Indian Railways Freight: भारतीय रेलवे ने नवंबर महीने में माल ढुलाई के आंकड़ों में बढ़ोतरी दर्ज की है। इस दौरान रेलवे ने कुल 13.57 करोड़ टन माल का परिवहन किया, जो पिछले साल इसी महीने के 13.02 करोड़ टन की तुलना में 4.2 प्रतिशत ज्यादा है। रेल मंत्रालय के अनुसार यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से कुछ खास वस्तुओं की ढुलाई बढ़ने से हुई है। इसमें पिग आयरन और तैयार स्टील (16 प्रतिशत), लौह अयस्क (9.7 प्रतिशत), उर्वरक (10.6 प्रतिशत), कंटेनर (6.8 प्रतिशत) और अन्य सामान (23.6 प्रतिशत) शामिल हैं।
रेलवे का कहना है कि माल ढुलाई में यह बढ़त देश की औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी आगे बढ़ाने में मदद करेगी। आने वाले महीनों में भी माल परिवहन का यह रुझान जारी रहने की उम्मीद है।
माल ढलाई में हुआ इजाफा
ज्ञात रहे कि नवंबर 2025 तक संचयी आधार पर माल ढुलाई 3.3 प्रतिशत बढ़कर 107.08 करोड़ टन हो गई है। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 के केवल आठ महीनों में 2013-14 के पूरे वर्ष की तुलना में अधिक माल ढुलाई की है। उस वर्ष कुल ढुलाई 1,05.5 करोड़ टन थी।
देश की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक मार्ग में से एक भारतीय रेलवे, अभूतपूर्व पैमाने पर माल और लोगों को ले जाकर, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करके और उद्योगों को तेज़ी से और अधिक टिकाऊ रूप से विकसित करने में सक्षम बनाकर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके साथ ही रेलवे प्रतिदिन दो करोड़ से अधिक यात्रियों को ले जाकर बड़ी और बढ़ती आबादी की गतिशीलता आवश्यकताओं को पूरा कर रही है। इससे भारत के परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ मजबूत हो रही है।
ये निरंतर वृद्धि औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत कर रही है। घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार दोनों को सहारा दे रही है, और एक अधिक टिकाऊ, लागत-कुशल लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान कर रही है। रेल परिवहन की लागत सड़क परिवहन की तुलना में लगभग आधी होने के कारण, इस लागत लाभ का प्रभाव और भी बढ़ जाता है। इससे व्यवसायों के लिए पर्याप्त बचत होती है और व्यापक आर्थिक लाभ होता है।
जैसे-जैसे अधिक से अधिक थोक माल रेलवे की ओर बढ़ रहा है। इसके लाभ वाणिज्यिक प्रदर्शन से कहीं आगे तक बढ़ रहे हैं। रेल परिवहन कार्बन उत्सर्जन को कम करने के साथ राजमार्गों पर भीड़ कम करता है। इसके साथ ही एमएसएमई सहित उद्योगों को एक अधिक हरित और विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स विकल्प प्रदान करता है। यह बदलाव सतत विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुष्ट करता है। माल ढुलाई को देश के शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों के साथ जोड़ता है और रेलवे को आर्थिक और पर्यावरणीय प्रगति के एक प्रमुख चालक के रूप में स्थापित करता है।