India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच बात बन गई हैं और इसके साथ ही बीते लंबे समय से अटकी India-US Trade को लेकर भी असमंजस लगभग खत्म हो गया है। भारत और अमेरिकी ट्रेड डील पर चर्चा भी तेज हो गई है। हर कोई घाटे और मुनाफे का आकलन करने लगा है। इसबीच अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रोलिंस की ओर से एक बड़ा दावा किया गया। उन्होंने कहा कि इस डील के बाद अमेरिका भारत के बाजार में बड़े पैमाने पर अपने कृषि उत्पाद भेज सकेगा। इससे अमेरिकी किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और ग्रामीण अमेरिका में ज्यादा पैसा पहुंचेगा।
हालांकि भारत सरकार की ओर से इस समझौते की पूरी शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन अमेरिकी बयान के बाद भारत में राजनीतिक और किसान संगठनों की चिंता बढ़ गई है। पहले कहा जा रहा था कि भारत अपना कृषि और डेयरी क्षेत्र अमेरिका के लिए खोलने को राजी नहीं है। इसी को लेकर ट्रेड डील होने में देरी हो रही थी। बहुत से लोगों को ब्रूक रोलिंग के दावे पर विश्वास नहीं हो रहा है।
व्यापार घाटे को कम करने में मिलेगी मदद
अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रोलिंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस समझौते के फायदों को गिनाते हुए लिखा कि 2024 में अमेरिका का भारत के साथ कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था। रोलिंस के अनुसार, भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए एक अहम बाजार है। उन्होंने लिखा, “नया अमेरिका-भारत समझौता अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत के विशाल बाजार में निर्यात करेगा, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और ग्रामीण अमेरिका में नकदी प्रवाह होगा। इस समझौते से व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलेगी।
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, अमेरिका को भारत के मुख्य कृषि एक्सपोर्ट में समुद्री उत्पाद, मसाले, डेयरी उत्पाद, बासमती चावल और हर्बल उत्पाद शामिल हैं। 2024-25 में, अमेरिका को भारत का कृषि एक्सपोर्ट $6,249.07 मिलियन था, जो देश के कुल $53,242.70 मिलियन के कृषि एक्सपोर्ट का 11.74 प्रतिशत था। भारत के एग्रीकल्चरल इंपोर्ट में मुख्य रूप से ताजे फल, सूखे मेवे और नट्स, जिनमें बादाम और अखरोट शामिल हैं।
इसके साथ ही अल्कोहलिक ड्रिंक्स, कच्ची कपास, वेजिटेबल ऑयल और अमेरिका से आने वाले प्रोसेस्ड आइटम शामिल हैं। अमेरिका लंबे समय से भारत के एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स मार्केट में एंट्री पाने की कोशिश कर रहा है।