Indian Technology: सेमीकंडक्टर और AI में उभरती ताकत है भारत, क्या बन पाएगा ग्लोबल हब?

Semiconductor and AI Industry: भारत सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। सरकार की डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना और फेबलस स्टार्टअप्स के उदय ने इनोवेशन के लिए अनुकूल माहौल बनाया है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड8 Sep 2025, 03:09 PM IST
सेमीकंडक्टर और एआई के क्षेत्र में फर्राटे भरने लगा भारत। (सांकेतिक तस्वीर)
सेमीकंडक्टर और एआई के क्षेत्र में फर्राटे भरने लगा भारत। (सांकेतिक तस्वीर)(Pexel)

India's Progress in Technology Sector: सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज वैश्विक प्रगति का आधार बन गए हैं। भारत इन दोनों क्षेत्रों में एक शक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है। सरकार ने अगले 5-7 वर्षों में 7nm और उससे अधिक उन्नत चिप्स के निर्माण के लिए एक रोडमैप तैयार किया है।

सरकार की ऐसी महत्वाकांक्षी नीतियों, निजी क्षेत्र के बड़े निवेशों और तकनीकी प्रगति के चलते भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर और AI उद्योग में एक प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता रखता है। हालांकि, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना होगा।

सेमीकंडक्टर और एआई: सरकारी नीतियां और प्रोत्साहन

भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास के लिए डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना जैसी कई नीतियां लागू की हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य घरेलू सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण को बढ़ावा देना है। इसके अलावा, सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन के लिए भी बड़ा निवेश किया है, जिससे AI स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिल रहा है।

क्लाउड और जेनएआई का प्रभाव

भारतीय सेमीकंडक्टर कंपनियां क्लाउड-आधारित ईडीए (इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन) और जेनएआई (जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) टूल्स का तेजी से उपयोग कर रही हैं। यह डिजाइन प्रक्रियाओं को तेज करने और लागत को कम करने में मदद कर रहा है। जेनएआई-संचालित ईडीए टूल्स वर्कफ्लो को सुव्यवस्थित कर रहे हैं और छोटी टीमों को भी अत्याधुनिक AI टूल्स का उपयोग करने में सक्षम बना रहे हैं।

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बड़े निवेश और चुनौतियां

रिलायंस समूह ने देश के पहले वेफर फैब्रिकेशन प्लांट की स्थापना के लिए लगभग 91,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की घोषणा की है। वहीं, योट्टा इन्फ्रास्ट्रक्चर 8,000 NVIDIA GPUs खरीदने के लिए 1.5 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रहा है। हालांकि, बड़े पैमाने पर विनिर्माण के लिए तकनीकी साझेदारी, कुशल कार्यबल और आधुनिक बुनियादी ढांचे में निवेश जैसे मुद्दे अभी भी चुनौती बने हुए हैं। ऊपर से भारतीय निर्यात पर अमेरिका में टैरिफ भी एक बड़ी बाधा है।

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चिप्स निर्माण का 5-7 वर्षों का रोडमैप तैयार

सरकार ने चिप्स निर्माण में अगले पांच से सात वर्षों का रोडमैप तैयार कर लिया है। इसके तहत, 7nm और उससे अधिक उन्नत चिप्स बनाने की योजना तैयार की गई है। इसमें तकनीकी साझेदारी के लिए IBM और बेल्जियम स्थित IMEC के साथ बातचीत शामिल है।

IMEC एक स्वतंत्र नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स अनुसंधान और विकास केंद्र है। वर्तमान में, टाटा समूह द्वारा लगभग 91,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ देश का पहला वेफर निर्माण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जो 28nm और उससे अधिक की चिप्स का उत्पादन शुरू करेगा। सरकार का लक्ष्य अगले 15 वर्षों में भारत को इस क्षेत्र में एक वैश्विक खिलाड़ी बनाना है।

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सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत का 2032 वाला लक्ष्य

भारत सरकार का लक्ष्य 2032 तक दुनिया के शीर्ष पांच सेमीकंडक्टर देशों में शामिल होना है। भारत सेमीकंडक्टर और AI क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति भी कर रहा है। लेकिन वैश्विक केंद्र बनने के लिए निरंतर प्रयास, तकनीकी साझेदारी और बुनियादी ढांचे में निवेश आवश्यक है। सरकार की नीतियों और निजी क्षेत्र के निवेशों के साथ भारत इस क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की क्षमता रखता है। इसके लिए निरंतर प्रयास और वैश्विक सहयोग आवश्यक है।

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