West Asia Tension Impact: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के हालातों के बीच भारतीय व्यापार पर इसके प्रभाव का आकलन करने के लिए वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में निर्यातकों, शिपिंग कंपनियों और विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि तेजी से बदलते हालात के बीच भारतीय व्यापार पर इसके असर को समझने के लिए आयोजित इस बैठक में कुछ लोग सीधे और कुछ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये शामिल होंगे।निर्यातकों ने गहरी चिंता व्यक्त की है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग प्रभावित होंगे। ये मार्ग भारत को खाड़ी क्षेत्र, उत्तरी अमेरिका और यूरोप से जोड़ने के लिए जीवन रेखा माने जाते हैं।
लॉजिस्टिक के कई चैनल हुए बाधित
भारतीय निर्यातक संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा कि इस संघर्ष ने वैश्विक लॉजिस्टिक चैनलों को बाधित करना शुरू कर दिया है। हवाई मार्ग बदले जा रहे हैं और लाल सागर तथा खाड़ी के प्रमुख मार्गों पर अनिश्चितता बढ़ गई है।रल्हन ने चेतावनी दी कि यदि जहाजों को अफ्रीका के रास्ते से मोड़ना पड़ा, तो यूरोप और अमेरिका जाने वाले माल की पारगमन अवधि में 15 से 20 दिनों की बढ़ोतरी हो सकती है।
इस व्यवधान के कारण माल ढुलाई दरों और बीमा प्रीमियम में भारी उछाल आने की आशंका है। निर्यातकों का कहना है कि शिपिंग क्षमता की उपलब्धता, नए रूट और संशोधित दरों पर स्थिति स्पष्ट होने में कुछ दिन लग सकते हैं।
वहीं पश्चिम एशिया में बिगड़ते सुरक्षा हालातों और होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आवाजाही बाधित होने की आशंका के बीच इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (आईआरईएफ) ने अपने सदस्यों को ईरान और खाड़ी के कुछ हिस्सों के लिए नए सीआईएफ (लागत, बीमा और माल ढुलाई) सौदों से बचने की सलाह दी है।
आईआरईएफ ने दी नई सलाह
फेडरेशन ने रविवार को जारी एक परामर्श में निर्यातकों से कहा है कि जहां तक संभव हो वे एफओबी (फ्री ऑन बोर्ड) शर्तों पर काम करें। इस व्यवस्था के तहत अंतरराष्ट्रीय खरीदार माल ढुलाई, बीमा और संबंधित जोखिमों को वहन करता है, जिससे भारतीय निर्यातक निश्चित मूल्य वाले अनुबंधों पर अचानक बढ़ने वाली लागत के जोखिम से बच जाते हैं।
निर्यातकों के निकाय ने चेतावनी दी कि ईरान और यूएई के घटनाक्रम 'बंकर' (मालवाहक जहाजों में प्रयुक्त ईंधन) की कीमतों को बढ़ा सकते हैं... कम समय के नोटिस पर कंटेनर और बल्क फ्रेट में भारी वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही, बीमा प्रीमियम में भी तेज उछाल की आशंका जताई गई है।भारत के चावल निर्यात के लिए यह संकट काफी बड़ा है, क्योंकि अफ्रीका और पश्चिम एशिया को होने वाला निर्यात कुल राष्ट्रीय चावल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान, पश्चिम एशिया को 39 लाख टन और अफ्रीका को 71.6 लाख टन चावल भेजा गया।