India GDP: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नए साल की शुरुआत अच्छी खबर लेकर आई है। घरेलू मांग में तेजी, महंगाई पर नियंत्रण और बैंकों की मजबूत स्थिति ने देश की रफ्तार को और तेज कर दिया है। आरबीआई की ताजा रिपोर्ट बताती है कि वित्तीय सिस्टम फिलहाल मजबूत है और आगे भी अच्छे संकेत दिख रहे हैं।
वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट का नतीजा
आरबीआई की दिसंबर 2025 की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) कहती है कि बैंकों के मजबूत बहीखाते, अनुकूल हालात और बाजार में कम उतार-चढ़ाव ने सिस्टम को मजबूती दी है। हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार की अनिश्चितता से कुछ जोखिम बने हुए हैं।
अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी और नकदी भंडार है। ऋण की गुणवत्ता सुधरी है और मुनाफा भी बढ़ा है। स्ट्रेस टेस्ट में यह सामने आया कि मुश्किल हालात में भी बैंक नुकसान झेलने में सक्षम हैं।
एनपीए अनुपात सितंबर 2025 में 2.1% था, जो मार्च 2027 तक घटकर 1.9% हो सकता है।
प्रतिकूल परिस्थितियों में यह 3.2% से 4.2% तक बढ़ सकता है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का पूंजी अनुपात 16% और निजी बैंकों का 18.1% रहा।
वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.8% और दूसरी तिमाही में 8.2% रही। निजी खपत और सरकारी खर्च ने इसमें अहम भूमिका निभाई। रिपोर्ट कहती है कि आगे भी ग्रोथ पॉजिटिव रहेगी। कम महंगाई, बेहतर मानसून, टैक्स में कटौती, डिजिटल ढांचे का विस्तार, ये सभी कारक ग्रोथ को सपोर्ट करेंगे।
रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है। वजह है ऊंचे आयात शुल्क और पूंजी प्रवाह में कमी। अमेरिकी शुल्क दर अन्य देशों की तुलना में ज्यादा होने से रुपये पर दबाव बना रहा।
आरबीआई की रिपोर्ट साफ करती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत नींव पर खड़ी है। घरेलू मांग और बैंकों की स्थिति इसे आगे बढ़ा रही है। वैश्विक तनाव और व्यापारिक दबाव चुनौतियां हैं, लेकिन फिलहाल तस्वीर सकारात्मक दिख रही है।