Unemployment News: मई में भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.5%, गांवों में नहीं मिल रहा है काम

Unemployment News: भारत में बेरोजगारी दर मई 2026 में बढ़कर 5.5% हो गई, जो अप्रैल में 5.2% थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यह पिछले 11 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। बेरोजगारी में बढ़ोतरी के पीछे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में कमी और श्रम बाजार में बढ़ता दबाव प्रमुख कारण माना जा रहा है।

Jitendra Singh
अपडेटेड16 Jun 2026, 04:30 PM IST
Unemployment News: काम करने वाले लोगों का रेसियो भी कम हुआ है।
Unemployment News: काम करने वाले लोगों का रेसियो भी कम हुआ है।

Unemployment News: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंताजनक संकेत सामने आया है। सरकार की ओर से जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में देश की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.5 फीसदी हो गई, जबकि अप्रैल में यह 5.2 फीसदी थी। यह लगातार दूसरे महीने वृद्धि का संकेत है और पिछले 11 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर भी माना जा रहा है। हैरानी की बात ये है कि शहर की स्थिति में फिर भी मामूली सुधार है, लेकिन गांव में स्थिति बद से बदतर हो रही है। गांवों में लोगों को काम नहीं मिल रहा है और इससे जॉब मार्केट में आफत आ चुकी है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक मई में बेरोजगारी दर में 0.3 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई। अप्रैल में जहां रोजगार बाजार अपेक्षाकृत स्थिर दिखाई दे रहा था, वहीं मई में स्थिति कमजोर हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि श्रम बाजार पर दबाव बढ़ रहा है और रोजगार सृजन की रफ्तार मांग के अनुरूप नहीं है।

गांवों की हालत खस्ता

रिपोर्ट के अनुसार बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में कमी माना जा रहा है। ग्रामीण बेरोजगारी दर अप्रैल के 4.6% से बढ़कर मई में 5.1% हो गई। इससे स्पष्ट है कि गांवों में रोजगार की स्थिति पहले की तुलना में कमजोर हुई है।

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गांवों में लोगों को काम नहीं मिल रहा है। लगातार चौथे महीने बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह पिछले 11 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि कृषि सीजन के बीच रोजगार की उपलब्धता में उतार-चढ़ाव और गैर-कृषि गतिविधियों की धीमी रफ्तार ने इस स्थिति को प्रभावित किया है।

शहरों में भी बढ़ा रोजगार दबाव

केवल ग्रामीण क्षेत्र ही नहीं, शहरी भारत में भी रोजगार बाजार दबाव में दिखाई दे रहा है। मई में शहरी बेरोजगारी दर 5.1% दर्ज की गई, जो अप्रैल में 4.6% थी। इससे संकेत मिलता है कि कॉरपोरेट और सेवा क्षेत्र में भी भर्ती की गति उतनी मजबूत नहीं है जितनी अपेक्षित थी।

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काम करने वालों की संख्या भी घटी

सिर्फ बेरोजगारी ही नहीं बढ़ी, बल्कि काम करने वाले लोगों का रेसियो भी कम हुआ है। लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट मई में घटकर 54.4 फीसदी रह गया, जो अप्रैल में 55 फीसदी था। वहीं वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो यानी WPR भी 52.2 फीसदी से घटकर 51.4 फीसदी पर आ गया। इसका मतलब है कि रोजगार सृजन की रफ्तार श्रम बाजार में आने वाले लोगों की तुलना में कमजोर पड़ रही है।

अर्थव्यवस्था के लिए क्या संकेत?

बेरोजगारी दर में वृद्धि ऐसे समय पर आई है जब भारत तेज आर्थिक वृद्धि बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। रोजगार सृजन किसी भी अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रमुख संकेतक माना जाता है। यदि बेरोजगारी लगातार बढ़ती है तो इसका असर उपभोक्ता खर्च, मांग और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रोजगार बाजार में नरमी का असर आने वाले महीनों में खपत और निवेश दोनों पर दिखाई दे सकता है।

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युवाओं के लिए बढ़ी चुनौती

भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। ऐसे में रोजगार के अवसरों का पर्याप्त सृजन सरकार और उद्योग जगत दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि विनिर्माण, निर्माण और सेवा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा किए बिना बेरोजगारी में स्थायी कमी लाना मुश्किल होगा।

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