्रांड्स अपने लक्जरी और प्रीमियम मॉडल भारत में ज्यादा आसानी से बेच पाएंगे।

इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में कटौती नहीं

दूसरी ओर बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) के मामले में अगले पांच सालों तक ड्यूटी कटौती नहीं होगी ताकि स्थानीय निवेशकों के हित सुरक्षित रहें। उसके बाद इलेक्ट्रिक वाहनों को भी समान रियायतें मिलेंगी। टैरिफ कटौती धीरे-धीरे की जाएगी, जिसमें कार की कीमत, इंजन स्पेसिफिकेशन और सालाना कोटा के आधार पर अंतर रखा जाएगा। लक्जरी और प्रीमियम सेगमेंट पहले रियायत का लाभ उठाएगा, जबकि मास मार्केट कारों के लिए यह राहत धीरे-धीरे आएगी।

डिस्क्लेमर: ऊपर दिए गए सुझाव एनालिस्ट या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं। यह मिंट हिंदी की राय नहीं है। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि कोई भी निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से सलाह लें।

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