
Inflation Outlook 2026: देश में खाने-पीने की चीजों में नरमी और माल एवं सेवा कर (GST) में कटौती से इस साल महंगाई अनुकूल रही। अब नए साल यानी 2026 में खुदरा महंगाई को लक्ष्य बनाने से जुड़े मॉनिटरी पॉलिसी स्ट्रक्चर में बदलाव और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स(CPI) कैलकुलेशन सिस्टम में बदलाव की तैयारी की जा रही है। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक के सहज दायरे (दो से छह प्रतिशत) के भीतर बनी हुई है। इसके साथ अगले साल भी इसी स्तर पर रहने की उम्मीद है। इससे आने वाले महीनों में केंद्रीय बैंक की तरफ से ब्याज दरों में कम से कम एक और कटौती का अनुमान भी है।
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति दर ने भी 2025 के दौरान महंगाई के दबाव में साफ नरमी के संकेत दिए। साल के शुरुआती महीनों में WPI आधारित महंगाई बढ़ी, लेकिन इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई, जो खासकर खाने-पीने और ईधन की कीमतों के दबाव के कम होने को दिखाती है। थोक मुद्रास्फीति में जून में गिरावट आई और यह रुख आगे भी जारी रहा। जुलाई और अक्टूबर में भी यह घटती गई।
CPI आधारित मुद्रास्फीति या कुल महंगाई नवंबर 2024 से घटने लगी और इसके बाद जून 2025 तक यह रिजर्व बैंक के सहज दायरे (दो से चार प्रतिशत) में बनी रही। इसके बाद यह दो प्रतिशत से नीचे आ गई। CPI में लगभग 48 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली खाद्य महंगाई जनवरी में लगभग 6 प्रतिशत से घटनी शुरू हुई और जून में यह शून्य से नीचे आ गई। ताजा आंकड़ों के अनुसार नवंबर में खाद्य महंगाई शून्य से नीचे 3.91 प्रतिशत पर रही।
RBI मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण व्यवस्था से जुड़ा पहले ही एक परामर्श पत्र जारी कर चुका है। इस बीच, सरकार एक नई सीपीआई श्रृंखला पर काम कर रही है, जिसका आधार वर्ष 2024 = 100 होगा। इसमें सूचकांक संकलन में प्रयुक्त ‘कवरेज’, मदों की सूची, भार और कार्यप्रणाली में व्यापक संशोधन किया जाएगा।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मुद्रास्फीति संबंधी अनुमानों पर कहा कि 2026-27 की पहली छमाही में शीर्ष मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के लक्ष्य के करीब रहने का अनुमान है। कीमती धातुओं के अलावा मुद्रास्फीति के काफी कम रहने की संभावना है जैसा कि 2024 की शुरुआत से ही रुझान रहा है।
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