India-Germany Deal: भारत और जर्मनी कम से कम 8 अरब डॉलर की पनडुब्बी बनाने की डील पर काम कर रहे हैं। यह भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील होगी। जर्मनी भारत के लिए प्रोजेक्ट 75 (I) के तहत 6 अत्याधुनिक स्टील्थ पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण में सहयोग करेगा। इसके लिए मुंबई स्थित मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड (MDL) और जर्मनी की जानी-मानी रक्षा कंपनी थिसेन क्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के बीच पहले ही अहम समझौता हो चुका है। इस मेगा डील को भारतीय नौसेना के इतिहास की सबसे बड़ी पनडुब्बी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।
इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी खासियत इनमें इस्तेमाल होने वाली एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक होगी, जिससे ये लंबे समय तक बिना सतह पर आए समुद्र के भीतर ऑपरेशन को अंजाम दे सकेंगी। बता दें कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सोमवार को गांधीनगर के महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में डेलीगेशन स्तर की बातचीत की, जिसमें भारत-जर्मनी के सहयोग को और बढ़ाने पर जोर दिया गया। यह बैठक दोनों देशों के बीच 25 साल पुरानी रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करने और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से हुई है।
मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा
इन 6 पनडुब्बियों का निर्माण भारत में ही मझगांव डॉकयार्ड में किया जाएगा, जिससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। जर्मनी की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की निर्माण क्षमता का यह मेल भारतीय नौसेना को रणनीतिक बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा। जानकारों का मानना है कि इन स्टील्थ सबमरीन के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री निगरानी, प्रतिरोधक क्षमता और रणनीतिक संतुलन और मजबूत होगा। बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच यह प्रोजेक्ट भारत के डिफेंस सिस्टम को पहले से ज्यादा मजबूत करने में मदद करेगा।
जर्मनी के लिए पसंदीदा पार्टनर है भारत - जर्मन चांसलर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडिया-जर्मनी CEOs फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी अपने संबंधों की प्लेटिनम जुबली और अपनी रणनीतिक साझेदारी की सिल्वर जुबली मना रहे हैं। इसका मतलब है कि हमारे रिश्तों में प्लेटिनम की तरह स्थायित्व और चांदी की तरह चमक दोनों हैं। हमारे MSMEs और जर्मनी के बीच चल रहा मैन्युफैक्चरिंग सहयोग, IT और सेवाओं में तेजी से बढ़ता सहयोग, ऑटोमोटिव, ऊर्जा, मशीनरी और केमिकल सेक्टर में जॉइंट वेंचर और रिसर्च सहयोग से नई टेक्नोलॉजी सामने आ रही हैं। वहीं पीएम मोदी के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा कि भारत जर्मनी के लिए एक पसंदीदा पार्टनर है।
जानिए भारत और जर्मनी के बीच क्या- क्या हुई डील?
भारत और जर्मनी के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों ने आपसी सहयोग को नई ऊंचाई देने के लिए ट्रेड डील समेत कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। भारत और जर्मनी के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर, द्विपक्षीय अर्थव्यवस्था, ग्रीन अमोनिया पर टेक्नोलॉजी एग्रीमेंट और आयुर्वेद से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को लेकर समझौतों का आदान-प्रदान हुआ। पीएम मोदी ने कहा कि ये समझौते भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए गेम चेंजर साबित होंगे। बता दें कि भारत और जर्मनी के बीच 50 अरब डॉलर का कारोबार हो रहा है।