
Iran Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग की वजह से हॉर्मुज स्ट्रेट पिछले कई दिनों से सुर्खियों में छाया हुआ है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमले के बाद पूरी दुनिया में तेल और गैस का संकट खड़ा हो गया। इसबीच अमेरिका ने सीजफायर का ऐलान कर दिया। हालांकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाज के गुजरने को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर वसूल रहा है। भारत ने एक सुसंगत रुख अपनाते हुए इस जलमार्ग से मुक्त और सुरक्षित आवागमन की मांग की है। यह मुद्दा पाकिस्तान में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता में एक अहम अड़चन बना हुआ है।
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अलाएद्दीन बोरौजेर्दी ने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) को बताया कि होर्मुज पार करने वाले कुछ जहाजों से ट्रांजिट शुल्क के रूप में 20 लाख डॉलर डॉलर वसूलना ईरान की ताकत को दर्शाता है। बता दें कि 28 फरवरी को ईरान पर शुरू हुए हमले के बाद से ये रास्ता तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों के लिए बंद हो गया।
इस हफ़्ते की शुरुआत में एक अस्थायी सीजफायर पर सहमति बनने के बाद, भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत और ईरान के बीच टोल के मुद्दे पर "बिल्कुल कोई चर्चा नहीं" हुई है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पश्चिम एशिया संकट पर अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग में में कहा, 'जी हां, हमें भी टोल लगाए जाने की कुछ खबरें मिली हैं, हम होर्मुज स्ट्रेट से बिना किसी रुकावट के और सुरक्षित आवागमन की मांग कर रहे हैं। हमने अपने बयान में यही बात कही थी और आज भी दोहरा रहे हैं।
ईरान की ओर से शुल्क वसूलने की खबरें युद्धविराम से पहले भी सामने आई थीं, जबकि भारत को ईरान द्वारा मित्र देश के रूप में आवागमन की अनुमति दी गई है। लेकिन क्या भारत ने भी कोई शुल्क चुकाया? नई दिल्ली ने इस बात से साफ इनकार किया है कि ऐसा कोई भुगतान किया गया था। रणधीर जायसवाल ने 9 अप्रैल को कहा, 'होर्मुज स्ट्रेट से जहाज गुजरने के बदले पैसे को लेकर हमारे और ईरान के बीच कोई बात नहीं हुई है।
भविष्य में अगर ऐसी स्थिति बनती है तो उस समय इस पर निर्णय लिया जाएगा। हम होर्मुज स्ट्रेट से बिना किसी रोक-टोक के और सुरक्षित शिपिंग की मांग जारी रखेंगे। इस रास्ते से भारतीय ध्वज वाले 8 LPG टैंकर गुजरे हैं। भारत अपनी तेल और गैस आपूर्ति के लिए मिडिल ईस्ट पर अत्यधिक निर्भर है। इससे से 90 फीसदी तक आयात किया जाता है।
होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित एक संकरा सा रास्ता है। यही एकमात्र समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी या अरब सागर से जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात है। होर्मुज स्ट्रेट को फारस की खाड़ी का प्रवेश द्वार भी कहते हैं क्योंकि इसी संकरे रास्ते से सऊदी अरब, कुवैत, कतर, इराक जैसे दुनिया के प्रमुख उत्पादक देश अपना तेल बाहर भेजते हैं। हर दिन करीब 15 मिलियन बैरल कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है, जो दुनिया की सप्लाई का करीब पांचवां हिस्सा है।
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