भारत-अमेरिका ट्रेड डील: टैरिफ कटौती से रत्न-आभूषण और कपड़ा सेक्टर को बड़ी राहत- मूडीज

अमेरिकी सरकार भारतीय वस्तुओं पर मौजूदा 25 पर्सेंट के जवाबी शुल्क को घटाकर 18 पर्सेंट कर देगी। इस कदम से खासतौर पर रत्न और आभूषण, कपड़ा और परिधान जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को फायदा होगा।

Ashutosh Kumar( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड3 Feb 2026, 04:36 PM IST
भारत-अमेरिका ट्रेड डील
भारत-अमेरिका ट्रेड डील

मूडीज रेटिंग्स ने मंगलवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने वाली है। इस समझौते के तहत अमेरिकी सरकार भारतीय वस्तुओं पर मौजूदा 25 पर्सेंट के जवाबी शुल्क को घटाकर 18 पर्सेंट कर देगी। इस कदम से खासतौर पर रत्न और आभूषण, कपड़ा और परिधान जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को फायदा होगा। ये सेक्टर्स देश के निर्यात में अहम योगदान देते हैं और अब शुल्क घटने से उनकी ऋण चुकाने की क्षमता बेहतर होने की उम्मीद है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद इस जानकारी की पुष्टि की।

क्या है मूडीज का बयान

मूडीज ने अपने बयान में कहा कि यह व्यापार समझौता भारत के वस्तु निर्यात में नई जान फूंकने वाला है। अमेरिका अभी भी भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना हुआ है। 2025 के पहले 11 महीनों में भारत के कुल वस्तु निर्यात का लगभग 21 पर्सेंट हिस्सा अमेरिका को गया। इसके अलावा, कम शुल्क दर रत्न एवं आभूषण, कपड़ा और परिधान जैसे श्रम-प्रधान सेक्टर के लिए भी सकारात्मक साबित होगी। मूडीज के अनुसार, ये सेक्टर शीर्ष निर्यात क्षेत्रों में शामिल हैं और शुल्क में कटौती से इनके कारोबार और ऋण चुकाने की क्षमता में सुधार होगा।

रूस से कच्चे तेल की खरीद घटी

हालांकि, दवाइयों और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स पर अमेरिका पहले से ही 50 पर्सेंट के उच्च शुल्क में छूट दे चुका है। इसलिए इन पर नई कटौती का सीधा असर नहीं पड़ेगा। मूडीज ने यह भी बताया कि हाल के महीनों में भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद घटाई है। लेकिन इसके पूरी तरह बंद होने की संभावना फिलहाल कम है, क्योंकि इससे भारत की आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ सकता है। इस बात का खास महत्व इसलिए है क्योंकि ऊर्जा आयात भारत की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है।

क्या है मूडीज की चेतावनी

मूडीज ने चेताया कि अगर भारत रूसी तेल से पूरी तरह हटकर अन्य स्रोतों पर निर्भर हो जाता है, तो इससे तेल की आपूर्ति और कड़ी हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके चलते महंगाई पर भी दबाव बढ़ने का खतरा रहेगा। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए इस कदम का व्यापक असर हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि शुल्क में कटौती से निर्यातकों को तुरंत राहत मिलेगी, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार की स्थितियों पर नजर रखना भी उतना ही जरूरी होगा।

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