महंगाई में बढ़त का दिख सकता है असर, RBI से दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं

नए इंडेक्स का इस्तेमाल करके महंगाई के आंकड़े जारी होने वाले हैं। इसके बारे में एनालिस्ट का अनुमान है कि इससे कीमतें बढ़ सकती हैं। ऐसे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में दरों को स्थिर कर सकता है।

Jitendra Singh
पब्लिश्ड12 Feb 2026, 04:06 PM IST
महंगाई का नया मानक RBI के लिए सिर दर्द बन सकता है।
महंगाई का नया मानक RBI के लिए सिर दर्द बन सकता है।

चीते की रफ्तार से भाग रही महंगाई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के लिए सिर दर्द बन सकती है। केंद्र सरकार की ओर से जल्द ही रिटेल महंगाई के आंकड़े आने वाले हैं। इस बार महंगाई के आंकड़े नए मानक के आधार पर तय होंगे। ऐसे में जानकारों का कहना है कि इस बार महंगाई बढ़ सकती है। अगर ऐसा होता है तो फिर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आने वाले दिनों में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। इन दरों को स्थिर रखने के लिए RBI वाजिब कारण भी मिल जाएगा।

मिनिस्ट्री ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन का नया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स आज जारी हो सकता है। डेटा रिलीज़ में इंडेक्स वेट के आधार पर 2025 के आंकड़े शामिल होंगे, जिससे तुलना करना आसान हो जाएगा। खाने-पीने के सामान का वेटेज पहले के मुकाबले आधा कर दिया गया है। इसे घटाकर लगभग 36.8% कर दिया गया है। इसी तरह ग्रामीण घरों के लिए किराए और ऑनलाइन शॉपिंग जैसी नई खर्च की कैटेगरी जोड़ी गई हैं। बेस ईयर भी 2012 से बदलकर 2024 कर दिया गया है।

कितनी बढ़ सकती है महंगाई

ब्लूमबर्ग एक सर्वे में 32 इकोनॉमिस्ट शामिल हुए। इसमें अनुमान जताया गया है कि इन बदलावों से जनवरी की महंगाई दर लगभग 2.77% तक बढ़ सकती है। पिछली CPI सीरीज़ के आधार पर दिसंबर में महंगाई 1.33% थी। हालांकि महंगाई अभी भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 4% टारगेट से काफी नीचे है, लेकिन नए आंकड़े सेंट्रल बैंक को आगे रेट में कोई और कटौती रोकने और बॉन्ड यील्ड को और बढ़ाने के लिए मजबूर कर सकते हैं। पिछले हफ्ते, गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट में कोई बदलाव नहीं किया और आगे लंबे समय तक रुकने का संकेत भी दे गए थे।

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एक्सपर्ट की राय

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ सिक्योरिटीज़ मार्केट्स के अमोल अग्रवाल का कहना है कि नई CPI सीरीज़ में RBI को अपने मॉनेटरी पॉलिसी एक्शन को ज़्यादा असरदार बनाने और ट्रांसमिशन को तेज़ बनाने” में मदद मिलेगी। पुरानी सीरीज में कभी - कभी आरबीआई को दिक्कतें होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। वहीं फाइनेंशियल मार्केट के लोग इस बदलाव पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। इसकी वजह ये है कि इंटरेस्ट रेट्स पर उम्मीद से कुछ अलग बदलाव हो सकता है। ऐसे समय में जब फॉरेन फ्लो पॉलिसी सिग्नल्स के प्रति बहुत सेंसिटिव हैं। महंगाई का बढ़ता ट्रेंड उधार लेने की लागत को बढ़ाए रख सकता है, जिससे बॉन्ड यील्ड्स, इक्विटी वैल्यूएशन और पोर्टफोलियो और लॉन्ग-टर्म फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के फैसलों पर असर पड़ सकता है।

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DBS ग्रुप होल्डिंग्स लिमिटेड के कैलकुलेशन के अनुसार, नई CPI सीरीज़ में कोर इन्फ्लेशन का वेट, जिसमें फ़ूड और फ्यूल शामिल नहीं हैं, पहले के 47.3% से बढ़कर लगभग 58% हो जाएगा। कोर इन्फ्लेशन आमतौर पर मॉनेटरी पॉलिसी एक्शन पर ज़्यादा रिस्पॉन्सिव होता है।

CPI ये चीजें होंगी शामिल

CPI में बड़े बदलाव का मतलब है कि वीडियो कैसेट रिकॉर्डर, रेडियो और घोड़ा-गाड़ी के किराए जैसी पुरानी चीज़ों की कीमतों की जगह हवाई किराए, ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन और ई-कॉमर्स सेल्स ले लेंगी। इंडेक्स में अब बिजली की कीमतें, ग्रामीण इलाकों में घर की लागत और सोने-चांदी के गहनों के लिए स्टैंडर्ड नियम शामिल होंगे। सरकारी वेलफेयर प्रोग्राम के तहत बांटे जाने वाले फ्री खाने के सामान को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। सरकार राज्यों और सेक्टर से मिले इनपुट को शामिल करते हुए, शायद आइटम लेवल तक और ज़्यादा डिटेल्ड CPI डेटा पब्लिश करने का भी प्लान बना रही है।

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27 फरवरी को आएंगे GDP के आंकड़े

सरकार 27 फरवरी को नए कंज्यूमर खर्च पैटर्न के आधार पर ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट डेटा भी जारी करेगी। इसके बारे में एनालिस्ट का कहना है कि इससे इकोनॉमी के साइज़ में तेज़ी से बढ़ोतरी दिख सकती है। इससे भारत, जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने की राह पर आगे बढ़ सकता है।

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