Artificial Intelligence Investment: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बावजूद कई अमेरिकी कंपनियां भरत में जमकर निवेश कर रही हैं। अमेरिकी माइक्रोसॉफ्ट भारत में 17.5 अरब डॉलर (करीब ₹1.57 लाख करोड़) निवेश करने जा रही है। अमेरिकी टेक कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा निवेश होगा। फंड का इस्तेमाल AI, क्लाउड और डेटा सेंटर जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। इसी तरह एमेजॉन ने भी भारत में बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है। एमेजॉन ने घोषणा की है कि 2030 तक कंपनी भारत में 35 अरब डॉलर यानी 3.14 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश करेगी। यह निवेश AI ड्रिवन डिजिटाइजेशन, एक्सपोर्ट ग्रोथ और जॉब क्रिएशन पर फोकस्ड होगा।
24 घंटे से भी कम समय में, माइक्रोसॉफ्ट और एमेजॉन ने भारत के क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 50 अरब डॉलर से ज्यादा के निवेश की घोषणा की है। वहीं इंटेल ने सोमवार को देश में चिप्स बनाने की योजना की घोषणा की है, ताकि बढ़ती PC डिमांड और तेजी से AI अपनाने का फ़ायदा उठाया जा सके। हालांकि, नेटिव AI फाउंडेशनल मॉडल बनाने की रेस में भारत अमेरिका और चीन से पीछे है, और उसके पास कोई बड़ी घरेलू AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी नहीं है, लेकिन वह इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपनी महारत का इस्तेमाल करके एंटरप्राइज लेवल पर AI एप्लिकेशन बनाना और डिप्लॉय करना चाहता है। ऐसे में बड़ी टेक कंपनियों को भी एक शानदार मौका मिलेगा।
गूगल भी निवेश की राह पर
CNBC में छपी खबर के मुताबिक, गूगल भी निवेश के मामले में कहीं पीछे नहीं है। कंपनी ने अक्टूबर के महीने में आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में डेटा सेंटर और एआई हब के डेवलपमेंट में अगले पांच सालों में 1.35 लाख करोड़ खर्च करने की बात कही है। मेटा भी रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ पार्टनरशिप में एआई सॉल्यूशंस के लिए 900 करोड़ रुपये (100 मिलियन डॉलर) के शुरुआती निवेश की घोषणा कर चुकी है। पिछले कुछ महीनों में, OpenAI, Google और Perplexity जैसी AI और टेक कंपनियों ने भारत में लाखों यूजर्स को अपने टूल्स का फ्री में एक्सेस दे रहे हैं।
AI की रेस में भारत भी शामिल
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने ग्लोबल और नेशनल AI वाइब्रेंसी रैंकिंग में भारत को अमेरिका, चीन और UK के साथ टॉप चार देशों में शामिल किया है। डेवलपर्स की कम्युनिटी GitHub ने सभी प्रोजेक्ट्स में 24% ग्लोबल शेयर के साथ भारत को टॉप पर रैंक किया है। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने CNBC से बातचीत करते हुए कहा कि AI का बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के लिए सिर्फ़ मॉडल या कंप्यूटिंग होना ही काफी नहीं है, और इसके लिए कंपनियों को एप्लिकेशन लेयर बनाने और उन्हें डिप्लॉय करने के लिए प्रतिभाशाली लोगों की जरूरत है। भारत के लिए ज्यादा मौका "एप्लिकेशन डेवलप करने" में है, जिनका इस्तेमाल AI कंपनियों के लिए रेवेन्यू बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
भारत में डेटा सेंटर के लिए बेहतर मौका
जब डेटा सेंटर बनाने की बात आती है, तो भारत के पास कई फायदे हैं। एशिया पैसिफिक क्षेत्र में जापान, ऑस्ट्रेलिया, चीन और सिंगापुर जैसे बाजार मैच्योर हो चुके हैं। सिंगापुर, जो इस क्षेत्र के सबसे पुराने डेटा सेंटर हब में से एक है, वहाँ जमीन की उपलब्धता की समस्याओं के कारण बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाने के लिए सीमित जगह है। इधर भारत में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर डेवलपमेंट के लिए बहुत ज्यादा जगह है। यूरोप के डेटा सेंटर हब के मुकाबले भारत में बिजली की लागत अपेक्षाकृत कम है। भारत की बढ़ती रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को देखते हुए भारत में ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने वाले डेटा सेंटर आसानी से बनाए जा सकते हैं।