
भारत में पर्यावरण अनुकूल उपायों में निवेश के बड़े मौके हैं जिनसे करोड़ों की संख्या में नौकरियां भी मिल सकती हैं। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) ने एक रिपोर्ट में बताया है कि भारत संचयी हरित निवेशों (cumulative green investments) में 360 लाख करोड़ रुपये (4.1 ट्रिलियन डॉलर) को आकर्षित करने और 4.8 करोड़ पूर्णकालिक समतुल्य नौकरियां सृजित करने की संभावना रखता है।
सीईईडब्ल्यू (CEEW) का नया अध्ययन 'बिल्डिंग अ ग्रीन इकोनॉमी फॉर विकसित भारत' बताता है कि भारत 2047 तक सालाना 97.7 लाख करोड़ रुपये (1.1 ट्रिलियन डॉलर) की ग्रीन मार्केट की संभावनाएं खोल सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर यह अपनी तरह का पहला आकलन है, जो ऊर्जागत परिवर्तन (एनर्जी ट्रांजिशन), सर्कुलर इकोनॉमी और बायो-इकोनॉमी एवं प्रकृति-आधारित समाधानों (nature based solutions) में 36 ग्रीन वैल्यू चेन्स को चिन्हित करता है। ये संयुक्त रूप से विकसित भारत की यात्रा के लिए एक परिभाषित हरित आर्थिक अवसरों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
अक्सर ग्रीन इकोनॉमी को सिर्फ सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित मान लिया जाता है। हालांकि, यह अध्ययन इसमें मौजूद व्यापक अवसरों को रेखांकित करता है। ये अवसर जैव-आधारित सामग्री (bio based material), कृषि वानिकी (agroforestry), हरित निर्माण (green construction), सतत पर्यटन (sustainable tourism), चक्रीय विनिर्माण (circular manufacturing), कचरे से कंचन उद्योग (waste to value industry) और प्रकृति आधारित आजीविकाओं (nature-based livelihoods) तक विस्तृत हैं। इनमें से प्रत्येक क्षेत्र अगले दो दशकों में अरबों डॉलर के उद्योग बन सकते हैं और संसाधन सुरक्षा और लचीलेपन को भी मजबूत बना सकते हैं।
सीईईडब्ल्यू (CEEW) अध्ययन बताता है कि प्रारंभिक अवस्था वाले क्षेत्रों के लिए पूंजी की लागत घटाने, कच्ची एवं रीसाइकिल्ड सामग्री पाने के लिए सप्लाई चेन्स को सुधारने, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और नवाचार को मजबूत बनाने, तकनीकी रूप से कुशल कार्यबल तैयार करने और उभरती हरित प्रौद्योगिकियों (emerging green technologies) के लिए विश्वसनीय उत्पाद मानक स्थापित करने जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। ग्रीन वैल्यू चेन्स का मुख्यधारा की आर्थिक नियोजन में एकीकरण के लिए मंत्रालयों, राज्य सरकारों, उद्योग, वित्त और स्थानीय संस्थानों के बीच तालमेल आधारित प्रयास अत्यंत जरूरी होगा।
सीईईडब्ल्यू (CEEW) का विश्लेषण रेखांकित करता है कि भारत के ग्रीन इकोनॉमिक ट्रांजिशन के लिए महिलाओं की भागीदारी बहुत जरूरी होगी। इस अध्ययन में जेंडर-रिस्पॉन्सिव स्किलिंग, सुदूर कार्यस्थलों के लिए सुरक्षित आवागमन, बेहतर वेतन और महिलाओं के नेतृत्व वाली ग्रीन इंटरप्राइजेज के लिए समर्पित वित्तीय उपायों का सुझाव दिया गया है।
राज्य सरकारें पहले से ही ग्रीन इकोनॉमी के निर्माण की दिशा में कदम उठाने की शुरुआत कर चुकी हैं। उदाहरण के लिए, ओडिशा ने ग्रीन इकोनॉमी काउंसिल और 16 विभागीय सचिवों को शामिल करते हुए एक समिति का गठन किया है, ताकि आर्थिक नियोजन में ग्रीन वैल्यू चेन्स को शामिल करने और हरित-नेतृत्व वाले विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा सके। यह दर्शाता है कि राज्य स्तर पर मिशन-उन्मुख प्रशासन कैसे भारत के ग्रीन इकोनॉमी ट्रांजिशन को गति दे सकते हैं।
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