इंडसइंड बैंक पर गहराया संकट, ₹1,960 करोड़ की गड़बड़ियों की जांच अब SFIO के हाथ

इंडसइंड बैंक में करीब 2,000 करोड़ रुपये की लेखा गड़बड़ियों ने खलबली मचा दी है। मुंबई पुलिस की क्लीन चिट के बीच अब SFIO की एंट्री ने इस बैंकिंग विवाद को नया मोड़ दे दिया है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड18 Dec 2025, 04:25 PM IST
 इंडसइंड बैंक पर गहराया संकट। (सांकेतिक तस्वीर)
इंडसइंड बैंक पर गहराया संकट। (सांकेतिक तस्वीर)

बैंकिंग सेक्टर की चमक-धमक के पीछे कभी-कभी ऐसी परतें छिपी होती हैं जो पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर देती हैं। इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) फिलहाल ऐसे ही एक बड़े विवाद के केंद्र में है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने बैंक के कामकाज में गंभीर अनियमितताओं और 'पब्लिक इंटरेस्ट' का हवाला देते हुए इसकी जांच सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) को सौंप दी है। यह फैसला तब आया है जब बैंक के ही ऑडिटर्स ने करीब 1,959.78 करोड़ रुपये की अकाउंटिंग गड़बड़ियों की ओर इशारा किया है।

एक तरफ क्लीन चिट, दूसरी तरफ गंभीर जांच

इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने अपनी शुरुआती जांच में बैंक को एक तरह से राहत दे दी। EOW का कहना है कि उन्हें फंड की हेराफेरी या पैसों के डायवर्जन का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है और वे इस केस को बंद करने की तैयारी में थे। लेकिन सरकार ने इसे केवल एक पुलिस केस न मानकर, कॉर्पोरेट धोखाधड़ी के चश्मे से देखा है। यही वजह है कि अब गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालाय (SFIO) की टीम बैंक की बैलेंस शीट की गहराई से पड़ताल करेगी।

यह भी पढ़ें | फ्यूल पर करते हैं ज्यादा खर्च तो आ गया स्पेशलिस्ट कार्ड, नाम और खासियतें जानिए

क्या है 1,960 करोड़ रुपये का यह मायाजाल?

यह पूरा विवाद साल 2015-16 से लेकर 2023-24 के बीच की अकाउंटिंग से जुड़ा है। वैधानिक लेखा परीक्षकों ने कंपनी अधिनियम की धारा 143 (12) के तहत कई 'ADT-4' फॉर्म भरे हैं, जो सीधे तौर पर धोखाधड़ी के संदेह की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में 1,979 करोड़ रुपये की चूक, माइक्रोफाइनेंस इनकम में 674 करोड़ रुपये की हेराफेरी और अन्य संपत्तियों के तहत 595 करोड़ रुपये के अनवेरिफाइड बैलेंस जैसे कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।

SFIO की रडार पर होंगे फर्जी खाते और निवेश

SFIO की जांच का दायरा काफी विस्तृत होने वाला है। यह एजेंसी केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन 'फर्जी खातों' की भी तलाश करेगी जो शायद आंकड़ों को बैलेंस करने के लिए बनाए गए थे। जांच में संबंधित पक्षों के लेनदेन, लोन और एडवांस के साथ-साथ बैंक के निवेश पोर्टफोलियो को बारीकी से खंगाला जाएगा। मुख्य लक्ष्य यह पता लगाना है कि क्या बैंक के धन को गुप्त तरीके से कहीं और डायवर्ट किया गया था और इस खेल के असली लाभार्थी कौन हैं।

यह भी पढ़ें | इंडसइंड बैंक के पूर्व CEO समेत पांच अधिकारियों पर SEBI का बड़ा एक्शन

दिग्गज अधिकारियों से पूछताछ और भविष्य की चुनौतियां

इस विवाद की आंच बैंक के शीर्ष नेतृत्व तक भी पहुंची है। पूर्व सीईओ सुमंत कथपालिया, पूर्व सीएफओ गोविंद जैन और पूर्व डिप्टी सीईओ अरुण खुराना समेत कई निलंबित कर्मचारियों से पूछताछ की जा चुकी है। हालांकि, इंडसइंड बैंक का दावा है कि उसकी पूंजी और मुनाफा इस झटके को सहने के लिए पर्याप्त है और इसका उसकी नेटवर्थ पर केवल 2.35% का ही असर पड़ेगा। लेकिन सवाल केवल पैसों का नहीं, बल्कि साख और निवेशकों के भरोसे का है।

क्या आरबीआई के हस्तक्षेप से सुलझेगी गुत्थी?

आर्थिक अपराध शाखा ने क्लोजर रिपोर्ट फाइल करने से पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से स्पष्टीकरण मांगा है। ग्रांट थॉर्नटन की फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में करीब 25 व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं जो इन खामियों के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। अब सबकी नजरें गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालाय की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि क्या यह महज एक मानवीय 'अकाउंटिंग एरर' था या फिर एक सोची-समझी साजिश।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़बिजनेसइंडसइंड बैंक पर गहराया संकट, ₹1,960 करोड़ की गड़बड़ियों की जांच अब SFIO के हाथ
More
बिजनेस न्यूज़बिजनेसइंडसइंड बैंक पर गहराया संकट, ₹1,960 करोड़ की गड़बड़ियों की जांच अब SFIO के हाथ