AI की दुनिया में भारत का डंका, TCS और TPG की महाडील से रचेगा नया इतिहास

TCS और अमेरिकी दिग्गज TPG ने मिलाया हाथ, 18,000 करोड़ के निवेश से भारत में खड़ी होगी AI डेटा सेंटर्स की विशाल दुनिया। यह ऐतिहासिक साझेदारी भारत को ग्लोबल AI मैप पर एक सुपरपावर बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।

Naveen Kumar Pandey
पब्लिश्ड21 Nov 2025, 10:20 AM IST
भारत में AI डेटा सेंटर बनाने के लिए TCS और TPG ने मिलाया था।
भारत में AI डेटा सेंटर बनाने के लिए TCS और TPG ने मिलाया था।

TCS-TPG Deal: भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) अब सिर्फ कोडिंग और सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं रहने वाली है। कंपनी ने भविष्य की तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में अपनी बादशाहत कायम करने के लिए कमर कस ली है। TCS ने अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्म TPG के साथ मिलकर एक ऐतिहासिक समझौता किया है, जिसके तहत भारत में विशालकाय AI रेडी डेटा सेंटर्स का निर्माण किया जाएगा।

TCS की नई शुरुआत और 18,000 करोड़ रुपये का खाका

इस साझेदारी के केंद्र में है एक नई कंपनी हाइपरवॉल्ट एआई डेटा सेंटर लिमिटेड। अक्टूबर के अंत में बनी इस कंपनी में टीसीएस और टीपीजी मिलकर अगले कुछ वर्षों में लगभग 18,000 करोड़ रुपये (2.1 अरब डॉलर) का इक्विटी निवेश करेंगे। इस ज्वाइंट वेंचर की रूपरेखा बिल्कुल स्पष्ट है। इसमें TCS की हिस्सेदारी 51% रहेगी जबकि TPG लगभग 8,820 करोड़ रुपये देकर 49% हिस्सेदारी खरीदेगी।

TCS के सीईओ के. कृतिवासन ने न्यूज वेबसाइट इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि हाइपरवॉल्ट ग्राहकों को 'पैसिव डेटा सेंटर' यानी ढांचागत सुविधाएं प्रदान करेगा, जहां वे अपनी जरूरत के हिसाब से प्राइवेट क्लाउड बना सकेंगे या हाइपरस्केलर्स के साथ काम कर सकेंगे। जीपीयू और सीपीयू जैसे हार्डवेयर लगाने का काम ग्राहकों का होगा।

यह भी पढ़ें | आधार डेटा वॉल्ट में जानकारी रहेगी सुरक्षित, जानिए क्या है यह नया ऐप

टीसीएस की रणनीति में बड़ा बदलाव

यह डील टीसीएस के इतिहास में एक बड़ा 'यू-टर्न' या रणनीतिक बदलाव है। अब तक टीसीएस का बिजनेस मॉडल 'एसेट-लाइट' यानी कम पूंजीगत व्यय पर आधारित रहा है, लेकिन डेटा सेंटर बिजनेस में भारी निवेश की जरूरत होगी। यह पहली बार है जब टीसीएस किसी प्रोजेक्ट के लिए बाहरी कर्ज ले रही है और किसी प्राइवेट इक्विटी फर्म से पैसा जुटा रही है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में 5 से 7 साल लगेंगे, लेकिन राजस्व अगले 18 से 24 महीनों में आना शुरू हो सकता है। हालांकि, बाजार के कुछ जानकारों ने इस पर चिंता भी जताई थी क्योंकि टीसीएस का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 51% है जिसमें भारी निवेश वाले मॉडल से गिरावट आ सकती है। यही वजह थी कि घोषणा के बाद शेयर में मामूली गिरावट देखी गई थी।

