
TCS-TPG Deal: भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) अब सिर्फ कोडिंग और सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं रहने वाली है। कंपनी ने भविष्य की तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में अपनी बादशाहत कायम करने के लिए कमर कस ली है। TCS ने अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्म TPG के साथ मिलकर एक ऐतिहासिक समझौता किया है, जिसके तहत भारत में विशालकाय AI रेडी डेटा सेंटर्स का निर्माण किया जाएगा।
इस साझेदारी के केंद्र में है एक नई कंपनी हाइपरवॉल्ट एआई डेटा सेंटर लिमिटेड। अक्टूबर के अंत में बनी इस कंपनी में टीसीएस और टीपीजी मिलकर अगले कुछ वर्षों में लगभग 18,000 करोड़ रुपये (2.1 अरब डॉलर) का इक्विटी निवेश करेंगे। इस ज्वाइंट वेंचर की रूपरेखा बिल्कुल स्पष्ट है। इसमें TCS की हिस्सेदारी 51% रहेगी जबकि TPG लगभग ₹8,820 करोड़ रुपये देकर 49% हिस्सेदारी खरीदेगी।
TCS के सीईओ के. कृतिवासन ने न्यूज वेबसाइट इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि हाइपरवॉल्ट ग्राहकों को 'पैसिव डेटा सेंटर' यानी ढांचागत सुविधाएं प्रदान करेगा, जहां वे अपनी जरूरत के हिसाब से प्राइवेट क्लाउड बना सकेंगे या हाइपरस्केलर्स के साथ काम कर सकेंगे। जीपीयू और सीपीयू जैसे हार्डवेयर लगाने का काम ग्राहकों का होगा।
यह डील टीसीएस के इतिहास में एक बड़ा 'यू-टर्न' या रणनीतिक बदलाव है। अब तक टीसीएस का बिजनेस मॉडल 'एसेट-लाइट' यानी कम पूंजीगत व्यय पर आधारित रहा है, लेकिन डेटा सेंटर बिजनेस में भारी निवेश की जरूरत होगी। यह पहली बार है जब टीसीएस किसी प्रोजेक्ट के लिए बाहरी कर्ज ले रही है और किसी प्राइवेट इक्विटी फर्म से पैसा जुटा रही है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में 5 से 7 साल लगेंगे, लेकिन राजस्व अगले 18 से 24 महीनों में आना शुरू हो सकता है। हालांकि, बाजार के कुछ जानकारों ने इस पर चिंता भी जताई थी क्योंकि टीसीएस का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 51% है जिसमें भारी निवेश वाले मॉडल से गिरावट आ सकती है। यही वजह थी कि घोषणा के बाद शेयर में मामूली गिरावट देखी गई थी।
टीपीजी के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन जिम कोल्टर ने भारत को डेटा सेंटर्स के लिए दुनिया का सबसे बेहतरीन बाजार बताया है। उनका मानना है कि भारत के पास तीन बड़े फायदे हैं। पहला- सस्ती बिजली जो अमेरिका के मुकाबले भारत में बिजली की लागत 40% कम है। दूसरा- ह्यूमन कैपिटल क्योंकि यहां का इंजीनियरिंग टैलेंट और वर्कफोर्स बेजोड़ है। और तीसरा- बढ़ती मांग क्योंकि भारत में डेटा सेंटर की क्षमता अभी कम है, लेकिन इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का कहना है कि इस क्षमता के साथ TCS अपने ग्राहकों को 'एन्ड-टू-एन्ड' एआई सॉल्युशंस देने वाली दुनिया की अग्रणी कंपनी बन जाएगी।
डेटा सेंटर का यह बाजार अब एक युद्ध के मैदान में बदल रहा है। टाटा समूह की यह एंट्री सीधे तौर पर रिलायंस जियो, अडानी कनेक्स (AdaniConnex), और एयरटेल के Nxtra जैसे दिग्गजों को चुनौती देगी।
एक तरफ अडानी और गूगल मिलकर विशाखापत्तनम में बड़ा निवेश कर रहे हैं, तो दूसरी ओर रिलायंस भी मेटा और गूगल के साथ मिलकर जामनगर और आंध्र प्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। जानकारों का अनुमान है कि अगले 5-7 सालों में भारत की डेटा सेंटर क्षमता 1.2 GW से बढ़कर 9 GW तक पहुंच सकती है, जिसमें 50 से 95 अरब डॉलर (करीब 4,431 से 8,419 अरब रुपये) तक का निवेश हो सकता है।
टीसीएस तीन मुख्य सेगमेंट को लक्ष्य बना रहा है। पहला- क्लाउड उपयोगकर्ता कंपनियां, दूसरा- एआई प्रशिक्षण और इन्फरेंसिंग प्लेटफॉर्म और तीसरा- सुरक्षित और स्वदेशी (sovereign) डेटा होस्ट करने वाले एंटरप्राइज। Hyperscalers (Google, Amazon, Microsoft) ने भी TCS में रुचि दिखाई है।
नए डेटा प्रोटेक्शन कानून और ग्लोबल 'रीजनलाइजेशन' ट्रेंड के चलते दुनिया भर की कंपनियां अपने डेटा के सुरक्षित ठिकानों की तलाश में हैं। टीसीएस–टीपीजी की साझेदारी भारत को एक ग्लोबल सोवरेन डेटा हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
टीसीएस के लिए यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पूरी आईटी इंडस्ट्री एआई के कारण उथल-पुथल से गुजर रही है। टीसीएस अपने पारंपरिक 'ह्यूमन-लेड मॉडल' से हटकर एआई आधारित भविष्य की ओर बढ़ रही है। इसका असर वर्कफोर्स पर भी दिखा है, जहां पिछली तिमाही में कर्मचारियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई। बावजूद इसके, टीसीएस का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि वे भविष्य की दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहते। जैसा कि कृतिवासन ने कहा, 'हम मानते हैं कि हमारे निवेशकों के पैसे का उपयोग करने का यह सबसे अच्छा तरीका है।'
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