Influencer Industry: इन्फ्लुएंसर इंडस्ट्री का कारोबार 10000 करोड़ के पार, रील बनाने से हो रही है मोटी कमाई

Influencer Industry: इन्फ्लुएंसर का बाजार देश में 10 हजार करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा का पहुंच चुका है। लेकिन, कमाल की बात ये है कि इसमें से सिर्फ 25 फीसदी मार्केट ही ऑर्गेनाइज्‍ड सेक्‍टर का है। यह आंकड़ा बाजार में बताए जाते रहे 3000 से 4000 करोड़ तक के अनुमान से काफी ज्यादा है।

Jitendra Singh
पब्लिश्ड10 Dec 2025, 05:14 PM IST
Influencer Industry: डिजिटल क्रांति की धाक आधिकारिक आंकड़ों में भी दिखने लगी है।
Influencer Industry: डिजिटल क्रांति की धाक आधिकारिक आंकड़ों में भी दिखने लगी है।

Influencer Industry: भारत की डिजिटल दुनिया में इन दिनों एक नई क्रांति चल रही है। इसका नाम इन्फ्लुएंसर क्रांति है। स्मार्टफोन और इंटरनेट ने आम लोगों को एक बड़ा मंच दे दिया है। इस बड़े मंच से बहुत से लोग रातों रात स्टार बन जाते हैं। हर कोई आसानी से पॉपुलर हो जाता है। इसके साथ ही यह बाजार करोड़ों में फल फूल रहा है। हालात ये हैं कि एक रील, एक वीडियो या एक पोस्ट लाखों की डील में बदल रही है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केट 10,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है।

इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग SaaS प्लेटफॉर्म KlugKlug की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग इंडस्ट्री में 10,000 करोड़ से ज्यादा का खर्च हो चुका है। यह आंकड़ा बाजार में बताए जाते रहे 3000 से 4000 करोड़ तक के अनुमान से काफी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग खर्च का सिर्फ एक-चौथाई हिस्सा ही दिखने वाले, ऑर्गनाइज़्ड चैनलों से होता है, जबकि बाकी 75 फीसदी सीधे ब्रांड और क्रिएटर्स के बीच होता है। जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं बन पाता। इसी वजह से अब तक इस इंडस्ट्री का असली आंकड़ा सामने नहीं आ पाता था और सारी तस्वीर गलत दिखती रहती थी।

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छोटे क्रिएटर, बड़ा असर

माइक्रो और नैनो इन्फ्लुएंसर अब ब्रांड्स के लिए ज्यादा उपयोगी बनते जा रहे हैं। KlugKlug की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही बड़े इन्फ्लुएंसर ज्या मशहूर हों, लेकिन ग्राहकों पर छोटे क्रिएटर्स का असर भी काफी है। इसकी वजह से ब्रांड्स आसानी से और प्रभावी तरीके से अपने ग्राहकों तक पहुंच बना पा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, क्रिएटर इकॉनमी पारंपरिक तरीकों से पूरी तरह दिखाई नहीं देती। हजारों माइक्रो और नैनो इन्फ्लूएंसर्स ब्रांड्स के लिए बड़ी मात्रा में निवेश आकर्षित कर रहे हैं लेकिन उनका असर अक्सर आंकड़ों में दर्ज नहीं हो पाता है। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 20 से ज्यादा इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग एजेंसियां ऐसी हैं, जो हर साल यानी सालाना 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू बना रही हैं। यह सिर्फ संगठित सेक्टर की तस्वीर है, जबकि पूरी इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग इंडस्ट्री इससे कहीं बड़ी है।

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विज्ञापन का बदल रहा है ट्रेंड

भारत का तेजी से बढ़ता Direct-to-Consumer यानी D2C सेक्टर अब इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के तरीके को बदल रहा है। 100 से ज्यादा D2C ब्रांड्स हर साल 20 करोड़ रुपये से अधिक इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पर खर्च कर रहे हैं और यह सब वह अपनी इन-हाउस क्रिएटर टीमों के जरिए कर रहे हैं। वो किसी एजेंसियों के जरिए नहीं कर रहे हैं।

AI और ऑटोमेशन से इंडस्ट्री में नई क्रांति

KlugKlug के CEO कल्याण कुमार के अनुसार, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग अब सिर्फ ग्रोथ नहीं कर रही, बल्कि पॉजिटिव बदलाव से गुजर रही है। AI और प्रिसिजन टारगेटिंग के चलते कंटेंट, कॉमर्स और कंज्यूमर इंटेंट एक साथ जुड़ गए हैं।

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