US India Minerals Agreement: ड्रैगन को लगेगा झटका? भारत और अमेरिका खनिज समझौते के बेहद करीब, सप्लाई चेन होगी फौलादी

India US Bilateral Trade Framework: अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका और भारत महत्वपूर्ण खनिज समझौते के करीब हैं। अगले कुछ महीनों में एक बड़ी घोषणा की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसमें नया व्यापार समझौता भी शामिल है…

Anuj Shrivastava( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड14 Mar 2026, 08:39 AM IST
भारत और अमेरिका खनिज समझौते के बेहद करीब
भारत और अमेरिका खनिज समझौते के बेहद करीब

US India Critical Minerals Agreement: अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका और भारत महत्वपूर्ण खनिज समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं और अगले कुछ महीनों में एक बड़ी घोषणा होने की उम्मीद है।उन्होंने जोर दिया कि पिछले कुछ महीनों में अमेरिका-भारत संबंधों में उल्लेखनीय कामयाबी देखी गई है, जिसमें एक नया व्यापार समझौता भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि अमेरिका और भारत एक महत्वपूर्ण खनिज समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं, जिससे उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा प्रणालियों और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने में मदद मिलेगी। अगले कुछ महीनों में, हम इस संबंध में एक बड़ी घोषणा की उम्मीद करते हैं।

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भारत-अमेरिका के संबंध हो रहे मजबूत

'इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026' को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि अमेरिका और भारत का जुड़ाव बढ़ा है। गोर ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में, दोनों देशों के बीच संबंधों में ऐतिहासिक ऊंचाइयों तक पहुंचने और ऐसे परिणाम देने की क्षमता है जो हमने पहले कभी नहीं देखे हैं।

तेज की वृद्धि पर क्या बोले सर्जियो गोर ?

फरवरी में, भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा की, जिसके तहत दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और तेल की कीमतों में वृद्धि के बीच, गोर ने कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी करने की कोशिश कर रहा है और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बना रहा है।

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गोर ने यह भी स्पष्ट करने कोशिश की कि अमेरिका ने हाल में भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए 30 दिन की छूट क्यों दी, जबकि इससे पहले उसने यूक्रेन युद्ध से संबंधित कड़े प्रतिबंध लगाए थे। उनसे रूसी तेल की खरीद के संबंध में अमेरिकी सरकार के रुख में परिवर्तन का कारण पूछा गया। गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप पहले दिन से ही दुनिया भर के संघर्षों को समाप्त करने के लिए सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और मैं जानता हूं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी रूस-यूक्रेन के युद्ध को समाप्त करने के उनके प्रयासों से सहमत हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध पर क्या बोले अमेरिकी राजदूत?

अमेरिकी राजदूत ने कहा कि ये युद्ध चार साल से जारी है और इसमें हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसलिए राष्ट्रपति इस युद्ध को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इसका एक हिस्सा यह सुनिश्चित करना था कि उस समय दुनिया भर के लोग रूसी तेल न खरीदें, क्योंकि इससे सीधे तौर पर युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही थी।उन्होंने तर्क दिया कि आज स्थिति अलग है।

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उन्होंने कहा कि आज हम ऐसी स्थिति में हैं जहां दुर्भाग्यवश ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी करने की कोशिश कर रहा है। ईरानी वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बना रहा है...जिनमें भारतीय भी शामिल हैं जिन्होंने दुर्भाग्यवश पिछले कुछ दिनों में, कल ही, ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों में अपनी जान गंवाई है।

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