एआई डेटा सेंटर्स के लिए भारत का आकर्षण क्यों

टीपीजी के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन जिम कोल्टर ने भारत को डेटा सेंटर्स के लिए दुनिया का सबसे बेहतरीन बाजार बताया है। उनका मानना है कि भारत के पास तीन बड़े फायदे हैं। पहला- सस्ती बिजली जो अमेरिका के मुकाबले भारत में बिजली की लागत 40% कम है। दूसरा- ह्यूमन कैपिटल क्योंकि यहां का इंजीनियरिंग टैलेंट और वर्कफोर्स बेजोड़ है। और तीसरा- बढ़ती मांग क्योंकि भारत में डेटा सेंटर की क्षमता अभी कम है, लेकिन इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का कहना है कि इस क्षमता के साथ TCS अपने ग्राहकों को 'एन्ड-टू-एन्ड' एआई सॉल्युशंस देने वाली दुनिया की अग्रणी कंपनी बन जाएगी।

यह भी पढ़ें | गूगल और अडानी मिलकर खोलेंगे देश का सबसे बड़ा AI डेटा सेंटर

टीसीएस से रिलायंस और अडानी को मिलेगी टक्कर

डेटा सेंटर का यह बाजार अब एक युद्ध के मैदान में बदल रहा है। टाटा समूह की यह एंट्री सीधे तौर पर रिलायंस जियो, अडानी कनेक्स (AdaniConnex), और एयरटेल के Nxtra जैसे दिग्गजों को चुनौती देगी।

एक तरफ अडानी और गूगल मिलकर विशाखापत्तनम में बड़ा निवेश कर रहे हैं, तो दूसरी ओर रिलायंस भी मेटा और गूगल के साथ मिलकर जामनगर और आंध्र प्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। जानकारों का अनुमान है कि अगले 5-7 सालों में भारत की डेटा सेंटर क्षमता 1.2 GW से बढ़कर 9 GW तक पहुंच सकती है, जिसमें 50 से 95 अरब डॉलर (करीब 4,431 से 8,419 अरब रुपये) तक का निवेश हो सकता है।

टीसीएस एआई बिजनेस के ग्राहक कौन होंगे?

टीसीएस तीन मुख्य सेगमेंट को लक्ष्य बना रहा है। पहला- क्लाउड उपयोगकर्ता कंपनियां, दूसरा- एआई प्रशिक्षण और इन्फरेंसिंग प्लेटफॉर्म और तीसरा- सुरक्षित और स्वदेशी (sovereign) डेटा होस्ट करने वाले एंटरप्राइज। Hyperscalers (Google, Amazon, Microsoft) ने भी TCS में रुचि दिखाई है।

भारत के लिए क्रांतिकारी कदम

नए डेटा प्रोटेक्शन कानून और ग्लोबल 'रीजनलाइजेशन' ट्रेंड के चलते दुनिया भर की कंपनियां अपने डेटा के सुरक्षित ठिकानों की तलाश में हैं। टीसीएस–टीपीजी की साझेदारी भारत को एक ग्लोबल सोवरेन डेटा हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

यह भी पढ़ें | एयरटेल यूजर्स को फ्री में मिला परप्लेक्सिटी एआई का प्रो वर्जन, 1 साल उठाएं फायदा

चुनौतियों के बीच उम्मीद की किरण

टीसीएस के लिए यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पूरी आईटी इंडस्ट्री एआई के कारण उथल-पुथल से गुजर रही है। टीसीएस अपने पारंपरिक 'ह्यूमन-लेड मॉडल' से हटकर एआई आधारित भविष्य की ओर बढ़ रही है। इसका असर वर्कफोर्स पर भी दिखा है, जहां पिछली तिमाही में कर्मचारियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई। बावजूद इसके, टीसीएस का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि वे भविष्य की दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहते। जैसा कि कृतिवासन ने कहा, 'हम मानते हैं कि हमारे निवेशकों के पैसे का उपयोग करने का यह सबसे अच्छा तरीका है।'

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़बिजनेसAI की दुनिया में भारत का डंका, TCS और TPG की महाडील से रचेगा नया इतिहास
More
बिजनेस न्यूज़बिजनेसAI की दुनिया में भारत का डंका, TCS और TPG की महाडील से रचेगा नया इतिहास